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बांग्लादेश में प्रकृति का कहर: एक हफ्ते में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 44 लोगों की मौत; ढाका के कई हिस्से जलमग्न
Sun, 12 Jul 2026 07:18 PM IST
Pavan
पीटीआई, ढाका
पीटीआई, ढाका
Published by: Pavan
Updated Sun, 12 Jul 2026 07:18 PM IST
सार
बांग्लादेश में पिछले एक हफ्ते से जारी भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। अलग-अलग हादसों में अब तक कम से कम 44 लोगों की मौत हो चुकी है। देश की नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे 2.5 लाख से ज्यादा परिवार बेघर हो गए हैं।
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बांग्लादेश में प्रकृति का कहर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
बांग्लादेश में पिछले एक सप्ताह में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 44 लोगों की मौत हो गई है। बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि बाढ़ से लगभग 2.67 लाख परिवार प्रभावित हुए हैं। वहीं, रात भर हुई भारी बारिश से राजधानी ढाका के कुछ हिस्से जलमग्न हो गए, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। सेना, नौसेना और वायु सेना स्थानीय एजेंसियों के साथ प्रभावित जिलों में राहत कार्य चला रही है।
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राजधानी ढाका में थम गई जिंदगी
शनिवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने राजधानी ढाका और प्रमुख बंदरगाह शहर चटगांव का बुरा हाल कर दिया है। ढाका में रात 12 बजे से सुबह छह बजे के बीच ही 76 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस भारी बारिश के कारण शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया और सड़कें तालाब बन गईं। सड़कों पर गाड़ियां बंद हो गईं या फंसी रहीं, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। ढाका के मीरपुर इलाके की रहने वाली नसरीन अहमद ने बताया, 'रातभर हुई बारिश से मेरे घर का अहाता और आस-पास की सड़कें पूरी तरह डूब गई हैं'।
स्वास्थ्य सेवाएं ठप, छतों पर रहने को मजबूर लोग
बाढ़ प्रभावित मौलवीबाजार (उत्तर-पूर्वी बांग्लादेश) के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि कई स्वास्थ्य केंद्र पानी में डूब चुके हैं, जिससे मरीजों का इलाज करना नामुमकिन हो गया है। 'कई लोगों ने अपने डूब चुके घरों की छतों पर शरण ले रखी है, तो कई लोग बारिश के बीच प्लास्टिक की शीट तानकर सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। घरों में पानी भरने के कारण लोग खाना तक नहीं बना पा रहे हैं'।
आने वाले दिनों में और बिगड़ सकते हैं हालात
बांग्लादेश के 'बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी केंद्र' के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र बेसिन के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी जिलों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है। देश की 45 नदी निगरानी चौकियों में से 7 पर नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।
यह भी पढ़ें- वियतनाम में क्यों डूबी भारतीय पर्यटकों की नाव?: 15 मौतों के बाद कप्तान गिरफ्तार, जांच में खुलेंगे हादसे के राज
अगले 24 से 48 घंटों का अलर्ट
मौसम विभाग ने बांग्लादेश के सिलहट, रंगपुर और मैमनसिंह डिवीजनों के साथ-साथ इससे सटे भारतीय राज्यों; मेघालय, असम और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इससे नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है।
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- भारी जान-माल का नुकसान: आपदा प्रबंधन मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि 5 जुलाई से अब तक 44 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से कई लोगों की मौत भूस्खलन के कारण हुई, जबकि बाकी लोग बाढ़ और उफनती नदियों में बह गए या डूब गए।
- लाखों लोग प्रभावित: अनुमान के मुताबिक, लगभग 2,67,918 परिवार इस बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रभावित इलाकों (ज्यादातर उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों) में करीब 44,457 लोगों ने 1,100 से अधिक अस्थायी राहत शिविरों में शरण ली है।
- रोहिंग्या कैंप में हादसा: इससे पहले 8 जुलाई को दक्षिण-पूर्वी कॉक्स बाजार में स्थित दुनिया के सबसे बड़े रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में बड़ा भूस्खलन हुआ था, जिसमें 7 रोहिंग्या बच्चों और उनके एक शिक्षक की मौत हो गई थी।
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राजधानी ढाका में थम गई जिंदगी
शनिवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने राजधानी ढाका और प्रमुख बंदरगाह शहर चटगांव का बुरा हाल कर दिया है। ढाका में रात 12 बजे से सुबह छह बजे के बीच ही 76 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस भारी बारिश के कारण शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया और सड़कें तालाब बन गईं। सड़कों पर गाड़ियां बंद हो गईं या फंसी रहीं, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। ढाका के मीरपुर इलाके की रहने वाली नसरीन अहमद ने बताया, 'रातभर हुई बारिश से मेरे घर का अहाता और आस-पास की सड़कें पूरी तरह डूब गई हैं'।
स्वास्थ्य सेवाएं ठप, छतों पर रहने को मजबूर लोग
बाढ़ प्रभावित मौलवीबाजार (उत्तर-पूर्वी बांग्लादेश) के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि कई स्वास्थ्य केंद्र पानी में डूब चुके हैं, जिससे मरीजों का इलाज करना नामुमकिन हो गया है। 'कई लोगों ने अपने डूब चुके घरों की छतों पर शरण ले रखी है, तो कई लोग बारिश के बीच प्लास्टिक की शीट तानकर सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। घरों में पानी भरने के कारण लोग खाना तक नहीं बना पा रहे हैं'।
आने वाले दिनों में और बिगड़ सकते हैं हालात
बांग्लादेश के 'बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी केंद्र' के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र बेसिन के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी जिलों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है। देश की 45 नदी निगरानी चौकियों में से 7 पर नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।
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मौसम विभाग ने बांग्लादेश के सिलहट, रंगपुर और मैमनसिंह डिवीजनों के साथ-साथ इससे सटे भारतीय राज्यों; मेघालय, असम और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इससे नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है।