{"_id":"663191b161727ba98408b443","slug":"canada-world-is-not-unanimous-on-the-reduction-of-plastic-products-important-talks-remained-inconclusive-2024-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"धधकती धरती की अनदेखी: प्लास्टिक उत्पादों में कटौती को तैयार नहीं चीन-सऊदी जैसे देश; चौथे दौर की वार्ता बेनतीजा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
धधकती धरती की अनदेखी: प्लास्टिक उत्पादों में कटौती को तैयार नहीं चीन-सऊदी जैसे देश; चौथे दौर की वार्ता बेनतीजा
Wed, 01 May 2024 06:19 AM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, ओटावा।
एजेंसी, ओटावा।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 01 May 2024 06:19 AM IST
सार
वैश्विक प्लास्टिक उद्योग दुनिया की वजह से दुनिया को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान की सीमा में बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। एक तरफ जहां प्लास्टिक उत्पादन सालाना 2.5 अरब टन कार्बन उत्सर्जन और 22 करोड़ टन कचरा पैदा कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ प्लास्टिक प्रदूषण समुद्रों की गर्मी बढ़ा रहा है।
विज्ञापन
प्लास्टिक कचरा
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दुनिया को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के लिए कनाडा में जारी प्लास्टिक प्रदूषण पर अंतर सरकारी वार्ता समिति (आईएनसी) की चौथे दौर की वार्ता मंगलवार को बेनतीजा ही खत्म हो गई। प्लास्टिक उत्पादन में कटौती को लेकर दुनिया के ज्यादातर देशों में सहमति नहीं बनने के चलते यह वार्ता तय कार्यक्रम से एक दिन ज्यादा चलने के बावजूद किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
विज्ञापन
हालांकि, दुनिया के 75 से ज्यादा देश 25 नवंबर से दक्षिण कोरिया के बुसान में होने वाली पांचवीं और अंतिम दौर की वार्ता से पहले प्लास्टिक उत्पादों में खतरनाक रसायनों की पहचान, प्लास्टिक को फिर से डिजाइन करने, पैकेजिंग, और प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के प्रयासों के वित्तपोषण जैसे विषयों पर तकनीकी कार्य को जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं। प्लास्टिक उत्पादन घटाने पर चर्चा जारी रहेगी।
विज्ञापन
चीन-सऊदी अरब खिलाफ
फ्रांस के वार्ताकार क्रिस्टोफ बेचू ने कहा कि उत्पादन को लक्षित करने के प्रयासों को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर सऊदी अरब और चीन जैसे बड़े पेट्रोकेमिकल उत्पादक देशों के साथ-साथ उद्योग जगत भी इसका विरोध कर रहा है। जबकि, विज्ञान कहता है कि अगर प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना है, तो उत्पादन को सीमित करना होगा। चीन के वार्ताकार यांग शियाओलिंग ने कहा कि इस मामले में प्रगति तभी संभव है, जब गैर-विवादास्पद विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाए। मसलन, कम प्लास्टिक का उपयोग करने या अधिक आसानी से इसे पुनर्चक्रण योग्य बनाने और प्लास्टिक उत्पादों को फिर से डिजाइन करने पर बात करनी चाहिए।
विज्ञापन
2017 में शुरू हुए प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के प्रयास
सीओपी-21 के तहत 2015 में तय किया गया कि जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी को बचाने के लिए ग्रह का औसत तापमान पूर्वा औद्योगिक काल की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं बढ़ने देना है। इसके लिए 2017 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा ने इसे ध्यान में रखकर दुनिया से प्लास्टिक प्रदूषण दूर करने पर सलाह देने के लिए एक विशेषज्ञ समूह बनाया। इस समूह ने दुनिया से धीरे-धीरे प्लास्टिक को खत्म करने की योजनाएं पेश कीं। 2019 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा ने दुनिया को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने पर काम जारी रखने का फैसला किया। इस संबंध में कानूनी समझौते की पहल भी की गई।
प्लास्टिक से धधक रही है धरती
वैश्विक प्लास्टिक उद्योग दुनिया की वजह से दुनिया को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान की सीमा में बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। एक तरफ जहां प्लास्टिक उत्पादन सालाना 2.5 अरब टन कार्बन उत्सर्जन और 22 करोड़ टन कचरा पैदा कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ प्लास्टिक प्रदूषण समुद्रों की गर्मी बढ़ा रहा है, जिससे समग्र रूप से पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है।
लंबे रास्ते पर एक छोटा कदम
प्रशांत महासागर के द्वीपीय राष्ट्र फिजी के प्रमुख वार्ताकार सिवेंद्र माइकल कहते हैं कि यह लंबे रास्ते पर एक छोटा कदम है। दुनिया के पास इस वादे को पूरा करने के लिए सात महीने शेष हैं। उन्होंने बताया कि 50 से ज्यादा देशों ने रवांडा और पेरू के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें प्लास्टिक उत्पादन का वहनीय स्तर पता लगाना है।
स्वागतयोग्य कदम प्लास्टिक प्रदूषण पर
अंतर सरकारी वार्ता समिति (आईएनसी) के पर्यवेक्षकों ने वैश्विक संधि की भाषा पर किए गए विचार विमर्श को स्वागतयोग्य कदम बताया है। इसके साथ समिति ने रेखांकित किया है कि सबसे विवादास्पद विचार प्लास्टिक उत्पादन को सीमित करना है। बातचीत के पांचवें दौर में इस पर सहमति की उम्मीद जताई है।