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जलियांवाला बाग नरसंहार: 100 साल बाद ब्रिटिश सरकार 'गहरा अफसोस' व्यक्त करेगी

Mon, 08 Apr 2019 01:21 PM IST
Shilpa Thakur वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 08 Apr 2019 01:21 PM IST
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British Government to express deep regret on Amritsar massacre after 100 years
जलियांवाला बाग - फोटो : social media

दुनिया के सबसे जघन्य नरसंहारों में से एक माने जाने वाले जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 साल बाद आखिरकार ब्रिटिश सरकार 'गहरा अफसोस' व्यक्त करेगी। लेकिन किसी बड़ी घटना के घटित होने के 100 साल बाद अफसोस करना क्या उस घाव को कम कर देगा?  रिपोर्ट के अनुसार कथित तौर पर ब्रिटिश मंत्री घटना की शाताब्दी पर 'गहरे अफसोस' का बयान जारी करने वाले हैं। 

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अमृतसर के जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को महात्मा गांधी की तरफ से देश में चल रहे असहयोग आंदोलन के समर्थन में हजारों लोग एकत्र हुए थे। जनरल डायर ने इस बाग के मुख्य द्वार को अपने सैनिकों और हथियारंबद वाहनों से रोककर निहत्थी भीड़ पर बिना किसी चेतावनी के 10 मिनट तक गोलियों की बरसात कराई थी। 

British Government to express deep regret on Amritsar massacre after 100 years
जलियांवाला बाग - फोटो : File Photo
इस घटना में तकरीबन 1000 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 1500 से ज्यादा घायल हुए थे। लेकिन ब्रिटिश सरकार मरने वाले लोगों की संख्या 379 और घायल लोगों की संख्या 1200 बताती है।   

इससे पहले ब्रिटिश शासन के दौरान हुए इस हत्याकांड के शताब्दी वर्ष के सिलसिले में 19 फरवरी, 2019 को हाउस ऑफ लॉर्ड्स (ब्रिटिश संसद) में हुई बहस के दौरान एक मंत्री ने सदन से कहा था कि ब्रिटिश सरकार औपचारिक माफी की मांग पर विचार कर रही है।

हाउस ऑफ लॉर्ड्स के निचले सदन में 'अमृतसर नरसंहार: शताब्दी' के नाम से चल रही चर्चा के दौरान ब्रिटिश मंत्री एनाबेल गोल्डी ने यह भी कहा था कि सरकार ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के 100 साल पूरे होने के मौके को यथोचित व सम्मानित तरीके से याद किए जाने की योजना बनाई है। 
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British Government to express deep regret on Amritsar massacre after 100 years
ब्रिटिश संसद - फोटो : File Photo
संसद में सरकारी व्हिप एवं बैरोनेस-इन वेटिंग पद संभाल रहीं गोल्डी ने कहा, जहां तक हम जानते हैं कि तत्कालीन सरकार (हत्याकांड के समय की ब्रिटिश सरकार) ने लगातार इस नृशंसता की निंदा की थी, लेकिन इसके बाद किसी भी सरकार ने इसके लिए माफी नहीं मांगी। यही कारण है कि माफी मांगने के लिए 13 अप्रैल का दिन चुना गया है। 

हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन इस घटना को ब्रिटिश इतिहास की शर्मनाक घटना बता चुके हैं। अभी इस बात की आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई है लेकिन कहा जा रहा है कि विदेश सचिव जेरेमी हंट इस दौरान भारत आ सकते हैं।
British Government to express deep regret on Amritsar massacre after 100 years
File Photo - फोटो : social media
हंट ने समिति को मौखिक तौर पर इस घटना का ब्योरा देते हुए शताब्दी वर्ष को औपचारिक माफी मांगने के लिए सही समय बताया था। गोल्डी ने भी हंट की तरफ से पिछले साल अक्तूबर में संसद की विदेश मामलों की समिति के सामने जलियांवाला बाग कांड को लेकर दिए गए मौखिक साक्ष्य का भी हवाला दिया था।

जलियांवाला बाग हत्याकांड को लेकर लॉर्ड्स में चर्चा का दौर भारतीय मूल के सांसदों राज लूंबा और मेघनाद देसाई ने शुरू किया था। इन दोनों ने कहा था कि अप्रैल, 2019 में इस नरसंहार की शताब्दी अपनी गलतियों को सुधारने और औपचारिक माफी मांगने का सही समय है। 
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टेरीजा मे - फोटो : Amar Ujala
ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे को माफी मांगने के लिए पत्र लिखने वाले लूंबा और देसाई जलियांवाला बाग शताब्दी सालगिरह समिति के सदस्य हैं। 

लूंबा ने सदन में कहा था कि सरकार के इस कदम की ब्रिटेन में रहने वाले लाखों दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के साथ ही भारतीयों के बीच भी प्रशंसा की जाएगी। देसाई ने बहस के दौरान इस बात की तरफ ध्यान दिलाया कि किस तरह नरसंहार के समय की ब्रिटिश संसद जनरल डायर के अमृतसर में उठाए गए कदम की निंदा करने में चूक गई थी। 

सदन के सदस्य के तौर पर मशहूर ब्रिटिश उद्योगपति लॉर्ड बिलिमोरिया ने भी 'हत्या' के लिए औपचारिक सरकारी माफी मांगे जाने की मांग की, जबकि अमृतसर में ही जन्मी महिला उद्योगपति सेंडी वर्मा ने घटनास्थल से अपने निजी जुड़ाव का हवाला देते हुए इस घटना को ब्रिटिश इतिहास पर काला धब्बा करार दिया था।
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