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India-US Military Drill: भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास से घबराया चीन, सीमा विवाद का जिक्र कर जताया विरोध

Thu, 25 Aug 2022 06:30 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद बीजिंग Published by: Amit Mandal Updated Thu, 25 Aug 2022 06:30 PM IST
सार

अक्टूबर में एलएसी के करीब उत्तराखंड के औली में संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करने की योजना है। इसे लेकर चीन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद में किसी तीसरे पक्ष का दखल नहीं होना चाहिए।  

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China objects to US-India military drills; says firmly opposed to third party meddling on border issue
भारतीय सेना - फोटो : Social media

विस्तार

उत्तराखंड में होने वाले भारत-अमेरिका के संयुक्त सेनाभ्यास पर चीन की चिंता बढ़ गई है। उसने इसे सीमा मुद्दे से जोड़ते हुए गुरुवार को अपना विरोध जताया। चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वह सीमा मुद्दे में किसी भी तीसरे पक्ष के दखल देने का कड़ा विरोध करता है और उम्मीद करता है कि भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सैन्य अभ्यास नहीं करने के द्विपक्षीय समझौतों का पालन करेगा। चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) के प्रवक्ता वरिष्ठ कर्नल तान केफेई ने हाल ही में हिमालय की दक्षिणी तलहटी में भारत-अमेरिका द्वारा संयुक्त युद्ध अभ्यास करने के सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। अक्टूबर में एलएसी के करीब उत्तराखंड के औली में "वॉर एक्सरसाइज" (युद्ध अभ्यास) कोड नाम से एक संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करने की योजना है।  

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चीन-भारत सीमा मुद्दे पर तीसरे पक्ष के दखल का विरोध 
चीनी सेना के प्रवक्ता ने एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम चीन-भारत सीमा मुद्दे में किसी भी रूप में दखल देने के लिए किसी भी तीसरे पक्ष का कड़ा विरोध करते हैं। हमारा हमेशा से यह कहना रहा है कि दो देशों के सैन्याभ्यास के दौरान किसी तीसरे पक्ष को लक्षित न किया जाए। इसका मकसद क्षेत्रीय शांति और स्थिरता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच का सीमा विवाद दो देशों के बीच का मामला है और इसमें किसी तीसरे की जरूरत नहीं है।  
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चीन बोला- दोनों देशों ने लगातार संवाद किया है 
तान केफेई ने कहा कि दोनों देशों ने लगातार संवाद किया है। हर स्तर पर बातचीत जारी रही है। उन्होंने कहा कि चीन और भारत के बीच 1993 एवं 1996 में समझौते हुए थे। अमेरिकी सेना का भारत आकर अभ्यास करना इनका उल्लंघन है। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि इन दो समझौतों के मुताबिक कोई भी देश एलएसी के पास सैन्याभ्यास नहीं कर सकता। कर्नल केफेई ने कहा, उम्मीद है कि भारतीय पक्ष दोनों देशों के नेताओं और संबंधित समझौतों पर महत्वपूर्ण सहमति का सख्ती से पालन करेगा, द्विपक्षीय संवाद के माध्यम से सीमा मुद्दों को हल करने की अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखेगा। 
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1993 और 1996 के समझौतों का चीनी रक्षा मंत्रालय का संदर्भ दिलचस्प है क्योंकि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में एलएसी में विवादित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिकों को भेजा जिससे एक बड़ा सैन्य गतिरोध पैदा हो गया है जो अभी भी जारी है। भारत ने कहा है कि पीएलए की कार्रवाई द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है। सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की एक श्रृंखला के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट पर और गोगरा क्षेत्र में सेना हटाने की प्रक्रिया पूरी की।

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