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Canada: 'कनाडा के लोग ट्रूडो सरकार से त्रस्त, भारत का पक्ष लेने से नहीं चूकेंगे', तनाव के बीच पत्रकार का दावा

Tue, 15 Oct 2024 07:59 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटेवा Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 15 Oct 2024 07:59 AM IST
सार

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कई लंबे समय से कनाडा और भारत के बीच तल्खी बनी हुई हैं। कनाडा लगातार बेतुके आरोप लगाता जा रहा है। 

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Canadian journalist Bordman says Justin Trudeau not seen as credible amid escalating tensions with India
पीएम मोदी, कनाडाई पत्रकार डेनियल बोर्डमैन, पीएम जस्टिन ट्रूडो - फोटो : एएनआई

विस्तार

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा और भारत आमने-सामने हैं। दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा। अब इस मामले में कनाडा के पत्रकार डेनियल बोर्डमैन ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व और विश्वसनीयता में बढ़ती कमी की ओर इशारा किया है। 

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बोर्डमैन का कहना है कि भारत सरकार द्वारा अपने उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों को वापस बुलाने का फैसला दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का स्पष्ट संकेत है।

यह है मामला
गौरतलब है, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कई लंबे समय से कनाडा और भारत के बीच तल्खी बनी हुई हैं। कनाडा ने एक बार फिर हाल ही में निज्जर हत्या की जांच में भारत के राजदूत और अन्य राजनयिकों का नाम बतौर 'पर्सन ऑफ इंट्रेस्ट' लिया। भारत ने इन बेतुके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही सोमवार को भारत ने कनाडा से अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाने का फैसला किया। इसके अलावा भारत ने छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित करने का भी निर्णय लिया है। 
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ट्रूडो से हो रहे लोग निराश 
कनाडा के पत्रकार ने कहा कि खालिस्तानी तंत्र के भीतर कुछ तत्व हैं, वे इस पर पूरी तरह से हावी हैं। खालिस्तानी तत्व पूरी तरह से हमले के मोड में हैं। वे इसे पूरी तरह से जीत के रूप में ले रहे हैं और भारत की निंदा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कनाडाई लोगों के बीच आम भावना पर भी टिप्पणी की। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि अधिकांश कनाडाई लोग ट्रूडो द्वारा स्थिति से निपटने के तरीके से निराश हो रहे हैं।
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भारत का पक्ष लेंगे कनाडाई
उन्होंने कहा, 'कनाडा के अधिकतर लोग इस सरकार से बहुत तंग आ चुके हैं। संस्थाओं पर भरोसा नहीं करते, मीडिया को विश्वसनीय नहीं मानते, यहां तक कि जस्टिन ट्रूडो को विश्वसनीय नहीं मानते। ऐसा देखते हुए बहुत से कनाडाई ट्रूडो को दरकिनार कर भारत का पक्ष ले सकते हैं।'

कनाडा को ठंडे बस्ते में डाला
उन्होंने सलाह दी कि भारत सरकार ने भारत-कनाडा संबंधों की वर्तमान स्थिति को तब तक के लिए सही करने से टाल दिया है, जब तक कि कनाडा में नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो जाता। उन्होंने कहा, 'भारत-कनाडा रिश्ते लंबे समय तक ऐसे ही रहने वाले हैं। मुझे लगता है कि भारतीयों ने कनाडा को ठंडे बस्ते में डाल दिया है जब तक कि हमें एक नई सरकार नहीं मिल जाती।'

डेनियल बोर्डमैन ने आगे कहा, 'भारत सरकार ट्रूडो को एक उचित अभिनेता के रूप में नहीं देखती है। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि वे जस्टिन ट्रूडो को एक उचित अभिनेता के रूप में देखते हैं। मुझे नहीं लगता कि जब भारत की बात आती है तो वह उचित अभिनेता हैं, खासकर तब जब उनका समर्थन जगमीत सिंह द्वारा किया जाता है, जो खुले तौर पर शत्रुतापूर्ण हैं।'
 

सरकार में हुआ बदलाव तो...
उन्होंने भविष्यवाणी की कि यदि सरकार में जल्द बदलाव नहीं होता है तो राजनयिक गतिरोध कम से कम एक वर्ष और जारी रह सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर चुनाव होते हैं तो नई सरकार भारत के साथ संबंधों को लेकर अलग रुख अपना सकती है। कनाडाई पत्रकार ने कहा, 'अगले साल हम एक तरह की मंदी की ओर देख रहे हैं, जहां संबंधों और व्यापार को किनारे कर दिया जाएगा और नजरअंदाज कर दिया जाएगा। जब नई सरकार आएगी और रूढ़ीवादी आतंकवाद विरोधी तथा भारत समर्थक रुख के साथ सत्ता में आएगी, तो मुझे लगता है कि हालात फिर से सुधर जाएंगे।'

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पहले जानते हैं कि अभी क्या हुआ है?
एक साल बाद फिर भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ गया है तो इसके पीछे निज्जर हत्याकांड ही है। दरअसल, सोमवार (14 अक्तूबर) को कनाडा ने निज्जर की हत्या की जांच में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा का नाम बतौर 'पर्सन ऑफ इंटरेस्ट' शामिल किया है। इस बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय को रविवार (13 अक्तूबर) को एक राजनयिक संदेश मिला। 

दरअसल, पर्सन ऑफ इंटरेस्ट का मतलब यह है कि किसी व्यक्ति के बारे में पुलिस को लगता है कि वह किसी अपराध में शामिल हो सकता है लेकिन उस पर औपचारिक आरोप नहीं लगाए सकते और न ही गिरफ्तार किया जा सकता। हालांकि, उसकी गतिविधियों, संपर्कों और अन्य जानकारी को जांच के दायरे में रखा जाता है।

कनाडा के आरोपों पर भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी?
भारत ने कनाडा के आरोपों को बेतुका बताते हुए इसे सिरे से नकार दिया। सोमवार को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार इन बेतुके आरोपों को सिरे से खारिज करता है और इनके पीछे ट्रूडो सरकार के राजनीतिक एजेंडे को वजह मानता है, जो कि वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था, 'ट्रूडो सरकार ने जानने के बावजूद कनाडा में भारतीय राजनयिकों और समुदाय के नेताओं को धमकाने और डराने वाले हिंसक कट्टरपंथियों और आतंकियों को जगह दी है। इनमें राजनयिकों और भारतीय नेताओं को मौत की धमकियां तक शामिल हैं।'


विदेश मंत्रालय की तरफ से यह भी कहा गया था कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का भारत विरोध काफी पहले साबित हो चुका है। ट्रूडो की सरकार एक ऐसे राजनीतिक दल पर निर्भर है, जिसके नेता खुले तौर पर भारत विरोधी अलगाववाद की विचारधारा का समर्थन करते हैं, जिससे मामले सिर्फ बढ़े हैं। 

कनाडाई राजनीति में विदेशी दखल पर आंखें मूंदने को लेकर आलोचनाओं के बावजूद ट्रूडो सरकार लगातार अपने नुकसानों को कम करने के लिए भारत का नाम ले आती है। यह ताजा घटनाक्रम, जिसमें भारतीय राजनयिकों को निशाना बनाया जा रहा है इस दिशा में अगला कदम है। यह कोई संयोग नहीं है कि यह सब तब हो रहा है, जब पीएम ट्रूडो को विदेशी दखल को लेकर एक आयोग के सामने पेश होना है।

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