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ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक मुद्दों की झलक: ईरान पर हमला-टैरिफ नीति की निंदा, लेकिन अमेरिका के नाम पर चुप्पी

Mon, 07 Jul 2025 04:00 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्राजील
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्राजील Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 07 Jul 2025 04:00 AM IST
सार

ब्राजील में शुरू हुए ब्रिक्स सम्मेलन में कई सारे वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही कई मामले में ब्रिक्स देशों ने नाराजगी भी जताई। गौर करने वाली बात ये है कि इस दौरान ब्रिक्स देशों ने ईरान पर हुए हमलों और व्यापार शुल्क बढ़ाने की निंदा की, लेकिन अमेरिका या फिर ट्रंप का नाम नहीं लिया। वहीं ईरान पर इस्राइल की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई।

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BRICS group condemns increase of tariffs in summit overshadowed by Middle East tensions News In Hindi
ब्रिक्स सम्मेलन 2025 - फोटो : ANI

विस्तार

ब्राजील में रविवार को दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन की शुरुआत हुई। इस दौरान कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि ध्यान केंद्रित करने का सबसे बड़ा विषय ब्रिक्स देशों की तरफ से ईरान पर हुए हालिया हमले और व्यापार शुल्क (टैरिफ) की निंदा करना रहा। हालांकि इस दौरान अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया गया। साथ ही ब्रिक्स के इस साझा बयान में इस्राइल की मध्य पूर्व में की जा रही सैन्य कार्रवाई की आलोचना की गई। हालांकि गौर करने वाली बात ये भी है कि ब्रिक्स के 31-पन्नों के बयान में यूक्रेन का नाम सिर्फ एक बार आया और वह भी रूस पर हो रहे यूक्रेनी हमलों की निंदा करते हुए। बता दें कि ब्रिक्स पांच देशों के समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल है।  

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ब्रिक्स देशों ने की टैरिफ नीति की आलोचना
सम्मेलन के पहले ब्रिक्स देशों ने अमेरिका पर सीधा हमला नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि बढ़ते टैरिफ (शुल्क) से वैश्विक व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है और यह डब्ल्यूटीओ के नियमों के खिलाफ है। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने नाटो की तरफ से सैन्य खर्च बढ़ाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शांति की तुलना में युद्ध में निवेश करना हमेशा आसान होता है।
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ईरान के विदेश मंत्री की चेतावनी
ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकीन सम्मेलन में नहीं आ सके, लेकिन उनके विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल को ईरान पर हमलों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस युद्ध के असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरा क्षेत्र प्रभावित होगा। वहीं जब ब्रिक्स ने गाजा की स्थिति पर चिंता जताई, सभी बंधकों को छोड़ने और दो-राष्ट्र समाधान पर जोर दिया। तब ईरान ने इस समाधान पर आपत्ति जताई और कहा कि यह पहले भी नहीं चला और अब भी नहीं चलेगा।

सम्मेलन में दो बड़े नेता नहीं आए
इस बार के सम्मेलन में दो बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी रही। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार इस बैठक में नहीं आए। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हिस्सा लिया, क्योंकि उन पर अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी है।

ब्राजील ने टकराव टालने की कोशिश की
इस दौरान ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद ब्राज़ील ने इस सम्मेलन में ऐसे मुद्दों से दूरी बनाए रखी जो अमेरिका को नाराज कर सकते थे। मामले में एक प्रोफेसर के अनुसार, ब्राजील नहीं चाहता कि ट्रंप फिर से उस पर टैरिफ लगाए, इसलिए उन्होंने सुरक्षित विषयों जैसे व्यापार और स्वास्थ्य पर ध्यान दिया।

BRICS group condemns increase of tariffs in summit overshadowed by Middle East tensions News In Hindi
ब्रिक्स सम्मेलन 2025 - फोटो : ANI
ब्रिक्स में एकजुटता पर भी उठे सवाल
देखा जाए तो ब्रिक्स में इंडोनेशिया, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और यूएई जैसे नए सदस्य भी शामिल हो गए हैं। इसके अलावा बेलारूस, क्यूबा और वियतनाम जैसे 10 रणनीतिक साझेदार भी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतने सारे नए सदस्य होने के बावजूद BRICS खुद को एक मजबूत वैश्विक नेतृत्व के रूप में पेश नहीं कर पा रहा है। कई देशों के नेता नहीं आए, जिससे इसकी एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।

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इतना ही नहीं सम्मेलन के दौरान कई विरोध प्रदर्शन भी हुए। एक संगठन ने ईरान में LGBTQ+ लोगों के खिलाफ भेदभाव के विरोध में समुद्र तट पर इंद्रधनुषी झंडे लगाए। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ब्राजील के अमेजन में तेल ड्रिलिंग योजना का विरोध किया। गौरतलब है कि इस सबके बावजूद राष्ट्रपति लूला के लिए यह सम्मेलन घरेलू राजनीतिक संकट और लोकप्रियता में गिरावट के बीच राहत का मौका बना। उन्होंने पर्यावरण और जलवायु पर भी बातचीत आगे बढ़ाई, जो नवंबर में अमेजन के शहर बेलें में होने वाली COP30 बैठक के लिए अहम है।

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