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अंतरिक्ष स्टेशन: चीन ने सफलतापूर्वक लांच किया मुख्य मॉड्यूल, राष्ट्रपति जिनपिंग ने दी बधाई

Fri, 30 Apr 2021 02:08 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, बीजिंग
एजेंसी, बीजिंग Published by: देव कश्यप Updated Fri, 30 Apr 2021 02:08 AM IST
सार

  • लांचिंग के बाद यह मॉड्यूल नामित कक्षा में पहुंच गया है, जिस पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देशवासियों को बधाई दी
  • ‘तियानहे’ नामक इस मॉड्यूल का अर्थ स्वर्ग महल है जिसे मार्च5बी वाई2 रॉकेट के माध्यम से दक्षिणी द्वीपीय प्रांत हैनान के वेनचांग प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया गया

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China successfully launches main module for Space Station
चीनी के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को उस वक्त बड़ा प्रोत्साहन मिला जब उसने अपने अंतरिक्ष स्टेशन के मुख्य मॉड्यूल को सफलतापूर्वक लांच कर लिया। चीन का लक्ष्य अगले साल के अंत तक इस अंतरिक्ष केंद्र का निर्माण कार्य पूरा करने का है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लांचिंग के बाद यह मॉड्यूल नामित कक्षा में पहुंच गया है, जिस पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देशवासियों को बधाई दी।

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‘तियानहे’ नामक इस मॉड्यूल का अर्थ स्वर्ग महल है जिसे मार्च5बी वाई2 रॉकेट के माध्यम से दक्षिणी द्वीपीय प्रांत हैनान के वेनचांग प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। इसे देश के अंतरिक्ष कार्यक्त्रस्म में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। चाइना एकेडमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (सीएएसटी) में अंतरिक्ष के उप मुख्य डिजाइनर बाई लिन्होउ ने कहा, तियानहे मॉड्यूल अंतरिक्ष केंद्र तियानगोंग के प्रबंधन एवं नियंत्रण केंद्र के रूप में काम करेगा और इसमें एक साथ तीन अंतरिक्ष यान खड़े करने की व्यवस्था है। इस मॉड्यूल की लंबाई 16.6 मीटर, व्यास 4.2 मीटर और वजन 22.5 टन है और यह चीन द्वारा विकसित सबसे बड़ा अंतरिक्ष यान है।
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‘टी’ के आकार का होगा अंतरिक्ष केंद्र 
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, अंतरिक्ष केंद्र का आकार अंग्रेजी के वर्ण ‘टी’ की तरह होगा जिसके मध्य में मुख्य मॉड्यूल होगा जबकि दोनों ओर प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कैप्सूल होंगे। प्रत्येक मॉड्यूल का वजन 20 टन होगा और जब अंतरिक्ष केंद्र पर, अंतरिक्ष यात्री और सामान लेकर यान पहुंचेंगे तो इसका वजन 100 टन तक पहुंच सकता है।
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चीन के लिए बेहद अहम अभियान 
इस अंतरिक्ष केंद्र को पृथ्वी की निचली कक्षा में 340 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जा रहा है और यह 10 साल तक काम करेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि उचित देखरेख और मरम्मत से यह 15 साल तक काम कर सकता है। चीन के लिए यह अभियान बेहद अहम रहा है।

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