अच्छी खबरः स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के कालेधन में बीते साल छह फीसदी की आई कमी
- 2007 में सबसे ज्यादा काला धन 9,000 करोड़ रुपये
- स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आंकड़ों से खुलासा
विस्तार
स्विस बैंकों में जमा भारतीयों और भारतीय कंपनियों के कालेधन में 2019 में तकरीबन छह फीसदी की कमी आई है। यह घटकर अब 6,625 करोड़ रह गई है। लगातार तीसरे साल भारतीयों के कालेधन में गिरावट आई है। इससे पहले 2017 में 44 फीसदी और 2018 में 11 फीसदी की कमी आई थी। 2007 के आखिर में यह काला धन सबसे ज्यादा 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा था।
स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक स्विस नेशनल बैंक द्वारा बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारतीयों का जमा धन 1987 के बाद से तीन दशक में तीसरी बार सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है। 1987 में स्विस नेशनल बैंक ने आंकडे़ जुटाने का काम शुरू किया था। स्विस बैंक में जमा मौजूदा काला धन करीब 6,625 करोड़ रुपये है। इसमें ग्राहकों का जमा 4,000 करोड़ से ज्यादा है।
साथ ही दूसरे बैंकों से जमा 650 करोड़ रुपये, ट्रस्ट की ओर से जमा कराई गई 50 करोड़ की रकम और प्रतिभूतियों के रूप में रखी गई 1900 करोड़ की रकम शामिल है। इन चारों घटकों में 2019 में गिरावट आई है। हालांकि, स्विट्जरलैंड में किन भारतीयों या एनआरआई का कितना पैसा स्विस बैंकों में जमा है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
- स्विस एजेंसियों का कालेधर और कर चोरी के खिलाफ जंग में सहयोग का वादा
हालांकि, स्विस एजेंसियां हमेशा यह बात कहती रही हैं कि स्विट्जरलैंड में भारतीय निवासियों की संपत्तियों को कालेधन के रूप में नहीं माना जाए। उनका कहना है कि वे भारत के कालेधन और कर चोरी और धोखाधड़ी के खिलाफ जंग में सक्रिय सहयोग देने का वादा किया है।
- 2018 से सूचनाओं के आदान-प्रदान पर बनी थी रजामंदी
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच 2018 से ही टैक्स संबंधी मामलों की जानकारियों के स्वत: आदान-प्रदान पर सहमति बनी थी। तभी से स्विट्जरलैंड स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा धन की जानकारी देता रहा है। इसके अलावा स्विट्जरलैंड सक्रिय रूप से वित्तीय घपले करने वाले संदिग्ध भारतीयों की भी जानकारी प्रथम दृष्टया सुबूत के आधार पर साझा करता रहा है।