चीन की क्रूरता: दो पूर्व सरकारी अधिकारियों को मौत की सजा, उइगर मुस्लिमों के लिए उठाई थी आवाज
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चीन उइगर मुसलमानों पर अत्याचारों को लेकर दुनिया भर से आलोचना झेल चुका है, लेकिन बावजूद शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों पर ड्रैगन की क्रूरता लगातार बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में चीन ने उइगर समुदाय के दो पूर्व सरकारी अधिकारियों को मौत की सजा सुना दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के शिनजियांग प्रांत की एक अदालत ने उइगर समुदाय के दो पूर्व सरकारी अधिकारयों को मौत की सजा सुनाई है। पूर्व सरकारी अधिकारियों के ऊपर चीन में रहते हुए अलगाववादी हरकतों को अंजाम देने का आरोप था। बता दें कि इन दोनों पूर्व सरकारी अधिकारियों ने उइगर मुस्लिमों के पक्ष में आवाज उठाई थी। शिनजियांग प्रांत सरकार की वेबसाइट पर मंगलवार को जारी एक बयान के मुताबिक, शिनजियांग न्याय विभाग के पूर्व प्रमुख शिरजात बावुदुन को देश को विभाजित करने की साजिश रचने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। पिछले दो साल से शिरजात बावुदुन के खिलाफ मुकदमा चल रहा था।
आतंकी संगठन से संबंध रखने का आरोप
चीन ने आरोप लगाया कि शिरजात बावुदुन के इस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) जिसे संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी सगंठन घोषित किया है, उसके साथ संबंध थे। चीनी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शिरजात बावुदुन ने 2003 में तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के किसी खास सदस्य से मुलाकात की थी। बता दें कि पिछले साल तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट को अमेरिका ने आतंकवादी संगठनों की लिस्ट से बाहर कर दिया था। अमेरिका ने कहा था कि इस संगठन के खिलाफ कुछ भी सबूत नहीं हैं, जिसके आधार पर इसे आतंकी संगठन करार दिया जाए।
शिक्षा विभाग के पूर्व प्रमुख को भी सजा-ए-मौत
शिरजात बावुदुन के अलावा चीन ने सत्तार सावूत नाम के पूर्व शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी को भी मौत की सजा सुनाई है।सत्तार सावूत शिनजियांग शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक हैं। सत्तार को धार्मिक उन्माद फैलाने, आतंकवादी संगठनों से संबंध रखने, धार्मिक कट्टरता को पाठ्यक्रम में शामिल करने और घूसखोरी करने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है। उइगर समुदाय के दोनों पूर्व सरकारी अधिकारियों को जल्द मौत की सजा दी जाएगी।
चीन इस वक्त उइगर मुस्लिमों को लेकर पूरी दुनिया में आलोचना का सामना कर रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बड़े देश उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ चीन पर दबाव भी बना रहे हैं ताकि चीन का प्रशासन उइगर मुस्लिमों के साथ इंसानो जैसा सलूक करे, लेकिन चीन के ताजा फैसले ने साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव का चीन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।