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चीन : केजी के बच्चे ट्यूशन लेकर दे रहे हैं अंग्रेजी भाषा का टेस्ट, दो साल में पांच लाख करोड़ का होगा बाजार

Mon, 04 Jan 2021 07:50 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 04 Jan 2021 07:50 AM IST
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china children are learning english the business will increase to five lac crore in next 2 years
China corona - फोटो : Twitter

चीन हमेशा से अपने लोगों पर मंदारिन भाषा अपनाने के लिए दबाव डालता आया है लेकिन अब लोगों में अंग्रेजी भाषा का क्रेज जबर्दस्त बढ़ रहा है। जुनून इतना कि माता-पिता केजी में पढ़ रहे बच्चों को भी छह माह ट्यूशन करवाकर लैंग्वेज टेस्ट दिलवा रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्था से मिले सर्टिफिकेट से बच्चे अच्छे स्कूल में एडमिशन पा जाएं और भविष्य में उनके पास अधिक अवसर हों।

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चीन में ब्रिटिश संस्था कैंब्रिज इंग्लिश 2 साल से केईटी टेस्ट ले रही है। एग्जाम सेंटर्स पर अभिभावकों की भीड़ उमड़ रही है। वे किसी भी तरह लैंग्वेज टेस्ट पास करवाना चाहते हैं। उन्हें डर है कि इस बार नंबर नहीं आया तो पता नहीं उनका बच्चा कब यह टेस्ट दे पाएगा।
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दरअसल, यह एग्जाम साल में कुछ ही बार होता है। इसलिए बमुश्किल रजिस्ट्रेशन हो पाता है। पैरेंट्स 5000 युआन (60 हजार रुपए) तक देकर कालाबाजारी से भी सीट सुरक्षित करवाते हैं या सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने के लिए तैयार रहते हैं। इस बार कोरोना के चलते अप्रैल-मई में टेस्ट नहीं हुए। इसलिए अभी भीड़ उमड़ रही है।
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चीन में अंग्रेजी को लेकर बढ़ती दीवानगी को सामाजिक स्पर्धा बढ़ने का संकेत बताया जा रहा है, जहां परिजन तीन साल के छोटे बच्चे का भी रेज्यूमे तैयार करने के लिए तैयार हैं। केईटी में बैठने के लिए सैकड़ों घंटों की तैयारी की जरूरत पड़ती है। दूसरी तरफ, इस ट्रेंड ने चीन में अंग्रेजी की ट्रेनिंग को मुनाफे का धंधा बना दिया है। इसके 2022 तक 5.55 लाख करोड़ रुपए (75 अरब डॉलर) तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

चीन की एक इंग्लिश ट्रेनिंग कंपनी न्यू चैनल इंटरनेशनल एजुकेशन ग्रुप के डायरेक्टर वु झिंग्यायु कहते हैं कि ट्रेनिंग की फीस प्रति घंटा 680 युआन (7600 रुपए) है। टेस्ट से पहले वीकली ट्रेनिंग सेशन (हर हफ्ते 2-3 घंटे) छह महीने तक चलते हैं।’ कैंब्रिज ने केईटी टेस्ट को तीसरी या ऊपर की कक्षा के बच्चों के हिसाब से डिजाइन किया है, लेकिन परिजन दूसरी या छोटी कक्षा के बच्चों से भी यह परीक्षा दिलवा रहे हैं।


स्कूलों को लॉटरी से प्रवेश देने को कहा, पैरेंट्स नहीं मान रहे
चीनी सरकार ने पिछले साल निजी स्कूलों से कहा था कि वे लॉटरी से बच्चों को प्रवेश दें। लेकिन परिजनों पर असर नहीं पड़ा है। वे इस सर्टिफिकेट को अब भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। शंघाई की एक मां कैरोलिन झैंग कहती हैं, ‘बहुत दयनीय स्थिति है, लेकिन कई पैरेंट्स देखादेखी बच्चों को टेस्ट दिलवा रहे हैं।

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