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Britain Economic recession: ब्रिटेन में आर्थिक मंदी का साया गहराने से छायी है हर तरफ मायूसी

Thu, 15 Dec 2022 03:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 15 Dec 2022 03:43 PM IST
सार

Britain Economic recession: बैंक ऑफ इंग्लैंड ने उम्मीद जताई है कि महंगाई अपने चरम बिंदु पर पहुंच गई है, जहां से अब इसमें गिरावट आने की स्थितियां बनेंगी। अगर ऐसा होता है, तो बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी के मौजूदा ट्रेंड को रोक सकता है। तब अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना बनेगी...

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Britain Economic recession: economy will shrink for the next several months due to rising interest rates
Britain Economic recession- Bank of England - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ब्रिटेन के वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने दोहराया है कि इसके पहले कि देश के लोगों को आर्थिक संकट से राहत मिले, अभी हालात बदतर होंगे। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक देश में जैसे हालत बन रहे हैं, उसे देखते हुए हंट का आकलन सही दिशा में है। अपने इसी आकलन के कारण अर्थशास्त्रियों ने अक्तूबर महीने के आर्थिक आंकड़ों को ज्यादा तव्वजो नहीं दी है।

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इन आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर में सितंबर की तुलना में ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी हुई। लेकिन विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि ये बढ़ोतरी सिर्फ इसलिए नजर आती है, क्योंकि सितंबर आर्थिक गतिविधियों में 0.6 फीसदी की सिकुड़न आई थी। सितंबर महीने में रानी एलिजाबेथ द्वितीय की मृत्यु के कारण एक बैंक अवकाश अधिक रहा था। इससे आर्थिक गतिविधियों में अधिक गिरावट दर्ज हुई थी। 

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अक्तूबर में आर्थिक गतिविधियों में 0.5 फीसदी का विस्तार हुआ। इसके बावजूद असल कहानी यह है कि लोगों की वास्तविक आमदनी घटी है। उधर संभावना है कि इसी हफ्ते बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में फिर बढ़ोतरी करेगा। मार्केट एजेंसियों का अनुमान है कि बढ़ती ब्याज दरों के कारण अगले कई महीनों तक अर्थव्यवस्था सिकुड़ेगी। संभव है कि सिकुड़न का ये दौर सर्दियों के बाद भी जारी रहे।

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इस बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड ने उम्मीद जताई है कि महंगाई अपने चरम बिंदु पर पहुंच गई है, जहां से अब इसमें गिरावट आने की स्थितियां बनेंगी। अगर ऐसा होता है, तो बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी के मौजूदा ट्रेंड को रोक सकता है। तब अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना बनेगी। लेकिन कई विशेषज्ञों की राय है कि जिन बुनियादी वजहों से मौजूदा आर्थिक संकट आया है, उसका समाधान निकले बिना ऐसी उम्मीदों के पूरा होने की संभावना नहीं है।

महंगाई और आर्थिक गिरावट इस समय सिर्फ ब्रिटेन की समस्या नहीं है। बल्कि पूरे यूरोप में ऐसा हो रहा है। यहां तक कि अमेरिका भी इस समस्या से नहीं बचा है। हालांकि नवंबर में अमेरिका में महंगाई दर में हल्की गिरावट आई, इसके बावजूद देश के मंदी में फंसने की आशंका मजबूत बनी हुई है। यूरोप की महत्त्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं पर भी मंदी का साया मंडरा रहा है।

यूरोपियन यूनियन के विदेश नीति प्रमुख जोसेफ बोरेल ने कुछ समय पहले कहा था कि रूस से सस्ती ऊर्जा और चीन से सस्ती उपभोक्ता वस्तुओं का आने का क्रम टूट जाने से यूरोप की समृद्धि संकट में पड़ गई है। ब्रिटेन के कई विशेषज्ञों ने भी इस राय से सहमति जताई है। अखबार द गार्जियन में छपे एक विश्लेषण में कहा गया है- ‘अब यह सवाल सामने नहीं है कि अर्थव्यवस्था मंदी में फंसेगी या नहीं। यह तो तय है। अब सवाल सिर्फ यह है कि ये मंदी कितनी गहरी होगी और कितने समय तक जारी रहेगी।’ 

बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपने पिछले आकलन में कहा था कि मंदी का दौर लंबा चलेगा, लेकिन ये मंदी अधिक गहरी नहीं होगी। इसके बावजूद ब्रिटेन में आम मायूसी का माहौल है। देश में हड़तालों के जारी सिलसिले ने लोगों की दिक्कतें और बढ़ा रखी हैं।

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