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पांचवीं बार इस्राइल के पीएम बने बेंजामिन नेतन्याहू, गठबंधन से बनाई सरकार
Thu, 14 May 2020 08:35 AM IST
आसिम खान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Thu, 14 May 2020 08:35 AM IST
सार
- पांचवीं बार इस्राइल के पीएम बने बेंजामिन नेतन्याहू
- सरकार बनाने को अपने विपक्षी गांत्ज से मिलाया हाथ
- लगातार चौथी बार पीएम पद की शपथ लेंगे नेतन्याहू
- भारत इस्राइल के रिश्तों पर नहीं पड़ेगा कोई असर
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पीएम मोदी के साथ बेंजामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो)
- फोटो : Israel Times
विस्तार
कोरोना वायरस महामारी के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पांचवीं बार पीएम पद की शपथ लेने वाले हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों और तीन बार चुनावों में बहुमत न मिलने के बावजूद उन्होंने राजनीतिक गठजोड़ से पीएम पद पा लिया। पांचवीं बार पीएम बनने के लिए उन्होंने अपने विपक्षी बेनी गांत्ज से हाथ मिलाया है।
पूर्व सेना प्रमुख हैं गांत्ज
गांत्ज पूर्व सेना प्रमुख हैं। नेतन्याहू को हराने के लिए उन्होंने दक्षिणपंथी और लिबरल दोनों नीतियों का सहारा लिया। चुनावों के दौरान वे नेतन्याहू पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप उठाते रहे। ये भी वादा किया कि वो नेतन्याहू के साथ सरकार नहीं बनाएंगे। अब दोनों नेता कह रहे हैं कि कोरोना काल में देश को स्थिर सरकार की जरूरत है इसीलिए गठबंधन जरूरी है।
नेतन्याहू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्ते काफी मजबूत हैं। बेनी गांत्ज भी कई बार भारत को मजबूत लोकतंत्र और उभरती हुई ताकत करार दे चुके हैं। इस्राइल के राजनीतिक विश्लेषक योहानन प्लेसनेर ने इस डील को 'लोकतांत्रिक युद्धविराम' बताया था।
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एक साल में तीन बार चुनाव
बता दें कि इस्राइल में एक साल में तीन बार आम चुनाव हो चुके हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और गांत्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी में से किसी को भी बहुमत नहीं मिल पाया। अब दोनों मिलकर सरकार बना रहे हैं। नेतन्याहू पांचवीं बार देश की बागडोर संभालेंगे। जबकि वो चौथी बार पीएम पद की शपथ लेंगे।
नेतन्याहू के सामने यह होंगी चुनौती
इस्राइल कोरोना से निपटने में तो काफी हद तक सफल रहा है। लेकिन, उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। देश में लगभग 10 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं। नेतन्याहू ने चुनाव में वादा किया था कि वेस्ट बैंक के उन इलाकों का विलय करेगें, जहां यहूदी बस्तियां बसाई गईं हैं। गठबंधन सरकार में भी इस पर सहमति बनी है।
एक जुलाई से विलय शुरू होगा। इसके चलते फिलिस्तीन से संघर्ष बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक भी यह विलय गैरकानूनी है। नेतन्याहू के दौर में राष्ट्रवादी पार्टियों का सत्ता में दबदबा था। बेनी उदारवादी माने जाते हैं। ऐसे में गठबंधन सरकार में भविष्य की नीतियों पर कई तरह के विवाद होने की आशंका है।
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पूर्व सेना प्रमुख हैं गांत्ज
गांत्ज पूर्व सेना प्रमुख हैं। नेतन्याहू को हराने के लिए उन्होंने दक्षिणपंथी और लिबरल दोनों नीतियों का सहारा लिया। चुनावों के दौरान वे नेतन्याहू पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप उठाते रहे। ये भी वादा किया कि वो नेतन्याहू के साथ सरकार नहीं बनाएंगे। अब दोनों नेता कह रहे हैं कि कोरोना काल में देश को स्थिर सरकार की जरूरत है इसीलिए गठबंधन जरूरी है।
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नेतन्याहू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्ते काफी मजबूत हैं। बेनी गांत्ज भी कई बार भारत को मजबूत लोकतंत्र और उभरती हुई ताकत करार दे चुके हैं। इस्राइल के राजनीतिक विश्लेषक योहानन प्लेसनेर ने इस डील को 'लोकतांत्रिक युद्धविराम' बताया था।
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एक साल में तीन बार चुनाव
बता दें कि इस्राइल में एक साल में तीन बार आम चुनाव हो चुके हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और गांत्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी में से किसी को भी बहुमत नहीं मिल पाया। अब दोनों मिलकर सरकार बना रहे हैं। नेतन्याहू पांचवीं बार देश की बागडोर संभालेंगे। जबकि वो चौथी बार पीएम पद की शपथ लेंगे।
नेतन्याहू के सामने यह होंगी चुनौती
इस्राइल कोरोना से निपटने में तो काफी हद तक सफल रहा है। लेकिन, उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। देश में लगभग 10 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं। नेतन्याहू ने चुनाव में वादा किया था कि वेस्ट बैंक के उन इलाकों का विलय करेगें, जहां यहूदी बस्तियां बसाई गईं हैं। गठबंधन सरकार में भी इस पर सहमति बनी है।
एक जुलाई से विलय शुरू होगा। इसके चलते फिलिस्तीन से संघर्ष बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक भी यह विलय गैरकानूनी है। नेतन्याहू के दौर में राष्ट्रवादी पार्टियों का सत्ता में दबदबा था। बेनी उदारवादी माने जाते हैं। ऐसे में गठबंधन सरकार में भविष्य की नीतियों पर कई तरह के विवाद होने की आशंका है।
भारत का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी है इस्राइल
प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू ने एक-दूसरे के देशों के दौरे करके करीबी संबंध स्थापित किए हैं। नेतन्याहू ने अपने चुनाव प्रचार में पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टरों का भी इस्तेमाल किया था। व्यापार, निवेश, आईटी, हाई टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध से दोनों देशों को लाभ हुआ है। इस्राइल भारत का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी है। किसी भी नई सरकार से इन संबंधों के प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
गठबंधन की शर्तें
गठबंधन की शर्तें
- नेतन्याहू और गांत्ज के बीच सरकार चलाने को लेकर 14 पृष्ठ के समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।
- सरकार में दोनों पक्ष बारी-बारी से पद संभालेंगे।
- पहले 18 महीने नेतन्याहू पीएम रहेंगे और गांत्ज रक्षा मंत्री का पद संभालेंगे।
- समझौते में दोनों नेताओं को सत्ता हथियाने से रोकने की भी व्यवस्था है।
- नेतन्याहू कार्यकाल खत्म करने के बाद गठबंधन तोड़कर चुनाव नहीं करा सकते।
- गांत्ज भी नेतन्याहू पर निचली अदालत में भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने के बाद उन्हें पद से नहीं हटा सकेंगे।