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बांग्लादेश की बड़ी उलझन, बच्चियों से बलात्कार कैसे रोकें, लगातार बढ़ रहे हैं बाल यौन शोषण के मामले
Fri, 11 Dec 2020 06:36 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 11 Dec 2020 06:36 PM IST
सार
बच्चियों से बलात्कार के बारे में ताजा रिपोर्ट आइन-ओ-सालीश केंद्र नाम की संस्था ने जारी की है। इसके मुताबिक इस साल ऐसे सबसे ज्यादा मामले अक्टूबर में दर्ज किए गए, जब ये संख्या 229 तक पहुंच गई...
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Protest in Bangladesh
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
बांग्लादेश में बलात्कार लगातार एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। पिछले दिनों इसे लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इसी सिलसिले में जारी एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से अक्टूबर तक बच्चियों से बलात्कार के 856 मामले दर्ज हुए। इस रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि बांग्लादेश में बड़ी संख्या में छोटी उम्र के बच्चे भी ऐसे कुकृत्य का शिकार बन रहे हैं।
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इस साल ऐसे जो खूंखार अपराध दर्ज हुए, उनमें एक चार साल की बच्ची से हुआ बलात्कार का मामला भी है। ये घटना पिछले महीने हुई। पिछले छह नवंबर को इस जुर्म के आरोप में एक 52 साल के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। पिछले महीने 2018 के एक मामले में अपराधी को उम्र कैद सुनाई गई, जिसने चार साल की एक बच्ची से ढाका के पास नवाबगंज में जबरदस्ती की थी।
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पिछले महीने नारायणगंज में एक 11 साल की मानसिक रूप से विकलांग बच्ची से बलात्कार का मामला भी सामने आया था। इन सारी घटनाओं ने समाज के विवेक को झकझोर कर रख दिया है। एक घटना में एक व्यक्ति अपनी पोती से बलात्कार के मामले में पकड़ा गया।
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इस बीच हाल में यहां के अखबारों में कई बच्चों से जबरन समलैंगिक संबंध बनाने से संबंधित खबरें भी छपी हैं। इनमें से कई मामलों में आरोपी स्कूल या मदरसे के शिक्षक हैं। पिछले अक्टूबर में रंगुनिया नामक जगह पर मोहम्मद नजीर नाम के 35 वर्षीय मदरसा शिक्षक को गिरफ्तार किया गया। उस पर आरोप है कि वह लगातार छोटी उम्र के बालकों से जबरदस्ती यौन संबंध बनाता था।
बच्चियों से बलात्कार के बारे में ताजा रिपोर्ट आइन-ओ-सालीश केंद्र नाम की संस्था ने जारी की है। इसके मुताबिक इस साल ऐसे सबसे ज्यादा मामले अक्टूबर में दर्ज किए गए, जब ये संख्या 229 तक पहुंच गई। उसके पहले जून में ऐसे 107 मामले दर्ज हुए थे। 2019 में बच्चियों से बलात्कार के 986 केस दर्ज हुए थे। इसके पहले के वर्षों में ये संख्या काफी कम थी। हालांकि ये ध्यान दिलाया गया है कि मुमकिन है कि तब लोग घटना होने के बावजूद पुलिस के पास ना पहुंचे हों।
बांग्लादेश के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ध्यान दिलाया है कि बच्चों से बलात्कार पूरे दक्षिण एशिया में एक गंभीर समस्या है। स्थानीय मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस आंकड़े का जिक्र किया कि पाकिस्तान में 2020 के पहले छह महीनों में 1,489 बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया गया। ऐसे कुकृत्य का शिकार हुए बच्चों में 785 लड़कियां और 704 लड़के थे। यानी रोज ऐसे आठ मामले हुए। यहां के अखबार ढाका ट्रिब्यून से एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च से मध्य सितंबर तक बलात्कार या गैंगरेप के 13 हजार से ज्यादा मामले हुए हैं।
बांग्लादेश के समाजशास्त्रियों का कहना है कि बच्चे आबादी में एक कमजोर समूह होते हैं। वे आसानी से परिजनों या शिक्षकों का शिकार बन जाते हैं। 'सेव द चिल्ड्रन' नाम की संस्था से जुड़े विशेषज्ञ अब्दुल अल-मामून ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश सरकार ने बच्चों से बलात्कार के बढ़ रहे मामलों की वजह जानने के लिए कोई अध्ययन नहीं कराया है। ये अनुमान लगाया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान लागू हुए लॉकडाउन से ऐसे मामलों में इजाफा हुआ।
गैर सरकारी संगठन बांग्लादेश शिशु अधिकार फोरम के निदेशक अब्दुस शाहिद महमूद ने स्थानीय मीडिया से कहा है कि जब से बलात्कार के लिए मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया, बलात्कार के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि सिर्फ कड़ी सजा का प्रावधान करके ऐसे मामलों को नहीं रोका जा सकता।
ऐसा सिर्फ समाज में चेतना बढ़ाकर और उचित कानून पर अमल की सही व्यवस्था करके ही किया जा सकता है। ढाका यूनिवर्सिटी के समाज विज्ञान विभाग की डीन प्रो. सदेका हलीम ने कहा है कि यौन शिक्षा को स्कूली सिलेबस में शामिल करके ऐसी सामाजिक चेतना लाई जा सकती है, जिससे इस तरह अपराधों पर रोक लग सके।