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अमेरिकी व चीनी संस्थान के संयुक्त अध्ययन का दावा, खून की जांच से चलेगा पता, हृदयघात का खतरा तो नहीं
Mon, 20 Jul 2020 02:29 AM IST
अवधेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयार्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयार्क
Published by: अवधेश कुमार
Updated Mon, 20 Jul 2020 02:29 AM IST
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blood test
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वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में दावा किया कि अब रक्त की एक सामान जांच से हृदयाघात के खतरे का जल्द पता लगाया जा सकेगा। इससे हृदयाघात के मामलों में तेजी से उपचार संभव होगा। न्यूयार्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेकभनोलॉजी कॉलेज ऑफ ऑस्टीयोपैथिक मेडिसिन और फूवाई हार्ट हॉस्पिटल बीजिंग के संयुक्त अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि आधे से ज्यादा हृदयाघात के मरीजों के कार्डियक टिशू में थायरॉइड हार्मोन टी3 की मात्रा बेहद कम हो जाती है।
वैज्ञानिकों ने कहा, जबकि हृदयाघात के अधिकतर मामलों में बढ़ती दिल की बीमारी और उक्त रक्तचाप मुख्य कारण होते हैं। ऐसे में टी3 का घटता स्तर हृदयाघात का प्रमुख लक्षण हो सकता है। जितनी जल्दी मरीज में इसकी पहचान होगी उसे उतनी जल्दी बेहतर इलाज मिल सकेगा। आमतौर पर हृदयाघात के मुख्य लक्षण काम का तनाव, सांस लेने में मुश्किल, थकान, पैरों में सूजन और तेजी से दिल धड़कना होता है।
वैज्ञानिकों ने शोध के बाद पाया कि रक्त की जांच से टी3 हार्मोन का स्तर समय समय पर जांचा जा सकता है। इसके कम होते ही डॉक्टर हृदयाघात के खतरे से अलर्ट हो सकते हैं और समय से पहले ही इसका इलाज शुरू किया जा सकता है।
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वैज्ञानिकों ने कहा, जबकि हृदयाघात के अधिकतर मामलों में बढ़ती दिल की बीमारी और उक्त रक्तचाप मुख्य कारण होते हैं। ऐसे में टी3 का घटता स्तर हृदयाघात का प्रमुख लक्षण हो सकता है। जितनी जल्दी मरीज में इसकी पहचान होगी उसे उतनी जल्दी बेहतर इलाज मिल सकेगा। आमतौर पर हृदयाघात के मुख्य लक्षण काम का तनाव, सांस लेने में मुश्किल, थकान, पैरों में सूजन और तेजी से दिल धड़कना होता है।
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वैज्ञानिकों ने शोध के बाद पाया कि रक्त की जांच से टी3 हार्मोन का स्तर समय समय पर जांचा जा सकता है। इसके कम होते ही डॉक्टर हृदयाघात के खतरे से अलर्ट हो सकते हैं और समय से पहले ही इसका इलाज शुरू किया जा सकता है।
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