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New Year: नव वर्ष में रिश्तेदारों से संपर्क करने वाले तिब्बतियों को चीन ने दी सजा, क्रूरता से कुचला विरोध

Mon, 27 Feb 2023 06:55 AM IST
वीरेंद्र शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ल्हासा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ल्हासा Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Mon, 27 Feb 2023 06:55 AM IST
सार

चीन के मना करने के बाद भी जिन लोगों ने नववर्ष की शुभकामना देने के लिए जिससे संपर्क किया, उन पर जासूसी व देशद्रोह जैसे आरोप लगाकर पूछताछ की जा रही है।

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China is continuously suppressing and torturing to eliminate Buddhist culture from Tibet
China-Tibet Flag - फोटो : iStock

विस्तार

तिब्बत से बौद्ध संस्कृति को खत्म करने के लिए चीन लगातार दमन और अत्याचार कर रहा है। बीते सप्ताह 21 से 23 फरवरी तक तिब्बती नववर्ष लोसर के दौरान चीन ने तिब्बतियों को उनके निर्वासित रिश्तेदारों से संपर्क नहीं करने दिया।
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चीन के मना करने के बाद भी जिन लोगों ने नववर्ष की शुभकामना देने के लिए जिससे संपर्क किया, उन पर जासूसी व देशद्रोह जैसे आरोप लगाकर पूछताछ की जा रही है। यहां तक कि तमाम तिब्बती लोगों ने अपने रिश्तेदारों को इस संबंध में पहले ही जानकारी दे दी थी कि उनसे लोसर के दौरान संपर्क नहीं किया जाए, क्योंकि चीन इस दौरान कड़ी निगरानी करने वाला है। यहां तक कि लोसर की शुरुआत से पहले 20 फरवरी को ल्हासा, जिगात्से और चामडो में हजारों लोगों के मोबाइल फोन की जांच की गई। 
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तिब्बत में अल्पसंख्यक हुए बौद्ध
तिब्बत राइट कलेक्टिव की एक रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलियाई सांसद जैनेट राइस लिखती हैं, तिब्बत के अंदर और बाहर हर जगह मौका मिलते ही चीनी अधिकारी तिब्बती बौद्धों को प्रताड़ित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चीन दस लाख से ज्यादा तिब्बती बौद्धों की हत्या कर चुका है।
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सीमावर्ती गांवों में सैनिक बसा रहा चीन
चीन भारत की सीमा से लगते तिब्बती गांवों में मौजूद बौद्ध लोगों को विस्थापित कर सैनिकों को बसा रहा है। खासतौर पर चीन यह चाल उन गांवों में चल रहा है, जिन गांवों पर भारत और भूटान भी दावा करते हैं। वहां इसे अभियान का रूप देकर काम चल रहा है।


क्रूरता से कुचला विरोध
1959 में मार्च में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण किया था, जिसके विरोध में तिब्बत की जनता चीन के खिलाफ लड़ी, लेकिन चीन की सेना ने विरोध को कुचलते हुए तिब्बत पर कब्जा कर लिया था।
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