Boris Jhonson: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कुर्सी बची, लेकिन पाये अब बहुत कमजोर हो गए हैं
अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में कंजरवेटिव पार्टी के सांसदों ने भाग लिया। उनमें से 211 ने जॉनसन के पक्ष में वोट डाला, जबकि 148 ने उनके खिलाफ मतदान किया। ये नतीजा आने के बाद जॉनसन ने कहा कि पार्टी ने उनमें ‘निर्णायक’ रूप से अपना भरोसा जता दिया है...
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अपनी कंजरवेटिव पार्टी के अंदर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को नाकाम करने में सफल रहे। लेकिन जो नतीजा सामने आया, उससे यह भी साफ हो गया कि अब वे पार्टी के सर्वमान्य नेता नहीं रह गए हैं। विश्लेषकों ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि इस नतीजे के बाद फिलहाल जॉनसन प्रधानमंत्री बने रहेंगे, लेकिन उनका रुतबा पहले जैसा नहीं रह जाएगा।
अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में कंजरवेटिव पार्टी के सांसदों ने भाग लिया। उनमें से 211 ने जॉनसन के पक्ष में वोट डाला, जबकि 148 ने उनके खिलाफ मतदान किया। ये नतीजा आने के बाद जॉनसन ने कहा कि पार्टी ने उनमें ‘निर्णायक’ रूप से अपना भरोसा जता दिया है। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा- मेरी राय में यह राजनीति और देश के लिए एक अच्छा नतीजा है।
गिरी प्रधानमंत्री की लोकप्रियता
लेकिन ब्रिटिश राजनीति के ज्यादातर जानकार जॉनसन के दावे से सहमत नहीं हैँ। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि जॉनसन के खिलाफ उतने वोट पड़े, जितना पहले किसी ने अनुमान नहीं लगाया था। इस मतदान के पहले पार्टी में हफ्ते भर तक तनाव का माहौल रहा। हाल में कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री आवास में नियमों का उल्लंघन कर जश्न मनाए जाने की घटना और देश में बढ़ती समस्याओं के कारण प्रधानमंत्री की लोकप्रियता गिरी है। इस कारण पार्टी के अंदर उनके खिलाफ आवाजें तेज हो रही थीं। उसे देखते हुए ही सोमवार को पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने का फैसला किया।
ब्रिटिश मीडिया की टिप्पणियों के मुताबिक जॉनसन फिलहाल के एक बड़ी चुनौती को नाकाम करने में सफल रहे हैं। इसके बावजूद यह नहीं कहा जा सकता कि उनका राजनीतिक भविष्य अब सुरक्षित हो गया है। फिलहाल, पार्टी के बहुमत ने उनमें जरूर भरोसा जताया है, लेकिन देश के अंदर जॉनसन और कंजरवेटिव पार्टी दोनों की लोकप्रियता गिरती जा रही है। अगले 23 जून को हाउस ऑफ कॉमन्स की दो सीटों के लिए उप चुनाव होना है। मीडिया रिपोर्टों में आम अनुमान है कि कंजरवेटिव पार्टी ये दोनों सीटें गंवा देगी। ऐसा हुआ, तो पार्टी के अंदर जॉनसन के विरोधियों को फिर से आवाज उठाने का मौका मिलेगा।
विश्लेषकों के मुताबिक कंजरवेटिव पार्टी की परंपरा के मुताबिक 12 महीनों के अंदर दूसरा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। उस लिहाज से जॉनसन की कुर्सी एक साल के लिए सुरक्षित हो गई है। लेकिन अगर वे यह नहीं दिखा पाए कि आम मतदाताओं को आकर्षित करने की क्षमता उनमें बची हुई है, तो फिर वे पूरे रुतबे के साथ पार्टी पर अपनी पकड़ नहीं बना पाएंगे।
लोकप्रियता बढ़ाने का करें उपाय
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन के विश्लेषक ल्यूक मैक्गी ने लिखा है- ‘अगर जॉनसन चाहते हैं कि वे अपने पद पर लंबे समय तक बने रहें, तो उन्हें अपनी घटती लोकप्रियता का समाधान ढूंढना होगा। उनकी लोकप्रियता कई कारणों से गिर रही है। इनमें सबसे प्रमुख कारण देश में बढ़ रही महंगाई है।’
सीएनएन के मुताबिक अब जॉनसन के कई सहयोगी भी यह मान रहे हैं कि प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व में अब पहले जैसा जादू नहीं रहा। उनके पास ऐसे विचार नहीं रहे, जिससे लोगों को लुभा सकें। ऐसे में संसदीय बहुमत जॉनसन और कंजरवेटिव पार्टी के लिए फौरी राहत की बात ही है।