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Singapore: सिंगापुर की संसद में पेश हुआ नया विधेयक, विभिन्न नस्लीय समुदायों के बीच सामंजस्य बनाए रखना मकसद

Tue, 07 Jan 2025 05:26 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 07 Jan 2025 05:26 PM IST
सार

Singapore: विभिन्न नस्लीय समुदायों के बीच सामंजस्य बनाए रखने के लिए आज सिंगापुर की संसद में एक नया विधेयक पेश किया गया। विधेयक के तहत चीनी, मलय और भारतीय नस्ल को एक 'नस्ल आधारित इकाई' माना जाएगा। इन सभी पर यह नियम लागू होंगे और उन्हें विदेशी प्रभाव को रोकने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना होगा।  

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Bill to maintain racial harmony tabled in Singapore parliament
सिंगापुर की संसद - फोटो : फेसबुक/सिंगापुर की संसद

विस्तार

सिंगापुर की संसद में मंगलवार को एक विधेयक पेश किया गया, जिसका मकसद देश में विभिन्न नस्लीय समुदायों के बीच शांति और सामंजस्य को बनाए रखना है। इस विधेयक के कानून बनने से गृह मंत्री को कुछ सख्त फैसले लेने और नस्लीय मुद्दों को हल करने का अधिकार मिलेगा। इसमें विदेशी प्रभाव को रोकने के लिए भी कुछ प्रावधान किए गए हैं। 

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विधेयक में क्या प्रावधान किए गए हैं?
गृह मंत्रालय ने कहा, इस विधेयक के तहत चीनी, मलय और भारतीय नस्ल को एक 'नस्ल आधारित इकाई' माना जाएगा। इन सभी पर यह नियम लागू होंगे और उन्हें विदेशी प्रभाव को रोकने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना होगा। मंत्रालय के मुताबिक, अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो सिंगापुर में ऐसी तीन सौ से अधिक इकाइयों की पहचान की जाएगी। 
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विदेशी संबंध, चंदे और दान की देनी होगी जानकारी
इसके तहत नस्ल आधारित इकाइयों को अपने विदेशी संबंधों, विदेशी चंदे और गोपनीय दान के बारे में जानकारी देनी होगी। इन इकाइयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके शासी निकाय के आधे से अधिक सदस्य सिंगापुर के नागरिक हों और उनके जिम्मेदार अधिकारी स्थानीय निवासी हों।  
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तीन साल से ज्यादा होगी सजा
यह विधेयक गृह मंत्री को उन लोगों पर रोक लगाने का आदेश जारी करने का अधिकार देगा, जो नस्लीय सामंजस्य को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री को फैलाते हैं। यह आदेश किसी व्यक्ति को किसी विवादित मुद्दे पर चर्चा करने, किसी जानकारी को फैलाने या प्रकाशित करने से रोक सकता है। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी की नस्लीय भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, तो उसे पहले की तुलना में अधिक सजा मिल सकेगी। पहले ऐसे अपराधों के लिए अधिकतम तीन साल तक की सजा थी। लेकिन अब इसे बढ़ाकर पांच किया जाएगा। 


यह विधेयक अगर कानून बन जाता है तो यह तब भी लागू होगा, जब नस्लीय अपराध सिंगापुर के बाहर किया गया हो, बशर्ते वह अपराध सिंगापुर के किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ किया गया हो। यह विधेयक सिंगापुर में धार्मिक समुदायों के बीच सद्भाव बनाने के लिए पहले से मौजूद कानून (एमआरएचए) की तरह काम करेगा। लेकिन इसका फोकस नस्लीय सद्भाव पर होगा। 

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