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Bangladesh: सूफी समूहों ने कड़ी सुरक्षा के बीच मनाया पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन, हाल ही दरगाहों पर बढ़े हमले

Mon, 16 Sep 2024 08:16 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 16 Sep 2024 08:16 PM IST
सार

Bangladesh: ईद-ए-मिलादुन नबी मार्च से पहले इस्लामी धर्मगुरु सैयद सैफुद्दीन अहमद ने कहा, जिन लोगों ने सूफी दरगाहों पर हमले किए हैं या उन स्थलों को जलाया है, हम उनसे ऐसी जघन्य गतिविधियों से दूर रहने का अनुरोध करते हैं।सैफुद्दीन ने अंतरिम सरकार से आग्रह किया कि वह दरगाहों की सुरक्षा सुनिश्चत करे और जिन दरगाहों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें पुनर्निर्मित किया जाए।

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Bangladesh's Sufi groups celebrate birth anniversary of Prophet amid tight security
पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन पर बांग्लादेश में रैली। - फोटो : बांग्लादेश संगबाद संस्था/आधिकारिक वेबसाइट

विस्तार

बांग्लादेश के सूफी समूहों ने सोमवार को पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन को धूमधाम से मनाया। हाल ही में सूफी दरगाहों पर हुए हमलों के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। दक्षिणपंथी समूहों ने दरगाहों को गैर-इस्लामी गतिविधियों का केंद्र बताया था। 

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राजधानी ढाका और अन्य प्रमुख शहरों में सड़कों पर सेना और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए। जबकि पुलिस सूफी समूहों की रैली की अतिरिक्त निगरानी रख रही थी। सूफी समूहों ने दक्षिण पंथी इस्लामी संगठनों से मुस्लिम संतों का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने उन संतों की भूमिका की याद दिलाई, जिन्होंने इस्लाम में प्रेम का प्रचार किया और आपसी सद्भाव को बढ़ावा दिया। 
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ईद-ए-मिलादुन नबी मार्च से पहले इस्लामी धर्मगुरु सैयद सैफुद्दीन अहमद ने कहा, जिन लोगों ने सूफी दरगाहों पर हमले किए हैं या उन स्थलों को जलाया है, हम उनसे ऐसी जघन्य गतिविधियों से दूर रहने का अनुरोध करते हैं। 
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सैफुद्दीन ने अंतरिम सरकार से आग्रह किया कि वह दरगाहों की सुरक्षा सुनिश्चत करे और जिन दरगाहों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें पुनर्निर्मित किया जाए। उन्होंने कहा कि पैगंबर ने समावेशिता का प्रचार किया और कट्टरपंथ को अस्वीकार किया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी अब सामाजित शांति और सद्भाव को नष्ट करने पर उतारू हैं। सूफी समूह पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के दिन मिलादुन नबी मनाते हैं, जबकि दक्षिणपंथी इस्लामी समूह ऐसी प्रथाओं का विरोध करते हैं। 



पिछले हफ्ते उत्तर-पूर्वी सिलहट में एक प्रसिद्ध सूफी संत शाह परान की दरगाह पर हमले की कड़ी निंदा हुई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने टिप्पणियां कीं कि छात्रों से प्रेरित आदोलन भेदभाव को तोड़ने को के लिए था। लेकिन अब दरगाहें, संस्कृति और सभ्यताएं टूट रही हैं। 

इन घटनाओं के बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख के कार्यालय ने सूफी दरगाहों और धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों पर नफरती भाषणों और हमलों को लेकर चेतावनी जारी की और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया। 

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