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जर्मनी के सत्ताधारी गठबंधन का एजेंडा: सितंबर में होने वाले आम चुनावों के लिए जारी किया लोकलुभावन वादों वाला घोषणापत्र

Tue, 22 Jun 2021 06:25 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 22 Jun 2021 06:25 PM IST
सार

विश्लेषकों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन ने विदेश नीति में चीन के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है। चांसलर पद के उम्मीदवार अर्मिन लैशेट ने वादा किया है कि उनकी पार्टी डीजल टैक्स जैसे किसी नए कर का बोझ भी कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर नहीं थोपेगी...

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CDU chancellor candidate Armin Laschet has promised, will not impose the burden of any new tax, like diesel tax, on businessman and consumers
अंगेला मैर्केल के साथ अर्मिन लैशेट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जर्मनी की सत्ताधारी पार्टी ने लोगों से वादा किया है कि कोरोना महामारी के बाद देश में किफायत बरतने की नीति नहीं अपनाई जाएगी। इसका मतलब है कि महामारी के कारण जो कर्ज का बोझ बढ़ा है, उसे चुकाने के लिए नए टैक्स नहीं लगाए जाएंगे। क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) ने ये वादा सितंबर में होने वाले आम चुनाव के लिए जारी अपने घोषणापत्र में किया है। 16 साल में ऐसा पहली बार होगा, जब सीडीयू के नेतृत्व वाला गठबंधन बिना अंगेला मैर्केल के चेहरे के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा।

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इस बार उसकी तरफ से चांसलर पद के उम्मीदवार अर्मिन लैशेट होंगे। लैशेट ने वादा किया है कि उनकी पार्टी डीजल टैक्स जैसे किसी नए कर का बोझ भी कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर नहीं थोपेगी। गौरतलब है कि ग्रीन पार्टी ने ऐसे कर लगाने की बात कही है। माना जा रहा है कि इस बार चुनाव में सीडीयू गठबंधन की मुख्य टक्कर ग्रीन पार्टी से ही होगी। एक समय जनमत सर्वेक्षणों में ग्रीन पार्टी सीडीयू और उसकी सहयोगी पार्टी सीएसयू (क्रिश्चियन सोशल यूनियन) से आगे निकल गई थी। लेकिन एक ताजा सर्वे के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन को अब 27 फीसदी वोट मिलने की संभावना है, जबकि ग्रीन पार्टी को 20 और सोशल डेमोक्रेट्स को 16 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिल सकता है।
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विश्लेषकों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन ने विदेश नीति में चीन के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है। लैशेट ने कहा- ‘चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को चीन का मुकाबला करने के लिहाज से कमजोर समझते हैं। हम यूरोप के लोगों को ये संकल्प दिखाना होगा कि उदार और आजाद समाज बेहद सक्षम और प्रभावी हैं।’ लेकिन उन्होंने कहा- ‘महामारी ने दिखाया है कि हमारी चुनौतियां राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक हैं। इसलिए हमने यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों को अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रखा है।’ इसका मतलब यह समझा गया है कि सीडीयू/सीएसयू ने चीन के साथ सहयोग का रास्ता खुला रखा है।
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जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएं, इस पर सीडीयू/सीएसयू गठबंधन और ग्रीन पार्टी के बीच गहरे मतभेद सामने आए हैं। घोषणापत्र में कहा गया है कि कार्बन उत्सर्जन घटाने वाले उपाय ऐसे होने चाहिए, जो सस्ते हों। इसलिए डीजल कारों पर प्रतिबंध का सवाल ही नहीं है। जबकि ग्रीन पार्टी ने डीजल कारों पर पूरी रोक लगाने का वादा किया है। इस बारे में सीएसयू के नेता और बावरिया राज्य के प्रधानमंत्री मार्कस सोडर ने कहा कि ग्रीन पार्टी के पास कुछ विचार हो सकते हैं, लेकिन उन्हें अनुभव नहीं है। प्रतिबंध और विनियमन के बजाय सीडीयू/सीएसयू ऐसी टेक्नोलॉजी की प्रगति में यकीन करती हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन घटे।

लैशेट ने साफ किया कि महामारी की मार के बावजूद टैक्स नहीं बढ़ाया जाएगा। घोषणापत्र में कहा गया है- ‘सीडीयू गठबंधन समाजवादी पुनर्वितरण के बजाय सामाजिक बाजार आधारित अर्थव्यवस्था के पक्ष में है।’ लैशेट ने कहा कि टैक्स बढ़ाने के बजाय आर्थिक वृद्धि दर को बढ़ाने की कोशिश होगी, जिससे सरकार के खजाने में ज्यादा राजस्व आएगा। उससे महामारी के दौरान बड़े बोझ की भरपाई की जाएगी।


सीडीयू/सीएसयू का टैक्स संबंधी प्रस्ताव सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी और वामपंथी पार्टी डाय लिंके के इस वादे के जवाब में है कि वो सत्ता में आईं तो वेल्थ टैक्स लगाया जाएगा। गौरतलब है कि महामारी के दौरान जर्मन सरकार ने 130.5 अरब यूरो का कर्ज लिया है। अब उसके सामने इसे चुकाने की चुनौती है। इसलिए टैक्स लगाया जाए या नहीं, यह जर्मनी एक गर्म मुद्दा है। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि सत्ताधारी गठबंधन के घोषणापत्र का सार यह है कि नई चुनौतियां सामने होने के बजाय कुछ नहीं बदला जाएगा। सब कुछ वैसा ही चलता रहेगा, जैसा अभी चल रहा है।

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