ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन: नए अध्ययनों से कोविड-19 के असर पर नई रोशनी
विश्लेषण के मुताबिक जो लोग कोविड-19 के ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के शिकार हुए, उनमें 74 फीसदी 65 साल या उससे अधिक उम्र के हैं। जिन 1,507 लोगों की इस संक्रमण के कारण मौत हुई, उनमें 20 फीसदी ऐसे थे, जिनकी मृत्यु का कारण किसी दूसरी समस्या को बताया गया है...
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अमेरिका में कोरोना संक्रमण के मामले हाल में तेजी से बढ़े हैं, लेकिन ब्रेकथ्रू इन्फ्रेक्शन्स के शिकार लोगों में 99.99 फीसदी को कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने या उनकी मौत होने की स्थिति नहीं बनी है। ये बात अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार टीवी चैनल सीएनएन ने कही है। ये विश्लेषण सीएनएन के विशेषज्ञों ने किया। ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन वैसे मामलों को कहा जाता है, जिनमें कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज ले चुका व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है।
ताजा विश्लेषण के मुताबिक बीते दो अगस्त तक अमेरिका में 16 करोड़ 40 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके थे। उनमें से ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के कारण 1,507 लोगों को मौत हुई। यानी कुल टीका ले चुके लोगों में सिर्फ 0.001 फीसदी लोगों की मृत्यु हुई। जहां तक अस्पताल में भर्ती होने की बात है, तो ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के शिकार 7,101 व्यक्तियों के मामले में ये नौबत आई। यह कुल टीकाकरण का 0.005 फीसदी है।
विश्लेषण के मुताबिक जो लोग कोविड-19 के ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के शिकार हुए, उनमें 74 फीसदी 65 साल या उससे अधिक उम्र के हैं। जिन 1,507 लोगों की इस संक्रमण के कारण मौत हुई, उनमें 20 फीसदी ऐसे थे, जिनकी मृत्यु का कारण किसी दूसरी समस्या को बताया गया है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ये लोग ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन का शिकार हुए थे, इसलिए उन्हें कोविड के कारण हुई मौतों की लिस्ट में रखा गया। बीती मई से सीडीसी सिर्फ उन लोगों के आंकड़े रखता है, जो कोविड-19 संक्रमण के कारण या तो अस्पताल में भर्ती हुए या फिर जिनकी मौत हुई।
सीडीसी के मुताबिक अब तक इस बारे में किसी पैटर्न की पहचान नहीं हो सकी है कि क्या किसी खास आबादी समूह के लोग ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन से अधिक पीड़ित होते हैं। क्या किसी खास कंपनी की वैक्सीन लेने वाले लोगों के ऐसे संक्रमण का शिकार होने की अधिक संभावना रहती है, इस बारे में भी कोई पैटर्न नहीं दिखा है।
इस बीच कनाडा में हुए एक अध्ययन से संकेत मिला है कि नवजात शिशुओं के कोरोना से संक्रमित होने के मामले बेहद कम हैं। इसके बावजूद वहां के विशेषज्ञों ने शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसके और उसकी माता की कोविड जांच करने को जरूरी बताया है। ये अध्ययन जेएएमए नेटवर्क ऑपेन जर्नल में छपा है। इसके मुताबिक छह हजार से ज्यादा नवजात शिशुओं की जांच की गई। उनमें से सिर्फ 2.9 फीसदी को कोविड-19 से संक्रमित पाया गया। अध्ययनकर्ताओं ने दावा किया है कि नवजात शिशुओं पर कोविड-19 के प्रभाव का यह पहला अध्ययन है।
इस अध्ययन में तुरंत जन्मे से शिशु लेकर चार महीनों तक के शिशुओं की कोविड जांच की गई। पाया गया कि शिशुओं के कोविड संक्रमित होने की माध्यमिक (मेडियन) उम्र 108 दिन है। अध्ययन में सिर्फ 12 ऐसे बच्चे थे, जो जन्म के समय ही संक्रमित पाए गए।
अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने शुक्रवार को कहा था कि उसके विशेषज्ञ गर्भावस्था के दौरान कोविड-19 के असर का अध्ययन करने जा रहे हैँ। इस दौरान देखा जाएगा कि गर्भावस्था के दौरान संक्रमित हुई माताओं के भ्रूण पर उसका क्या असर होता है।