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COP26: ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए ब्रिटेन जलवायु वित्त को करेगा दोगुना, इलेक्ट्रिक वाहन और वनों की कटाई रोकने की भी अपील

Mon, 01 Nov 2021 09:17 AM IST
प्रशांत कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Mon, 01 Nov 2021 09:17 AM IST
सार

 दुनिया जलवायु परिवर्तन पर मंथन करने के लिए स्काटलैंड के ग्लासगो में आज से एक बार फिर एकत्रित हो रही है। ग्लासगो में कांफ्रेंस आफ पार्टीज यानी कोप-26 की वार्ता का आयोजन किया गया है। 12 नवंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में तय होगा कि मानवता की सबसे बड़ी चुनौती ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कौन सा देश कितनी दूर जाने के लिए तैयार है?

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Boris Johnson to commit hike in UK's climate finance at start of COP261
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : twitter.com/BorisJohnson

विस्तार

 बदलते मौसम और बढ़ते वैश्विक तापमान को लेकर संयुक्त राष्ट्र पहले चिंता जाहिर कर चुका है। संयुक्त राष्ट्र की जलवायु रिपोर्ट में हाल ही में कहा है कि ग्लोबल वार्मिंग नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। रिपोर्ट के बाद से पूरी दुनिया चिंतित है। इस चुनौती से निपटने के लिए ब्रिटेन के स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में COP26 जलवायु शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। सम्मेलन की मेजबानी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कर रहे हैं। साथ ही इटली भी इस आयोजन की सह मेजबानी कर रहा है। 

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प्रधानमंत्री सभी राष्ट्रों से ग्लोबल वार्मिंग कम करने की अपील करेंगे। साथ ही सभी देशों से कोयले की खपत को धीरे-धीरे समाप्त करने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और वनों की कटाई रोकने का आग्रह करेंगे। ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ जंग लड़ने के लिए ब्रिटेन जलवायु वित्त को दोगुना करेगा। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 2025 तक यूके के जलवायु वित्त को जीबीपी एक बिलियन तक बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। 
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 सम्मेलन का आयोजन 31 अक्तूबर से 12 नवंबर तक होगा। इस दौरान भारत दुनिया के विकसित देशों के सामने सालों से लंबित जटिल मुद्दे उठाने के साथ पेरिस सम्मेलन के दौरान हुए समझौतों और वादों की याद दिलाएगा। सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लासगो पहुंच गए हैं। पीएम यहां 2 नवंबर तक रहेंगे। ‘जलवायु न्याय’ का आह्वान विकासशील देशों की ओर से किया गया है, जिसमें 2050 तक शून्य उत्सर्जन के विचार को जलवायु परिवर्तन के लिए काफी जरूरी माना जाता है।
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यूएन की रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने का दावा
इसी साल अगस्त मे संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से जारी जलवायु रिपोर्ट में   ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिग अगले दो दशकों में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकती है। इसे यदि दो डिग्री सेल्सियस तक ही सीमित रखना है तो ग्रीनहाउस गैसों में 30 प्रतिशत तक कटौती करनी होगी। 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए 55 प्रतिशत की कटौती करनी होगी। जलवायु परिवर्तन पर काम नहीं करने की आर्थिक लागत भी बढ़ती जा रही है।

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