रूसी आपदा में चीन को अवसर: विरोधी देशों पर ऊर्जा निर्भरता घटाने का मिला मौका
रूस और चीन के बीच बनी सहमति के मुताबिक चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉर्प रूसी कंपनी गैजप्रोम से अब अधिक प्राकृतिक गैस खरीदेगी। ये सहमति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फरवरी के पहले हफ्ते में हुई बीजिंग यात्रा के दौरान बनी थी। उस समय रूस यूक्रेन पर हमला करने की तैयारियों में जुटा हुआ था...
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यूक्रेन युद्ध से चीन को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता बनाने का मौका मिला है। चीन लंबे समय से इस मामले में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों पर अपनी निर्भरता घटाना चाहता था। इन देशों के साथ चीन के संबंध लगातार अधिक तनावपूर्ण होते गए हैं।
पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए सख्त प्रतिबंधों के कारण अब चीन को अधिक कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस बेचना रूस की मजबूरी बन गई है। पर्यवेक्षकों की राय है कि चीन इस हालत का पूरा फायदा उठा रहा है। उसने रूसी द्वीप सखालिन तक गैस पाइपलाइन लाने में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। सखालिन चीन के सीमाई प्रांत हिलोंगजियांग के करीब है। उस परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- वसंत का सीजन आते ही पाइपलाइन के निर्माण कार्य की रफ्तार तेज हो गई।
चीन खरीदेगा प्राकृतिक गैस
रूस और चीन के बीच बनी सहमति के मुताबिक चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉर्प रूसी कंपनी गैजप्रोम से अब अधिक प्राकृतिक गैस खरीदेगी। ये सहमति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फरवरी के पहले हफ्ते में हुई बीजिंग यात्रा के दौरान बनी थी। उस समय रूस यूक्रेन पर हमला करने की तैयारियों में जुटा हुआ था।
फिलहाल, रूस और चीन के बीच एक ही गैस पाइलपलान है, जिसे पॉवर ऑफ साइबेरिया के नाम से जाना जाता है। इस पाइलपाइन से गैस की सप्लाई 2019 में शुरू हुई थी। फिलहाल इसकी क्षमता 38 अरब सीयू मीटर गैस आपूर्ति करने की है। अब दोनों देश एक नई पाइपलाइन बिछाने की तैयारियों में जुटे हैं, जिससे हर साल 10 अरब सीयू मीटर गैस चीन पहुंचेगी।
अभी तक चीन अपनी गैस जरूरत का 40 फीसदी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) ऑस्ट्रेलिया से आयात करता है। दस फीसदी गैस वह अमेरिका से मंगवाता है। चीन के ऊर्जा उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘क्वैड के सदस्य देशों पर हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही थी। यह ऐसा मसला है, जिसका समाधान निकालना हमारे लिए जरूरी है।’ क्वैड्रैंगुलर सिक्योरिटी डॉयलॉग (क्वैड) में भारत और जापान के अलावा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं। समझा जाता है कि ये समूह चीन पर काबू रखने के लिए बनाया गया है।
रूस-चीन के बीच चार पाइप लाइनें बनाने पर वार्ता
अब रूस की मजबूरी में चीन को अपनी समस्या का समाधान नजर आया है। चाइना यूनिवर्सिटी में रूस-मध्य एशिया अनुसंधान केंद्र के उप निदेशक लिउ चियान ने हाल में चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स को बताया था, रूस और चीन के बीच चार पाइपलाइनें बनाने पर बातचीत चल रही है। उनके बन जाने पर रूस हर साल चीन को 100 बिलियन सीयू मीटर गैस भेज सकेगा।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि इस सौदे में फिलहाल रूस का भी फायदा है। रूस ने हाल के वर्षों में औसतन हर साल यूरोप को 170 से 200 बिलियन सीयू मीटर गैस की सप्लाई की है। जिस समय यूरोप उसकी गैस का विकल्प ढूंढ रहा है, तब चीन के रूप में रूस को एक नया और बड़ा बाजार मिल रहा है।