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लॉकडाउन में घरों में कार्बन डाइऑक्साइड और जहरीले कणों का स्तर 15-30 फीसदी तक बढ़ा

Thu, 17 Sep 2020 07:24 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Tanuja Yadav Updated Thu, 17 Sep 2020 07:24 PM IST
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carbon dioxide and toxic particles level rose during lockdown cause by corona virus
Cooking - फोटो : सोशल मीडिया

कोरोना काल में एक सकारात्मक बात पूरी दुनिया ने देखी। कोरोना काल के दौरान जब सड़कों पर गाड़ियां नहीं चल रही थी, जब फैक्ट्रियां बंद पड़ी थीं तब प्रकृति में हवा की गुणवत्ता तात्कालिक तौर पर सुधरी थी। हवा इतनी साफ हो गई थी कि दूरस्थ पहाड़ साफ दिखने लगे थे।


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ज्यादातर लोगों को लगता है कि घर में रहकर वायु प्रदूषण से बचा जा सकता है लेकिन सच में ऐसा है नहीं। अगर आप ऐसा सोचते हैं कि बाहर की तुलना में घर में कम वायु प्रदूषण होता है तो ये आपकी एक गलतफहमी है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी का मानना है कि अब बाहर के मुकाबले घर में वायु प्रदूषण का असर दो से पांच फीसदी तक बढ़ गया है। 

वायु की गुणवत्ता जांचने वाली नार्वे की एजेंसी एयरथिंग्स ने अमेरिका और यूरोप के एक हजार से ज्यादा यूजर्स के डाटा का विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण में कंपनी ने पाया कि लॉकडाउन के दौरान घरों में भी कार्बन डाइऑक्साइड और हवा में घुलनशील कणों का स्तर 15-30 फीसदी तक बढ़ गया है। 

इसके अलावा एयर प्यूरिफायर बनाने वाली कंपनी डायसन ने 11 बड़े शहरों में हवा की गुणवत्ता का सर्वे किया है। इस सर्वे में यह पता चला है कि लोगों के घरों में नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक का स्तर भी काफी ज्यादा बढ़ गया है। इनका स्तर घरों में साफ-सफाई और रसोई में तड़का या छोंक लगाने की वजह से बढ़ता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये स्तर जानलेवा भी हो सकता है। इस तथ्य को लेकर यॉर्क यूनिवर्सिटी की इनडोर एयर केमिस्ट्री की प्रोफेसर निकोला कार्सला कहती हैं कि इन दिनों ज्यादातर लोग 90 फीसदी समय घर पर ही बिताते हैं और दस फीसदी समय बाहर रहते हैं। दरअसल, घर और बाहर दोनों जगह होने वाला वायु प्रदूषण बहुत घातक होता है लेकिन घर पर ज्यादा वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से प्राप्त आकंड़ों के मुताबिक सालाना 38 लाख लोगों की मौत घरेलू वायु प्रदूषण की वजह से हो जाती है। जानकारों का कहना है कि घर की हवा इतनी खतरनाक और जहरीली होती है कि लोगों को अस्थमा, निमोनिया, फेफड़े का संक्रमण, कैंसर और दिल संबंधी बीमारियां ज्यादा हो रही हैं। 

आंकड़ों की माने तो दुनिया में अभी भी 30 करोड़ लोग घासलेट, लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करते हैं, जिससे घरेलू वायु प्रदूषण ज्यादा होता है और पीएम 2.5 का रिसाव होता है। ठंड से बचने के लिए घर में लकड़ियां जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का रिसाव होता है।

ऐसे ही घासलेट से चलने वाले स्टोव, गैस भी जानलेवा वायु प्रदूषण फैलाते हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल कभी भी बंद कमरे में नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से ये जानलेवा साबित हो सकते हैं।

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