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आर्थिक संकट: पिज्जा-पास्ता के शौकीन हुए परेशान, 400 रुपये किलो पार पहुंचा भाव, ब्रिटेन से टमाटर गायब

Tue, 28 Feb 2023 06:22 AM IST
वीरेंद्र शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Tue, 28 Feb 2023 06:22 AM IST
सार

पिछले सप्ताह बुधवार को ब्रिटेन के सभी बड़े सुपरमार्केट समूहों ने ग्राहकों के सलाद खरीदने पर सीमा भी लागू कर दी थी। इसे लेकर ब्रिटिश खाद्य आपूर्ति मंत्री थेरिसी कॉफे ने लोगों से कहा है कि जब तक टमाटर नहीं मिलें, शलजम खाकर काम चलाएं।

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British people are currently facing a shortage of vegetables such as tomatoes cucumbers and chillies
टमाटर सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

ब्रिटिश लोग फिलहाल टमाटर, खीरा और मिर्च जैसी सब्जियों की तंगी का सामना कर रहे हैं। कई इलाकों में तो सब्जियों की दुकानों पर कई दिन से टमाटर नहीं पहुंचे हैं। जहां, पहुंच भी रहे हैं वहां टमाटर के भाव बहुत बढ़े हुए हैं। ब्रिटेन में ऑनलाइन सब्जियों के ऑर्डर लेकर डिलिवरी करने वाली कई वेबसाइटों पर टमाटर के भाव 400 रुपये प्रतिकिलो तक हैं।
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पिछले सप्ताह बुधवार को ब्रिटेन के सभी बड़े सुपरमार्केट समूहों ने ग्राहकों के सलाद खरीदने पर सीमा भी लागू कर दी थी। इसे लेकर ब्रिटिश खाद्य आपूर्ति मंत्री थेरिसी कॉफे ने लोगों से कहा है कि जब तक टमाटर नहीं मिलें, शलजम खाकर काम चलाएं। इसे लेकर कॉफे ने कहा कि हमें देश की विशेष परिस्थितियों का खयाल रखने की जरूरत है। इस वक्त टमाटर और खीरा के बारे में सोचने के बजाय परंपरागत कंद जैसे शलजम खाने चाहिए, जो इस मौसम में ब्रिटेन में भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं।  कम उत्पादन बना वजह : ब्रिटेन और नीदरलैंड्स में बिजली की कीमतें बढ़ने की वजह से ज्यादातर ग्रीनहाउसों में सर्दियों के दौरान इन सब्जियों का उत्पादन बहुत कम हो गया है। दक्षिणी यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से आपूर्ति कम होने की वजह से ऐसे हालात हैं।
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आर्थिक संकट में पाकिस्तान, बजट घाटा अनुमान ऐतिहासिक ऊंचाई पर
इस्लामाबाद। चालू वित्त वर्ष में देशवासियों पर 735 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ डालने के बावजूद पाकिस्तान के संघीय बजट घाटे के अनुमान को संशोधित कर इतिहास के उच्चत्म स्तर 62.2 खरब रुपये कर दिया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अस्थिर स्तर ने पाकिस्तान को बुरी स्थिति में धकेल दिया है, जहां ऋण पुनर्गठन ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प दिखाई देता है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक,  संशोधित घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.4 प्रतिशत के बराबर है। संशोधित अनुमान 17 खरब रुपये अथवा 37 फीसदी है।
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