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Canada: सिख विरोधी हिंसा को नरसंहार बताने वाला प्रस्ताव खारिज, एकमात्र सांसद चंद्रा आर्य की 'न' ने रोका रास्ता

Sat, 07 Dec 2024 07:56 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटेवा Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 07 Dec 2024 07:56 AM IST
सार

कनाडाई सांसद ने हिंदू-कनाडाई समुदाय की चिंताओं को आवाज देने के कारण उन पर जारी खतरों और दबाव को भी उजागर किया। साथ ही चेतावनी दी कि राजनीतिक रूप से शक्तिशाली खालिस्तानी लॉबी संभवतः इस प्रस्ताव को फिर से लाने की कोशिश करेगी।

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Canadian MP Chandra Arya stands against motion to declare 1984 riots as genocide news in hindi
चंद्रा आर्य (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

कनाडा के सांसद चंद्रा आर्य ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को नरसंहार करार देने वाले प्रस्ताव के खिलाफ अपना कड़ा रुख साझा किया। उन्होंने कहा कि वह हाउस ऑफ कॉमन्स में मौजूद एकमात्र सांसद थे, जिन्होंने प्रस्ताव का विरोध किया। साथ ही इसके पारित होने में बाधा पैदा की। 

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'खालिस्तानी फिर इस प्रस्ताव को लाने की कोशिश करेंगे'
कनाडाई सांसद ने हिंदू-कनाडाई समुदाय की चिंताओं को आवाज देने के कारण उन पर जारी खतरों और दबाव को भी उजागर किया। साथ ही चेतावनी दी कि राजनीतिक रूप से शक्तिशाली खालिस्तानी लॉबी संभवतः इस प्रस्ताव को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। 
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सिर्फ मेरी न के कारण...
आर्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, 'आज, सरे-न्यूटन के सांसद ने संसद से सिखों के खिलाफ भारत में 1984 के दंगों को नरसंहार घोषित करने का प्रयास किया। उन्होंने अपने प्रस्ताव को पारित करने के लिए हाउस ऑफ कॉमन्स में सभी सदस्यों से सर्वसम्मति मांगी। मैं सदन में मौजूद एकमात्र सदस्य था, जिसने न कहा और मेरी एक आपत्ति इस प्रस्ताव को स्वीकार होने से रोकने के लिए काफी थी।'
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अगली बार हो सकता है कि हम उतने भाग्यशाली न हो: सांसद आर्या
उन्होंने कहा, 'इसके तुरंत बाद, मुझे संसद भवन के अंदर खड़े होने और न कहने के लिए धमकी दी गई। संसद के भीतर और बाहर मुझे हिंदू-कनाडाई लोगों की चिंताओं को स्वतंत्र रूप से और सार्वजनिक रूप से रखने से रोकने के लिए कई कोशिश की गई। मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने आज इस विभाजनकारी एजेंडे को सफल होने से रोक दिया है, लेकिन हम आत्मसंतुष्ट होने का जोखिम नहीं उठा सकते। अगली बार, हम उतने भाग्यशाली नहीं हो सकते हैं।'

पता नहीं अगली बार मैं रहूं या न
उन्होंने आगे कहा कि खालिस्तान प्रस्ताव को फिर से लाने की कोशिश कर सकता है। राजनीतिक रूप से शक्तिशाली खालिस्तानी लॉबी निस्संदेह 1984 के दंगों को नरसंहार करार देने के लिए संसद पर फिर से दबाव बनाने की कोशिश करेगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि अगली बार जब किसी राजनीतिक दल का कोई अन्य सदस्य इस प्रस्ताव को लाने का प्रयास करेगा तब मैं इसे रोकने के लिए सदन में रहूंगा।


उन्होंने हिंदू-कनाडाई लोगों से आग्रह किया कि वे अपने सांसदों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में प्रस्ताव को रोका जा सके। कनाडाई सांसद ने कहा, 'मैं सभी हिंदू कनाडाई लोगों से अब कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं। अपने स्थानीय सांसद तक पहुंचें और जब भी यह प्रस्ताव उठे, इसका विरोध करने की उनकी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करें। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद भारत में हुए 1984 के सिख विरोधी दंगे निर्विवाद रूप से बर्बर थे।'

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