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25 फरवरी को आएगा नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले का फैसला
Sat, 09 Jan 2021 03:07 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, लंदन।
एजेंसी, लंदन।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 09 Jan 2021 03:07 AM IST
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नीरव मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित करने के मामले में ब्रिटिश अदालत 25 फरवरी को फैसला सुनाएगी। डिस्ट्रिक्ट जज सैम्युअल गूजी ने शुक्रवार लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में दोनों पक्षों की तरफ से केस की निर्णायक दलीलें सुनने के बाद यह तारीख तय की।
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अदालत ने फैसला सुनाने तक नीरव मोदी को न्यायिक हिरासत में ही रखने का आदेश दिया। हालांकि उसके 28 दिन के रूटीन रिमांड पर 5 फरवरी को वीडियो लिंक के जरिये अदालत अंतरिम सुनवाई करेगी। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ 14 हजार करोड़ रुपये का कर्ज घोटाला करने और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिये इस रकम को ठिकाने लगाने के मामले में भारत में वांछित है।
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इससे पहले शुक्रवार को भारत की तरफ से बहस कर रही क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) की बैरिस्टर हेलेन मैल्कॉम ने नीरव के खिलाफ प्रथमदृष्टया धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और न्याय बाधित करने जैसे मामलों पर केंद्रित रखा। 49 वर्षीय मोदी लगातार दूसरे दिन लंदन की वैंड्सवर्थ जेल से वीडियो लिंक के जरिये पेश हुआ।
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मैल्कॉम ने कहा, नीरव मोदी पोंजी स्कीम जैसी योजना चला रहा था और इस कारण ही पीएनबी को बड़ी धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा। मैल्कॉम ने कहा, नीरव ने अपनी तीन पार्टनरशिप कंपनियों डायमंड्स आर यूज, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टीलर डायमंड्स के जरिए अरबों डॉलर का असुरक्षित कर्ज लिया। पीएनबी अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी व्यापार के लिए एलओयू (लैटर ऑफ क्रेडिट) जारी कराए।
उन्होंने कहा, भले ही बचाव पक्ष ने इसे महज व्यवसायिक विवाद बताया है। लेकिन बड़ी संख्या में सुबूत पोंजी जैसी योजना की तरफ इशारा कर रहे हैं, जहां नए एलओयू का उपयोग पुराने एलओयू का पैसा चुकाने के लिए किया गया।
पोंजी स्कीम अमूमन ऐसी निवेश योजना होती है जहां पहले निवेशकों के लिए बाद वाले निवेशकों से पैसा जुटाया जाता है। ऐसे में आखिर में आने वाले निवेशकों को धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ता है। मोदी की तरफ से पेश बैरिस्टर क्लेयर मोंटगॉमरी ने सीपीएस बैरिस्टर की दलीलों को चुनौती देते हुए उनके उचित विश्लेषण की जरूरत बताई।