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संदेश: अलीबाबा पर जुर्माने से बाजार में खलबली, क्या है चीन के इस फैसले का मकसद?

Mon, 12 Apr 2021 05:18 PM IST
कुमार संभव अमर उजाला ब्यूरो, बीजिंग
अमर उजाला ब्यूरो, बीजिंग Published by: कुमार संभव Updated Mon, 12 Apr 2021 05:18 PM IST
सार

  • अलीबाबा ग्रुप पर 2.8 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया। गौरतलब है कि अलीबाबा दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है। 

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China imposed billion dollors fine on alibaba for market monopoly
अलीबाबा कंपनी - फोटो : iStock

विस्तार

चीन में बड़ी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने की हुई शुरुआत से यहां के देसी कॉरपोरेट सेक्टर में खलबली है। इस कार्रवाई से ये संदेश गया है कि बाजार के नियमों का उल्लंघन करने वाली बड़ी कंपनियों को भी अब नहीं बख्शा जाएगा। इन कार्रवाइयों के जरिए चीन सरकार ने ये पैगाम भी दिया है कि बाजार पर पूरा नियंत्रण उसका ही है। इस बात को मान कर ही किसी कंपनी को चीन में कारोबार करना होगा। हाल में सबसे बड़ी कार्रवाई अलीबाबा ग्रुप पर हुई है। उस पर 2.8 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया। गौरतलब है कि अलीबाबा दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है। उसके संस्थापक जैक मा को चीन में एक आइकॉन माना जाता रहा है। अलीबाबा के मामले में दिए 12 हजार शब्दों के विस्तृत आदेश में चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर मार्केट रेगुलेशन (एसएएमआर) ने बाजार की परिभाषा भी दी है।
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शंघाई स्थित ईस्ट चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ पॉलिटिकल साइंस एंड लॉ में प्रतिस्पर्धा अधिनियम सेंटर के कार्यकारी निदेशक झाई वेई ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘यह ऐसा फैसला है जिसे एक मील का पत्थर माना जाएगा। भविष्य के मामलों में इसका इस्तेमाल संदर्भ सामग्री के तौर पर होगा। इसके पहले चीन में कोई ऐसा मामला नहीं हुआ था, जिसमें एकाधिकार (मोनोपॉली) के नजरिए से इस बात को परिभाषित किया गया हो कि किसी कंपनी के किस व्यवहार को अपनी वर्चस्व वाली हैसियत का दुरुपयोग करना माना जाएगा।’
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अलीबाबा को जो जुर्माना लगा, वह 2019 में रहे उसके कुल राजस्व का चार फीसदी है। चीन के एंटीट्रस्ट (एकाधिकार विरोधी) कानून के तहत दस फीसदी तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस लिहाज से अलीबाबा पर हलका जुर्माना ही लगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का यूरोप और अमेरिका में भी अध्ययन किया जाएगा। इसकी वजह यह है कि अमेरिका और यूरोपीय देश अमेजन, एपल, फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों के डिजिटल मार्केट में एकाधिकर की समस्या से जूझ रहे हैँ। अलीबाबा कंपनी ने एसएएमआर के फैसले को स्वीकार कर लिया। उसे इसके खिलाफ अपील करने का अधिकार था, लेकिन उसने जुर्माना चुकाने का निर्णय कर लिया है।
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चीन की विनियामक संस्थाएं देश की दूसरी टेक कंपनियों की भी अब कड़ी निगरानी कर रही हैं। खास कर जिन कंपनियों की वजह से कोरोना महामारी के दौर में देश में वित्तीय अस्थिरता का खतरा पैदा हुआ, उन्हें अब निशाने पर लिया गया है। अब उन्हें उनकी हदें बताई जा रही हैं। अलीबाबा के मामले में रेगुलेटर ने ये तय किया है कि पूरा ऑनलाइन रिटेल प्लैटफॉर्म सर्विस मार्केट एक ही बाजार की परिभाषा के तहत आता है। इसलिए रेगुलेटर ने अलीबाबा की इस दलील को मंजूर नहीं किया कि बिजनेस टू कंज्यूमर (सीधे उपभोक्ता को बिक्री) और सेल्स टू शॉपर्स (व्यापारियों और व्यक्तियों को बिक्री) को अलग- अलग बाजार माना जाए। चूंकि इस पूरे बाजार में अलीबाबा का हिस्सा 50 फीसदी से ज्यादा है, इसलिए मोनोपॉली माना गया।

अलीबाबा पर ये आरोप भी साबित हुआ कि वह एक्सक्लूसिव डील के नाम पर व्यापारियों को सिर्फ उसके प्लैटफॉर्म पर बिक्री करने के लिए मजबूर करती है। इस फैसले का असर यह होगा कि अब ऐसा व्यवहार गैर कानूनी माना जाएगा। इससे अब दूसरी चीनी कंपनियों को सतर्क रहना पड़ेगा। सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी में एसोशिएट प्रोफेसर हैरी गाओ ने कहा है कि अब इन कंपनियों को अपने भीतर अपने व्यवहार की लगातार जांच करते रहने का सिस्टम बनाना होगा।


अलीबाबा के पहले 2015 में चीन में लगभग ऐसे ही आरोप में क्वैलकॉम कंपनी पर जुर्माना लगा था। लेकिन तब उस कार्रवाई को एक कंपनी के खिलाफ उठाया गया कदम समझा गया था। जबकि अब कई कंपनियां जांच के दायरे में हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अब बाजार में नियम लागू करने की एक नई कोशिश होती दिख रही है। ब्लूमबर्ग के विश्लेषक वेय-सर्न लिंग और टिफनी टैम ने एक विश्लेषण में लिखा है कि इस फैसले से अनिश्चय दूर हुआ है। उस लिहाज से देखें तो अलीबाबा पर लगा जुर्माना एक छोटी कीमत ही है। 
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