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China: रूस और ईरान से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा चीन, अमेरिका की मांग को ठुकराया
Mon, 04 Aug 2025 08:10 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 04 Aug 2025 08:10 AM IST
सार
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन की 2024 की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि ईरान द्वारा निर्यात किए गए तेल का लगभग 80 से 90 प्रतिशत चीन खरीद रहा है।
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ट्रंप औऱ जिनपिंग
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिका, रूस और ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ती कर रहा है। हालांकि चीन ने अमेरिका की इस मांग को मानने से साफ इनकार कर दिया है। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर भी बातचीत चल रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों में व्यापार समझौता जल्द हो सकता है, लेकिन रूस और ईरान से तेल न खरीदने की बात पर चीन ने सख्त रुख अपनाया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'चीन हमेशा देशहित को ध्यान में रखते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।'
अमेरिका ने 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी
अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने पर चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। जिस पर चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'चीन हमेशा देशहित को ध्यान में रखते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।' चीन ने कहा कि 'दबाव बनाने और जबरदस्ती से कुछ हासिल नहीं होगा। चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की दृढ़ता से रक्षा करेगा।'
चीन की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब दोनों देशों के अधिकारी स्टॉकहोम में व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। चीन के सख्त रुख पर तंज कसते हुए अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जब रूस से तेल खरीदने की बात आती है, तब चीन अपनी संप्रभुता को बहुत गंभीरता से लेता है।
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ये भी पढ़ें- War: मॉस्को का दावा- ड्रोन हमले से रूसी तेल डिपो में लगी आग; जेलेंस्की ने कहा- कैदियों की अदला-बदली पर सहमति
गौरतलब है कि अमेरिका का कहना है कि रूस से जो देश तेल खरीद रहे हैं, उससे रूस की सेना की मदद हो रही है और यूक्रेन में युद्ध जारी है। वहीं ईरान भी तेल बिक्री के पैसों से पश्चिम एशिया में आतंकी संगठनों को फंडिंग दे रहा है। ऐसे में अमेरिका में रूस और ईरान के वित्तपोषण पर रोक लगाना चाहते हैं। अमेरिका ने भारत पर भी इसके लिए 25 प्रतिशत टैरिफ और पेनल्टी लगाने की घोषणा की है।
ईरान का 80-90 फीसदी तेल खरीद रहा चीन
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के प्रतिष्ठित फेलो डैनी रसेल ने कहा कि रूस से तेल खरीदना जारी रखने से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शी जिनपिंग की 'रणनीतिक एकजुटता' बनी रहती है और चीन की आर्थिक लागत में भी उल्लेखनीय कमी आती है। उन्होंने कहा, 'बीजिंग, रूस और ईरान से तेल न खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकता। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण रणनीतिक ऊर्जा आपूर्ति है, और बीजिंग इसे औने-पौने दामों पर खरीद रहा है।' अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन की 2024 की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि ईरान द्वारा निर्यात किए गए तेल का लगभग 80 से 90 प्रतिशत चीन खरीद रहा है।
चीन रूस का भी एक महत्वपूर्ण ग्राहक है, लेकिन रूस से समुद्री कच्चे तेल के निर्यात में भारत के बाद दूसरे स्थान पर है। कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के केएसई इंस्टीट्यूट के अनुसार, अप्रैल में चीन द्वारा रूसी तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गया।
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अमेरिका ने 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी
अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने पर चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। जिस पर चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'चीन हमेशा देशहित को ध्यान में रखते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।' चीन ने कहा कि 'दबाव बनाने और जबरदस्ती से कुछ हासिल नहीं होगा। चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की दृढ़ता से रक्षा करेगा।'
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चीन की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब दोनों देशों के अधिकारी स्टॉकहोम में व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। चीन के सख्त रुख पर तंज कसते हुए अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जब रूस से तेल खरीदने की बात आती है, तब चीन अपनी संप्रभुता को बहुत गंभीरता से लेता है।
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गौरतलब है कि अमेरिका का कहना है कि रूस से जो देश तेल खरीद रहे हैं, उससे रूस की सेना की मदद हो रही है और यूक्रेन में युद्ध जारी है। वहीं ईरान भी तेल बिक्री के पैसों से पश्चिम एशिया में आतंकी संगठनों को फंडिंग दे रहा है। ऐसे में अमेरिका में रूस और ईरान के वित्तपोषण पर रोक लगाना चाहते हैं। अमेरिका ने भारत पर भी इसके लिए 25 प्रतिशत टैरिफ और पेनल्टी लगाने की घोषणा की है।
ईरान का 80-90 फीसदी तेल खरीद रहा चीन
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के प्रतिष्ठित फेलो डैनी रसेल ने कहा कि रूस से तेल खरीदना जारी रखने से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शी जिनपिंग की 'रणनीतिक एकजुटता' बनी रहती है और चीन की आर्थिक लागत में भी उल्लेखनीय कमी आती है। उन्होंने कहा, 'बीजिंग, रूस और ईरान से तेल न खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकता। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण रणनीतिक ऊर्जा आपूर्ति है, और बीजिंग इसे औने-पौने दामों पर खरीद रहा है।' अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन की 2024 की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि ईरान द्वारा निर्यात किए गए तेल का लगभग 80 से 90 प्रतिशत चीन खरीद रहा है।
चीन रूस का भी एक महत्वपूर्ण ग्राहक है, लेकिन रूस से समुद्री कच्चे तेल के निर्यात में भारत के बाद दूसरे स्थान पर है। कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के केएसई इंस्टीट्यूट के अनुसार, अप्रैल में चीन द्वारा रूसी तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गया।
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