खोलेगा आपातकालीन भंडार: कितना कारगर होगा आर्थिक संकट से जूझते चीन का तेल बेचने का फैसला?
चीन ने 2017 में सूचना दी थी कि उसने देश में नौ बड़े तेल भंडार बनाए हैं, जिनमें तीन करोड़ 77 लाख टन कच्चा तेल है। तब चीन ने कहा था कि 2020 के अंत तक वह अपने भंडार में साढ़े आठ करोड़ टन तेल इकट्ठा करना चाहता है। अमेरिका भी अपने आपातकालीन तेल भंडार में इतना ही तेल रखता है...
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चीन ने अपने स्ट्रेटेजिक रिजर्व (रणनीतिक भंडार) से कच्चे तेल की बिक्री शुरू की है। चीन कच्चे तेल का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है। वह दुनिया में तेल का सबसे बड़ा दूसरा उपभोक्ता है। ऐसे में उसके अपने भंडार से तेल बेचने के फैसले को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। चीन सरकार ने कहा है कि उसने ये कदम कच्चे तेल की कीमत पर काबू पाने के मकसद से उठाया है। लेकिन कई जानकारों ने इसे चीन में बढ़ रही आर्थिक दिक्कतों का संकेत माना है।
चीन के अनाज और अन्य सामग्री भंडारों की देखरेख करने वाले सरकारी विभाग के मुताबिक चीन अपने राष्ट्रीय भंडार से कच्चे तेल को अलग-अलग खेप में बिक्री के लिए जारी करेगा। ये बिक्री रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को की जाएगी। इस विभाग ने कहा कि ये कदम घरेलू में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए उठाया गया है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। विभाग ने कहा कि इस बिक्री से उत्पादन कार्य में लगी कंपनियों को कच्चे माल की महंगाई के कारण बढ़ रही मुश्किलों से राहत मिलेगी।
चीन सरकार की इस घोषणा के बाद घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 1.6 फीसदी की गिरावट आई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत 1.7 फीसदी गिरी, हालांकि बाद में इसमें फिर कुछ इजाफा देखा गया। चीन सरकार ने यह नहीं बताया है कि वह कुल कितनी मात्रा में तेल अपने भंडार से बेचेगी।
जानकारों के मुताबिक चीन कच्चे तेल के अपने घरेलू उपयोग के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए उसने वर्षों की मेहनत के बाद तेल भंडार बनाया है। उस भंडार में कितना तेल है, इसकी आधिकारिक जानकारी चीन नहीं देता है। आखिरी बार उसने इस बारे में 2017 में सूचना दी थी। तब उसने कहा था कि उसने देश में नौ बड़े तेल भंडार बनाए हैं, जिनमें तीन करोड़ 77 लाख टन कच्चा तेल है। तब चीन ने कहा था कि 2020 के अंत तक वह अपने भंडार में साढ़े आठ करोड़ टन तेल इकट्ठा करना चाहता है। अमेरिका भी अपने आपातकालीन तेल भंडार में इतना ही तेल रखता है। फिलहाल, दुनिया का सबसे बड़ा आपातकालीन तेल भंडार अमेरिका के पास ही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय चीन की अर्थव्यवस्था कई मुश्किलों का सामना कर रही है। इनमें सबसे बड़ी समस्या महंगाई की है। देश का उत्पादक मूल्य सूचकांक अगस्त में 13 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। इसकी सबसे बड़ी वजह पेट्रोलियम के दाम में बढ़ोतरी को बताया गया। बिजली की मांग भी देश में तेजी से बढ़ रही है। इस कारण कई प्रांतों में बिजली की सप्लाई बाधित हुई है।
कुछ दिन पहले चीन सरकार ने चेतावनी दी थी कि अगर पेट्रोलियम और बिजली की कीमत में बढ़ोतरी जारी रही, तो उसका असर आर्थिक वृद्धि दर और रोजगार की सूरत पर पड़ेगा। सरकार ने कहा था कि खास कर छोटे और मझोले कारोबारियों पर इस महंगाई का बहुत बुरा असर हो रहा है।
पिछले महीने जारी एक सरकारी सर्वे के मुताबिक अगस्त में आर्थिक वृद्धि दर महामारी शुरू होने के बाद सबसे निचले स्तर पर रही। महंगाई का खराब असर सेवा क्षेत्र पर भी पड़ा है। अब सरकार ने तेल बेच कर इन समस्याओं पर काबू पाने की कोशिश की है। लेकिन ये कदम कितना कारगर होगा, इसे लेकर संशय बना हुआ है।