हमलावर हुआ चीन: अमेरिका पर लगाया आतंकवाद भड़काने का आरोप
पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीन ने शिनजियांग में दस लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को शिविरों में बंद कर रखा है, जहां उनसे जबरिया मजदूरी कराई जाती है। अब चीन का आरोप है कि शिनजियांग में हुई आतंकवादी गतिविधियों के पीछे अमेरिका का हाथ रहा है...
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चीन ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी आरोपों की मुहिम तेज कर दी है। गुरुवार सुबह चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने एक पोस्टर जारी किया, जिसमें अमेरिका पर एतिहासिक रूप से उपनिवेशवादी नजरिया अपनाने का इल्जाम लगाया गया। इसमें कहा गया कि अमेरिका में मूलवासी लोगों का कत्ल-ए-आम, अफ्रीकी लोगों को गुलाम बनाना, देश के अंदर नस्लीय भेदभाव की नीति और दूसरे देशों के भीतर सैनिक हस्तक्षेप 'अमेरिकी उपनिवेशवाद' का हिस्सा हैं। इसके पहले बुधवार को चीन ने आधिकारिक रूप से अमेरिका पर शिनजियांग में आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया।
बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने इल्जाम लगाया कि अमेरिका ने शिनजियांग प्रांत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों को धन और प्रशिक्षण मुहैया कराया है, ताकि वे इस प्रांत में अशांति फैला सकें। गौरतलब है कि इन दिनों शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिम समुदाय के कथित दमन के आरोप में अमेरिका और यूरोपीय देश चीन पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इसके जवाब में चीन ने दुनिया को पूरे घटनाक्रम की अलग कहानी बताने की मुहिम छेड़ दी है। इसके तहत अपना बचाव करने के साथ-साथ पश्चिमी देशों पर जवाबी आक्रमण करने की रणनीति चीन ने तैयार की है।
पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीन ने शिनजियांग में दस लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को शिविरों में बंद कर रखा है, जहां उनसे जबरिया मजदूरी कराई जाती है। अब चीन का आरोप है कि शिनजियांग में हुई आतंकवादी गतिविधियों के पीछे अमेरिका का हाथ रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस सिलसिले में एडमंड्स नाम की एक महिला के बयान जिक्र किया, जो मार्च 2002 तक अमेरिकी खुफिया संस्था एफबीआई में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करती थी। एडमंड्स को एफबीआई ने तब बर्खास्त कर दिया था। लेकिन उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने दावा किया कि एफबीआई क भीतर गलत कामों पर परदा डालने की कोशिशों का उन्होंने खुलासा किया, इसलिए उन्हें हटाया गया।
एडमंड्स का एक वीडियो चीनी राजनयिकों और चीन के सरकारी मीडिया ने जारी किया है। चीन के सरकार समर्थक अखबार चाइना डेली ने उसे चीन के सोशल मीडिया माइक्रो ब्लॉगिंग साइट वीबो पर सोमवार को पोस्ट किया। उसके बाद कई देशों में स्थित चीनी दूतावासें ने उसे ट्विटर पर शेयर किया। इस वीडियो में एडमंड्स को ये कहते सुना गया है कि शिनजियांग में हुई आतंकवादी गतिविधियों के पीछे अमेरिका का हाथ था।
बुधवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अमेरिकी सेना के रिटायर्ड अधिकारी लॉरेंस विल्करसन के एक वीडियो का भी जिक्र किया। इसमें विल्करसन ने कहा है कि अगर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए चीन को अस्थिर करना चाहती है, तो उसका सबसे अच्छा उपाय शिनजियांग में उइगर समुदाय के विद्रोह को भड़काना है। चीनी प्रवक्ता ने कहा- ‘ये दोनों वीडियो इस बात के मजबूत साक्ष्य हैं कि अमेरिका स्थित चीन विरोधी ताकतों ने शिनजियांग में अशांति भड़काई और उसका इस्तेमाल चीन की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए किया।’ झाओ ने कहा कि अमेरिका ने अपनी संस्था नेशनल एनडॉवमेंट फॉर डेमोक्रेसी के जरिए शिनजियांग और हांगकांग में अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराया है।
विश्लेषकों का कहना है कि चीन के ताजा रुख से ये साफ है कि अब उसने हमलावर होने का फैसला कर लिया है। इससे पश्चिमी देशों के साथ उसका टकराव और बढ़ सकता है। साथ ही इसे दोनों पक्षों में शीत युद्ध शुरू होने का संकेत भी समझा जा रहा है।