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चिंताजनक: कनाडा की महिला बनी जलवायु परिवर्तन से बीमार पड़ने वाली दुनिया की पहली मरीज

Tue, 09 Nov 2021 04:47 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 09 Nov 2021 04:47 PM IST
सार

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए इस समय पूरी दुनिया स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में हो रहे कॉप26 जलवायु शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रही है। इसी बीच कनाडा में दुनिया की पहली मरीज सामने आई है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह जलवायु परिवर्तन से बीमार पड़ी है। 

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Canada women becomes first in world to be diagnosed as suffering from Climate Change news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

प्रकृति से खिलवाड़ और संसाधनों के बेपरवाह दोहन पर चिंता अभी तक भविष्य को लेकर थी। लेकिन, अब इसका असर इंसानों पर भी दिखने लगा है। कनाडा की एक बुजुर्ग महिला जलवायु परिवर्तन से बीमार पड़ने वाली दुनिया की पहली मरीज बन गई है। इस महिला को सांस लेने में दिक्कत होने समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

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इस महिला की जांच कूटने लेक अस्पताल के डॉ. काइल मेरिट ने की थी। डॉ. मेरिट के अनुसार इस साल की शुरुआत में चली गर्म हवाओं के चलते इस महिला को एक साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं ने घेर लिया है। महिला की सभी समस्याएं और गंभीर हो गई हैं। जानकारी के अनुसार महिला की उम्र 70 वर्ष के आस-पास है और वह अस्थमा से भी पीड़ित है।
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लू की वजह से जा चुकी है सैकड़ों लोगों की जान
कनाडा और अमेरिका के कुछ हिस्सों में इस साल रिकॉर्ड तोड़ लू चली थी। इसके चलते यहां सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। अकेले ब्रिटिश कोलंबिया में लू के चलते 233 लोगों की मौत हो गई। इसके पीछे का कारण जलवायु परिवर्तन को ही माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बहुत ज्यादा तापमान पहले से बीमार लोगों की स्थिति को और गंभीर कर सकता है।

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21वीं सदी के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में से एक है जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन को लेकर कुछ महीने पहले सामने आई इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की रिपोर्ट में इसे 'मानवता के लिए खतरनाक स्थिति' बताया गया है। रिपोर्ट बताती है कि 1970 से अब तक वैश्विक सतह के तापमान में जितनी वृद्धि हुई है, वह पिछले 2000 साल में किसी भी अन्य 50 वर्ष के कालखंड की तुलना में अधिक है।

वैश्विक तापमान में यह बढ़ोतरी 'पहले से ही दुनिया भर के हर क्षेत्र में मौसम और जलवायु संबंधी कई चरम स्थितियों को प्रभावित कर रही है। हम दुनिया के हर हिस्से में जलवायु परिवर्तन के असर देख रहे हैं। हमारे कार्यों के जरिए पैदा होने वाले जलवायु परिवर्तन के कारण लू, तूफान, आगजनी, बाढ़ और भूस्खलन की संख्या और तीव्रता में तेज वृद्धि हो रही है।

रिपोर्ट में कहा गया था कि जलवायु परिवर्तन न केवल जीवन और आजीविका को प्रभावित करता है, यह 21वीं सदी के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में से एक है। बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा ने कृषि को प्रभावित किया है। यानी यह पोषण को भी प्रभावित करता है। इसलिए केंद्र तथा राज्यों की सरकारों को अपने पोषण कार्यक्रमों में और तेजी लानी चाहिए।

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