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China: पश्चिम के संभावित प्रतिबंधों से निपटने की तैयारी में जुट गया है चीन, ड्रैगन को सता रही इस बात की चिंता

Thu, 25 Aug 2022 03:16 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 25 Aug 2022 03:16 PM IST
सार

चीन को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि अमेरिका अपने यहां मौजूद चीन के धन को जब्त कर सकता है। रूस के मामले में उसने ऐसा कदम उठाया था। इस आशंका के कारण यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही चीन अमेरिकी मुद्रा डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाने में जुटा हुआ है।

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China is preparing to deal with the possible sanctions of the West, is making this plan
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चीन अब यह मान कर चल रहा है कि ताइवान मसले पर देर-सबेर पश्चिम देश उस पर रूस जैसे सख्त प्रतिबंध लगाएंगे। उन हालात का मुकाबला करने के लिए उसने अब एक विशेष योजना पर अमल शुरू कर दिया है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन युद्ध को लेकर जब पश्चिमी देशों ने रूस पर अपेक्षा से अधिक कड़ी पाबंदियां लगा दीं, तभी चीन के कान खड़े हो गए थे। तभी चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने संभावित स्थितियों को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर अमेरिका और उसके साथी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तो चीन दुनिया के लिए अपने दरवाजे बंद कर नियोजित अर्थव्यवस्था की तरफ लौट जाएगा।  इस महीने ताइवान को लेकर बढ़े संकट के बीच चीन सरकार ने उस रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर अमल की तैयारी शुरू कर दी है। उस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगर पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण चीन के निर्यात और आयात में बाधा पड़ी, तो विदेशों से होने वाली आमदनी गायब हो जाएगी। साथ ही कहा गया कि उस हाल में देश में गहरा खाद्य संकट पैदा हो सकता है। 

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चीन के सामने ये मुश्किलें
इस महीने चीनी अधिकारियों ने अनुमान लगाया है कि सबसे बड़ी मुश्किल सोयाबीन के अभाव से पैदा होगी। चीन अपने आधा से भी ज्यादा सोयाबीन आयात के लिए अमेरिका पर निर्भर है। चाइनीज भोजन में सोयाबीन का खूब इस्तेमाल होता है। इसके अलावा पिग (सूअर) फार्मिंग में भी इसकी जरूरत पड़ती है। दुनिया में पोर्क (सूअर के मांस) की कुल जितनी खपत है, उसका लगभग 60 फीसदी हिस्सा चीन के लोग हजम करते हैं।  चीन के एक व्यापारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया से कहा- ‘पोर्क की महंगाई का असर बीफ औऱ चिकेन के भाव पर भी पड़ता है। अगर ये चीजें ज्यादा महंगी हुईं, तो सामाजिक अशांति पैदा हो सकती है।’ चीन में पोर्क के भाव में मार्च के बाद काफी तेजी देखी गई है। चीन में आर्थिक नीति की प्रभारी संस्था नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन ने कुछ रोज पहले पिग फार्मिंग से जुड़े अधिकारियों की एक बैठक बुलाई। उसके बाद इस कारोबार से जुड़ी कंपनियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने भंडार से अधिक बिक्री करें। उनसे फ्रोजेन पोर्क की सप्लाई बढ़ाने को कहा गया। 
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अपने यहां मौजूद चीन के धन को जब्त कर सकता है अमेरिका
चीन को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि अमेरिका अपने यहां मौजूद चीन के धन को जब्त कर सकता है। रूस के मामले में उसने ऐसा कदम उठाया था। इस आशंका के कारण यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही चीन अमेरिकी मुद्रा डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाने में जुटा हुआ है। हाल में ये खबर आई कि उसने डॉलर का भुगतान कर 80 टन सोना खरीदा है।  इसके बावजूद अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पश्चिमी प्रतिबंधों की चीन पर बेहद गहरी मार पड़ेगी। हालांकि उसका काफी असर प्रतिबंध लगाने वाले देशों पर भी पड़ेगा। चीन से मैनुफैक्चरिंग आयात पर अमेरिका और यूरोप की निर्भरता है। इसके बावजूद अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया, तो पश्चिमी देश कोई समझौता करेंगे, इसकी संभावना नहीं है। चीन भी इस बात को समझ रहा है। 

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