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China: महामारी की मार के बीच अब डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं चीन के शिक्षक

Sat, 10 Sep 2022 07:17 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 10 Sep 2022 07:17 PM IST
सार

China: चीन में हर साल दस सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर प्रकाशित हुई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि महामारी आने के बाद से शिक्षकों को रोज सामान्य से अधिक समय काम करना पड़ा है। इस वजह से वे तनाव और चिंता का शिकार हो गए हैं...

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China: Chinese teachers now suffering from depression amid the coronavirus
China- Mental Health Problems - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन में छात्रों की दिमागी सेहत की समस्या लगातार गंभीर होती गई है। लेकिन अब शिक्षक भी मानसिक समस्याओं से प्रभावित हो रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बार-बार लॉकडाउन और उसकी वजह से ऑनलाइन पढ़ाई की बनी मजबूरी का छात्र और शिक्षकों- दोनों की दिमागी हालत पर बहुत खराब असर हुआ है।

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साल 2020 में ही चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के अनुसंधानकर्ताओं ने अपनी एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया था कि देश के लगभग 25 फीसदी किशोर किसी ना किसी प्रकार के डिप्रेशन से पीड़ित हैं। उसके बाद स्कूलों में मनोचिकित्सा की सुविधा देने की कई कोशिशें हुईं। लेकिन शिक्षकों की मानसिक हालत पर आज तक ध्यान नहीं दिया गया है।

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शंघाई की वेबसाइट सिक्स्थटोन.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षक पहले से ही अभिभावकों से पड़ने वाले दबावों के कारण परेशान थे। लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी स्थिति और बिगड़ गई। चीन में लगातार तीसरे साल स्कूल सरकार की जीरो-कोविड नीति के तहत लागू प्रतिबंधों का पालन करते हुए चलाए जा रहे हैं। शिक्षकों के लिए ऐसे प्रतिबंधों के बीच छात्रों को पढ़ाना मुश्किल बना हुआ है।

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पिछले साल के आखिर में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया था कि 75 फीसदी से अधिक शिक्षक हलकी या गंभीर चिंता का शिकार हैं। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि प्राइमरी स्कूलों के 34 फीसदी और मिडल स्कूलों के 28 फीसदी शिक्षकों के डिप्रेशन का शिकार होने की उच्च जोखिम है। वेबसाइट सिक्स्थटोन के मुताबिक हालत इतनी गंभीर हो गई है कि इस वर्ष संसद और सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की सालाना बैठक में इसकी चर्चा हुई। वहां ये बात स्वीकार की गई कि शिक्षक पहले के किसी समय की तुलना में आज ज्यादा थके हुए और ज्यादा चिंतित हैं।

चीन में हर साल दस सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर प्रकाशित हुई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि महामारी आने के बाद से शिक्षकों को रोज सामान्य से अधिक समय काम करना पड़ा है। इस वजह से वे तनाव और चिंता का शिकार हो गए हैं। मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कई शिक्षकों ने शिकायत की कि उनके स्कूल ने उनकी कोई मदद नहीं की है। वहां मौजूद सभी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का ध्यान छात्रों पर केंद्रित रहा है, जबकि शिक्षकों की अनदेखी की गई है।

अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि कोरोना महामारी की चीन की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत गहरी मार पड़ी है। अब शिक्षक खुद को पहले की तरह अच्छी तरह पढ़ा पाने में अक्षम पा रहे हैं। जबकि अभिभावक अक्सर उनकी दिक्कतों पर ध्यान नहीं देते। अगर उनके बच्चों के नंबर घटते हैं, तो स्कूल में आकर वे शिक्षकों पर बरस पड़ते हैं।

चीन के ज्यादातर स्कूलों में अब क्लासरूम में पढ़ाई फिर से शुरू हुई है। शंघाई की एक 26 वर्षीय शिक्षिका ने वेबसाइट सिक्स्थटोन ने कहा कि अब उन्हें रोज छात्रों की स्वास्थ्य संहिता की जांच करनी पड़ती है। छात्रों का स्कूल में पीसीआर टेस्ट कराना शिक्षकों की जिम्मेदारी बना दी गई है। वायरस का संक्रमण रोकने के उपायों को लेकर उन्हें काफी समय तक मीटिंग में गुजारना पड़ता है। इसके बावजूद उनसे उम्मीद की जाती है कि छात्रों में पढ़ाई में कोई कमी ना आए।

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