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अमेरिका को टक्कर: विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर मुक्त करने के रूस के फैसले से खुश है चीन
Thu, 15 Jul 2021 03:35 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 15 Jul 2021 03:35 PM IST
सार
विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों के असर से बचने के लिए रूस ने ये बड़ा कदम उठाया है। डॉलर में कारोबार पर अमेरिकी प्रतिबंधों से बहुत बुरा असर पड़ता है। रूस के वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि इस समय दुनिया के अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति संबंधी रूझानों को देखते हुए उसने डॉलर से खुद को मुक्त करने का फैसला किया...
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युआन चीन डिजिटल मुद्रा
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
रूस के अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर को हटाने का लक्ष्य पूरा कर लेने से चीन खुश है। उसका मनोबल इस बात से और ज्यादा बढ़ा है कि रूस ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अब चीनी मुद्रा युवान को अधिक जगह देने का फैसला किया है। गौरतलब है कि बीते हफ्ते रूस ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा शून्य कर दिया। इसके पहले तक उसके भंडार में 35 फीसदी हिस्सा डॉलर का था। दूसरी तरफ रूस ने युवान का हिस्सा बढ़ा कर 30.4 फीसदी करने का फैसला किया। यूरो के बाद सबसे ज्यादा अहमियत रूस ने युवान को ही दी है। यूरो का हिस्सा 39.7 फीसदी रखने का फैसला किया गया है।
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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बुधवार को कहा कि रूस के इस कदम से चीन के आर्थिक विकास में उसके भरोसे की झलक मिली है। साथ ही इससे यह जाहिर हुआ है कि रूस चीन के साथ अपने सहयोग को भविष्य में और बढ़ाने का पक्का इरादा रखता है। वांग ने कहा कि रूस और चीन के संबंध दोनों के लिए फायदेमंद हैं और चीन भी इसे बढ़ावा देता रहेगा।
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पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन दुनिया के कारोबार में अपनी मुद्रा की भूमिका बढ़ाने की रणनीति पर चल रहा है। उसे भरोसा है कि साल 2050 तक युवान दुनिया भर में ‘पसंदीदा मुद्रा’ (करेंसी ऑफ चॉइस) बन जाएगी। ये लक्ष्य इसी साल मई के मध्य में हुई एक बैठक में तय किया गया था। उस बैठक में चीन ने अपने घरेलू बाजार के विकास का फैसला किया था, ताकि भविष्य में उसे निर्यात आधारित विकास रणनीति पर कम निर्भर रहना पड़े। चीन की सोच यह है कि वह अपने बड़े बाजार के कारण दुनियाभर के कारोबारियों को चीन की शर्तों पर व्यापार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
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इसी रणनीति के हिस्से के तौर पर चीन युवान को वैश्विक मुद्रा बनाने की कोशिश कर रहा है। पिछले साल उसने डिजिटल युवान का प्रयोग इसी मकसद से शुरू किया था। उसने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कारोबार की व्यवस्था स्विफ्ट के साथ एक साझा उद्यम भी शुरू किया है। स्विफ्ट अमेरिका से संचालित व्यवस्था है।
पिछले हफ्ते रूस ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अलग-अलग मुद्राओं की भूमिका के बारे में नई योजना का एलान किया था। उसके उसके मुताबिक उसके भंडार में अब यूरो और युवान के अलावा ब्रिटिश पाउंड का हिस्सा पांच फीसदी, जापानी येन का 4.7 फीसदी और स्वर्ण का 20.2 फीसदी होगा। गौरतलब है कि रूस ऐसा पहला बड़ा देश है, जिसने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा शून्य कर दिया है।
विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों के असर से बचने के लिए रूस ने ये बड़ा कदम उठाया है। डॉलर में कारोबार पर अमेरिकी प्रतिबंधों से बहुत बुरा असर पड़ता है। रूस के वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि इस समय दुनिया के अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति संबंधी रूझानों को देखते हुए उसने डॉलर से खुद को मुक्त करने का फैसला किया। उसने यूरो और युवान की भूमिका इसलिए बढ़ाई है, क्योंकि यूरोपियन यूनियन और चीन रूस के सबसे बड़े व्यापार भागीदार बन कर उभरे हैं।