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गंभीर चुनौतियों के बावजूद फिलहाल अर्थव्यवस्था में आगे निकल गया है चीन
Wed, 27 Jan 2021 02:54 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 27 Jan 2021 02:54 PM IST
सार
शी ने ‘दावोस एजेंडा’ कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने इसमें विस्तार से बताया कि किस तरह उनके देश ने कोरोना महामारी के समय दूसरे देशों की मदद की है। उन्होंने दुनिया से मिल-जुल कर काम करने की अपील की...
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
दुनिया का अग्रणी देश बनने की चीन की मंशा को अब अमेरिका में काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के ‘दावोस एजेंडा’ कार्यक्रम में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिए भाषण को अमेरिकी मीडिया ने खूब अहमियत दी है। उसका अर्थ समझने के लिए कई विश्लेषण छापे गए हैं। शी ने अपना भाषण सोमवार को दिया था। उनके भाषण यहां यह निष्कर्ष निकाला गया है कि इसी साल या इसके ठीक बाद चीन दुनिया का अग्रणी देश बन जाना चाहता है।
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शी ने ‘दावोस एजेंडा’ कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने इसमें विस्तार से बताया कि किस तरह उनके देश ने कोरोना महामारी के समय दूसरे देशों की मदद की है। उन्होंने दुनिया से मिल-जुल कर काम करने की अपील की। इस सिलसिले में विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि शी ने पहली बार ‘दावोस एजेंडा’ कार्यक्रम को 2017 में संबोधित किया था। उस समय उन्होंने दुनिया को भूमंडलीकरण का महत्व समझाया था।
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अब एक बार फिर उन्होंने उस समय उस थीम को आगे बढ़ाया है, जब दुनिया में संरक्षणवादी नीतियां मजबूत हो रही हैं। इसीलिए शी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को विकास के रास्ते पर लाने की चीन की क्षमता की खूब चर्चा की। उन्होंने कहा कि इसके लिए चीन अपने घरेलू बाजार और देश में बढ़ रही मांग को दुनिया को उपलब्ध कराएगा।
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विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि बीते साल ऐसा पहली बार हुआ, जब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया। उसने यूरोपियन यूनियन से निवेश समझौता किया और 14 अन्य एशिया-प्रशांत क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने में सफल रहा। साथ ही, उसने नई अर्थ नीति घोषित की, जिसमें घरेलू उपभोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि कोरोना महामारी से दुनिया के त्रस्त होने का सबसे ज्यादा लाभ चीन को ही मिला है। बाकी विकसित दुनिया जहां अभी भी इस महामारी की शिकार है, चीन उससे उबर कर आर्थिक विकास की गति हासिल कर चुका है।
पिछले हफ्ते फ्रांस स्थित क्रेडिट इंश्योरेंस कंपनी इउलर हर्मस के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विशेषज्ञ अर्थशास्त्री फ्रांक्वां हुआंग ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसका शीर्षक हैः द वर्ल्ड इज मूविंग ईस्ट, फास्ट (यानी दुनिया तेजी से पूरब का रुख कर रही है)। इसमें हुआंग ने लिखा है- चीन कोविड-19 के झटके से बाकी दुनिया से पहले उबर गया और अब वहां के अधिकारी लंबी अवधि की योजना बना रहे हैं।
एचएसबीसी बैंक की एशियाई अर्थव्यवस्था संबंधी अनुसंधान इकाई के सह-प्रमुख फ्रेडरिक न्यूमैन ने पिछले हफ्ते ही एक रिपोर्ट में कहा कि लॉकडाउन में जाकर और सबसे पहले उससे बाहर आकर चीनी अर्थव्यवस्था बाकी दुनिया से काफी आगे निकल गई है।
लेकिन कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि चीन के भावी विकास के सामने बहुत सी चुनौतियां हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पिछले महीने कहा था कि चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार सरकार के भारी समर्थन पर निर्भर रहा है, जबकि निजी निवेश में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके अलावा कई कंपनियां दिवालिया हुई हैं और कई सरकारी कंपनियां कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट कर रही हैं। इसलिए अभी जो विकास दर दिख रही है, मुमकिन है कि वह अल्पकालिक साबित हो।
इसके अलावा चीन कई भू-राजनीतिक समस्याओं का भी सामना कर रहा है। हांगकांग और शिजियान प्रांत में उस पर मानवाधिकारों के घर हनन के आरोप लगे हैँ। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर और भारत से लगी सीमा पर तनाव का आर्थिक बोझ भी उसे उठाना पड़ रहा है। इन सबसे चीन की विकास दर और आगे की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। मगर फिलहाल हकीकत यही है कि चीन आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है और इस तथ्य को पश्चिमी मीडिया और वहां के जानकार भी स्वीकार कर रहे हैं।