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अलास्का वार्ता फेल होने के बाद चीन और रूस ने अब तेज कर दी है लामबंदी, सर्गेई लावरोव बीजिंग यात्रा पर

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 22 Mar 2021 02:35 PM IST

सार

चीनी विशेषज्ञों ने कहा है कि अमेरिकी कूटनीति का प्रमुख बिंदु इस समय चीन को घेरना बन गया है। इस सिलसिले में उन्होंने नई दिल्ली में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की बातचीत का भी जिक्र किया है...
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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन के विदेश मंत्री वांग यी
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन के विदेश मंत्री वांग यी - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

अमेरिका और चीन के बीच अलास्का में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के फेल होने के बाद अब चीन ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की सोमवार से शुरू हुई बीजिंग यात्रा का प्रोफाइल बढ़ा दिया है। चीन के कूटनीतिक विशेषज्ञों ने अब खुल कर कहा है कि अलास्का वार्ता के बाद अमेरिका और चीन दोनों अपने-अपने एजेंडे पर आगे बढ़ रहे हैँ। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि सोमवार को जहां अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के लिए ब्रसेल्स जा रहे हैं, वहीं रूस के विदेश मंत्री लावरोव बीजिंग में चीनी नेताओं से बातचीत शुरू कर रहे हैं। विश्लेषकों ने लावरोव की यात्रा को रूस और चीन के बीच मजबूत हो रही अमेरिका विरोधी लामबंदी का हिस्सा माना है।
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चीनी विशेषज्ञों ने कहा है कि अमेरिकी कूटनीति का प्रमुख बिंदु इस समय चीन को घेरना बन गया है। इस सिलसिले में उन्होंने नई दिल्ली में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की बातचीत का भी जिक्र किया है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि ब्रसेल्स में ब्लिंकेन की बातचीत का मुख्य एजेंडा चीन विरोधी रणनीति बनाना है।


विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका ने एक साथ चीन और रूस दोनों के प्रति हमलावर रुख अपना कर इन दोनों देशों को और करीब आने के लिए मजबूर कर दिया है। पिछले हफ्ते जहां अलास्का वार्ता में अमेरिका और चीन के मतभेद कड़वाहट के साथ खुल कर सामने आए, वहीं एक टीवी इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के ‘हत्यारा’ होने की राय से सहमति जता दी। चीन और रूस में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई है।

अब लावरोव की यात्रा को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। उनकी बीजिंग यात्रा से ठीक पहले एक टिप्पणी में चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि यूरेशिया में चीन और रूस की व्यापक रणनीतिक भागीदारी सबसे प्रभावशाली रिश्ता है। ग्लोबल टाइम्स ने कहा- ‘चीन और रूस अपने संबंधों के महत्व को समझते हैं। जब ये दोनों देश अपने संबंधों को मजबूत कर रहे होते हैं, तो वे विनम्रता और संयम के साथ इस क्षेत्र के दूसरे देशों की भावनाओं का भी ख्याल रखते हैं। इन दोनों देशों का संबंध कोई गठबंधन नहीं, बल्कि एक भागीदारी है।’

ग्लोबल टाइम्स ने यह चेतावनी भी दी है कि इस क्षेत्र में कोई भी देश चीन और रूस के खिलाफ एक साथ लड़ने की बात तो दूर अलग- अलग मुकाबला करने की भी नहीं सोच सकता है। टाइम्स ने कहा है- ‘अमेरिका के साथ गठजोड़ करके चीन और रूस के साथ टकराव मोल लेने की किसी देश की कोशिश उसके लिए विनाशकारी साबित होगी।’ ग्लोबल टाइम्स ने आक्रामक लहजे में यह भी कहा है कि जो खेल अमेरिका खेल रहा है, उससे निश्चित रूप से उसे नुकसान होगा और उससे उसके किसी एशियाई सहयोगी देश का भला होने की संभावना नहीं है।

गौरतलब है कि लावरोव दो दिन की बीजिंग यात्रा पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी के आमंत्रण पर आए हैं। इस दौरान वे चीन-रूस संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ साझा चिंता के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मसलों पर भी बातचीत करेंगे। पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि उनकी यात्रा की समाप्ति पर एक साझा बयान जारी होगा, जिसमें सुरक्षा संबंधी मामलों में आपसी सहयोग और तालमेल बढ़ाने का संकल्प जताया जाएगा।

साथ ही ईरान और म्यांमार समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय मसलों पर दोनों देशों की साझा राय जताई जाएगी। विश्लेषकों ने कहा है कि लावरोव की इस यात्रा का एक संकेत यह भी है कि मानवाधिकार के मुद्दे पर दोनों देशों की पश्चिम में हो रही आलोचना को इन दोनों देशों ने नजरअंदाज कर देने का फैसला किया है।
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