Brazil: बोल्सोनारो समर्थकों को संभाल पाए, तभी तो ब्रिक्स को समय दे पाएंगे लूला
Brazil: लूला के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवर्तमान राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के उग्र समर्थकों को संभालने की होगी। बोल्सोनारो के समर्थकों ने अभी तक यह नहीं माना है कि उनके नेता चुनाव हार चुके हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद से लगातार वे सेना मुख्यालय में प्रदर्शन कर रहे हैं...
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ब्राजील (Brazil) के निर्वाचित राष्ट्रपति लुइज इनेसियो लूला दा सिल्वा ने मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की। इस बारे में जानकारी खुद लूला ने एक ट्विट के जरिए दी। इसमें उन्होंने बताया कि पुतिन के साथ उनकी ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समूह में नई जान भरने के बारे में बातचीत हुई। लूला राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य थे। इस बार राष्ट्रपति चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि नए कार्यकाल में उनका एक प्रमुख एजेंडा ब्रिक्स को दुनिया के एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित करना होगा।
लूला अक्तूबर में ब्राजील के राष्ट्रपति चुने गए। वे अगले एक जनवरी को कार्यभार संभालेंगे। लेकिन यहां कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय है कि इस बार लूला के लिए स्थितियां अनुकूल नहीं हैं। देश के अंदर उन्हें कई बड़ी चुनौतियों से जूझना होगा। इसके बीच वे ब्रिक्स या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी के लिए कितना वक्त निकाल पाएंगे, यह सवाल कायम है।
लूला के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवर्तमान राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के उग्र समर्थकों को संभालने की होगी। बोल्सोनारो के समर्थकों ने अभी तक यह नहीं माना है कि उनके नेता चुनाव हार चुके हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद से लगातार वे सेना मुख्यालय में प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान सेना से मांग की गई है कि वह लूला को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए खुद सत्ता संभाल ले।
बोल्सोनारो के एक बुजुर्ग समर्थक ने मंगलवार को अंग्रेजी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘बोल्सोनारो की चुनाव सभाओं में भारी भीड़ जुटी। जबकि चुनाव दूसरा व्यक्ति चुनाव जीत गया। यह कैसे संभव है? यह धोखाधड़ी है, जो साबित हो चुकी है।’
लूला के चुनाव जीतने के बाद यह उम्मीद जगी अब ब्राजील एक बार फिर से पर्यावरण संरक्षण की नीतियों को महत्त्व देगा, देश में गैर-बराबरी बढ़ाने वाली नीतियों को पलटा जाएगा और विदेशी मोर्चे पर अपनी पुरानी भूमिका को वापस हासिल कर पाएगा। पुतिन के साथ बातचीत में लूला ने कहा कि अब ब्राजील विश्व मंच पर फिर से लौट आया है और वहां अपनी जिम्मेदारियों को निभाएगा। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि लूला के लिए व्यवहार में ऐसा करना आसान नहीं होगा।
अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के निदेशक रयान बर्ग ने नए कार्यकाल में लूला की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा- ‘लूला की पार्टी उनके प्रति वफादार है। समर्थकों के बीच लूला की छवि देवता जैसी है। लेकिन लूला के सामने अन्य लोगों का समर्थन हासिल करने की बड़ी चुनौती है। मेरी राय में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जिनका समर्थन हासिल कर पाना उनके लिए संभव नहीं होगा। इन लोगों को उनकी कमजोरी के कोई संकेत मिले, आर्थिक विकास में गिरावट आई या टैक्स बढ़ाया गया, तो वे आक्रामक हो जाएंगे।’
विश्लेषकों के मुताबिक लूला के विरोधी सक्रिय रहेंगे और बोल्सोनारो के समर्थकों को गोलबंद किए रखना उनका मकसद होगा। देश में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। बोल्सोनारो के एक अन्य समर्थक ने सीएनएन से कहा- ‘उन्हें पद पर आने दीजिए, हम अपना विरोध जारी रखेंगे।’