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Hindi News ›   World ›   China: Before CCP congress convention, power struggle inside the Communist Party

China: चीन में महाधिवेशन से पहले कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर छिड़ा है जोरदार सत्ता संघर्ष

Mon, 10 Oct 2022 06:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 10 Oct 2022 06:03 PM IST
सार

China: 16 अक्तूबर से सीपीसी की होने जा रही 20वीं कांग्रेस (महाधिवेशन) के दौरान लोगों की नजर यह देखने पर लगी रहेगी कि क्या राष्ट्रपति शी जिनपिंग ली चियांग को पार्टी पोलित ब्यूरो में शामिल करते हैं। ली चियांग शंघाई के सर्वोच्च अधिकारी हैं और अभी उन्हें शी जिनपिंग का सहयोगी माना जाता है...

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China: Before CCP congress convention, power struggle inside the Communist Party
China- Xi Jinping and Li Keqiang - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन की घटनाओं पर नजर रखने वाले जापानी विश्लेषकों ने राय जताई है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर इस समय सत्ता का जोरदार संघर्ष चल रहा है। ये संघर्ष कुछ उस तरह का ही है, जैसा चार दशक पहले वहां देखने को मिला था। इन विश्लेषकों के मुताबिक चीन का इतिहास ऐसा है कि वहां अंदरूनी सत्ता संघर्षों का क्या परिणाम होगा, इस बारे में अनुमान लगाना हमेशा मुश्किल बना रहता है।

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चार दशक पहले जब जापान और चीन के बीच पहली बार कूटनीतिक संबंध बनने के समय की घटनाओं से संबंधित रहे अधिकारियों ने कहा है कि गुजरे वक्त में भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में सत्ता संघर्ष से संबंधित तीन पहलुओं में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इन अधिकारियों के मुताबिक 1970 के दशक में जापान और चीन के संबंधों को सुधारने की प्रक्रिया ऐसे सत्ता संघर्ष से काफी प्रभावित हुई थी।

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वेबसाइट निक्कईएशिया ने उस दौर के अधिकारियों से बातचीत के आधार पर कहा है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के अंदर के सत्ता संघर्ष का एक पहलू यह है कि उससे विदेश नीति संबंधी निर्णय काफी हद तक प्रभावित होते हैं। दूसरा पहलू यह है कि सत्ता संघर्ष में पराजित होने वाले नेताओँ और गुटों को पार्टी से बाहर कर दिया जाता है। और इसका तीसरा पहलू यह है कि जिन नेताओं के हाथ में असीमित सत्ता रहती है, वे भी अपने सहकर्मियों और सहयोगियों को लेकर हमेशा शक पाले रहते हैं।

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जानकारों के मुताबिक सीपीसी का शंघाई गुट हमेशा सत्ता संघर्ष में अग्रणी रहा है। इसीलिए इस बार 16 अक्तूबर से सीपीसी की होने जा रही 20वीं कांग्रेस (महाधिवेशन) के दौरान लोगों की नजर यह देखने पर लगी रहेगी कि क्या राष्ट्रपति शी जिनपिंग ली चियांग को पार्टी पोलित ब्यूरो में शामिल करते हैं। ली चियांग शंघाई के सर्वोच्च अधिकारी हैं और अभी उन्हें शी जिनपिंग का सहयोगी माना जाता है।

एक समय संघाई गुट का नेतृत्व तत्कालीन पार्टी महासचिव और राष्ट्रपति जियांग जेमिन के हाथ में था। बताया जाता है कि उस दौर में इस गुट ने अपनी जो ताकत बनाई, वह आज तक कायम है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसलिए ये संभव है कि ली चियांग को पार्टी की सर्वोच्च संस्था में लाने को लेकर शी जिनपिंग संशकित हों।

फिलहाल, ली चियांग को प्रधानमंत्री ली किचियांग के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन बताया जाता है कि हाल में शंघाई में कोविड-19 महामारी के दौरान जिस तरह की अफरातफरी फैली से उससे उनकी छवि खराब हुई है। शंघाई में लंबे समय तक के लिए लगाए गए लॉकडाउन को चीन की अर्थव्यवस्था में हाल में आई गिरावट के लिए खास जिम्मेदार माना गया है।

पिछले कुछ समय से धारणा रही है कि राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री ली किचियांग के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। प्रधानमंत्री ली ने हाल में आर्थिक ठहराव के मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया है। साथ ही उन्होंने ‘सुधार और खुलेपन’ की नीति पर चलते रहने की वकालत की है। इन बयानों को शी जिनपिंग के ‘साझा समृद्धि’ के विचार की आलोचना माना गया है। विश्लेषकों का अनुमान है कि इसे देखते हुए शी अगले प्रधानमंत्री के चयन में बहुत सावधानी बरतेंगे। लेकिन मनमाफिक प्रधानमंत्री नियुक्त करने में सफल होने की यह जरूरी है कि वे पहले वे जारी सत्ता संघर्ष में निर्णायक विजय हासिल करें।

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