बांग्लादेश: विपक्ष ने ‘गोलपोस्ट’ बदला, चुनाव के समय तटस्थ सरकार की मांग
बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने पिछले महीने अगले निर्वाचन आयोग के गठन पर सहमति बनाने के लिए तभी दलों से बातचीत शुरू की थी। लेकिन बीएनपी और कई वामपंथी दलों ने इस वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया था...
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बांग्लादेश में अगले निर्वाचन आयोग के गठन को लेकर चल रहा सियासी विवाद अब अगला चुनाव तटस्थ सरकार के तहत कराने की मांग में तब्दील हो रहा है। बांग्लादेश में चुनावों के दौरान तटस्थ सरकार बनाने की मांग पुरानी रही है। पहले भी आम चुनाव तटस्थ सरकार की देखरेख में हो चुके हैं। लेकिन 2009 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की सरकार ने तटस्थ सरकार के गठन चलन खत्म कर दिया था।
अब प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने कहा है कि अगले निर्वाचन आयोग में कौन शामिल होता है, इसे लेकर वह चिंतित नहीं है। बल्कि उसका मुख्य ध्यान इस बात पर है कि अगला आम चुनाव तटस्थ सरकार के अधीन कराया जाए। पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य ज्ञानेश्वर चंद्र रॉय ने कहा- ‘हमारी मांग चुनाव के वक्त तटस्थ सरकार के गठन की है, न कि चुनाव आयोग के गठन की।’
राष्ट्रपति ने की थी सहमति बनाने की शुरुआत
बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने पिछले महीने अगले निर्वाचन आयोग के गठन पर सहमति बनाने के लिए तभी दलों से बातचीत शुरू की थी। लेकिन बीएनपी और कई वामपंथी दलों ने इस वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया। तब बीएनपी और वामपंथी दलों ने मांग की थी कि निर्वाचन आयोग का गठन करने के लिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत एक स्पष्ट कानून पारित कराया जाए। लेकिन अब लगता है कि बीएनपी ने अपनी मांग बदल दी है।
ज्ञानेश्वर चंद्र रॉय ने कहा कि 2001 में राष्ट्रीय चुनाव शेख हसीना सरकार की तरफ से नियुक्त तटस्थ सरकार के तहत कराए गए थे। उस चुनाव में बीएनपी ने 193 सीटें जीतीं। उन्होंने कहा- ‘निर्वाचन आयोग का गठन हमारा सिरदर्द नहीं है। न ही आयोग के गठन के लिए तैयार किए गए कानून का ड्राफ्ट हमारी चिंता है।’ उन्होंने कहा- ‘प्रस्तावित कानून के ड्राफ्ट में कहा गया है कि ऐसा कोई व्यक्ति निर्वाचन आयोग का सदस्य नहीं बन सकेगा, जिसके पास सरकारी, अर्ध-सरकारी, या न्यायपालिका में काम करने का कम से कम 20 साल का तजुर्बा ना हो। इसका अर्थ यह हुआ कि सरकारी अधिकारियों के अलावा और किसी की आयोग में नियुक्ति नहीं होगी। जबकि सरकारी अधिकारी शेख हसीना के कर्मचारी हैं।’
सर्च कमेटी का होगा गठन
निर्वाचन आयोग के गठन संबंधी कानून के मसविदा को बीते सोमवार को सरकार ने मंजूरी दी थी। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दूसरे निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया शामिल की गई है। मसविदे के मुताबिक राष्ट्रपति की मंजूरी से एक सर्च कमेटी का गठन होगा। वह कमेटी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दूसरे आयुक्तों के लिए नाम राष्ट्रपति को भेजेगी। उसके आधार पर राष्ट्रपति नियुक्ति करेंगे।
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इस कानून का मसविदा तब जारी हुआ है, जब मौजूदा चुनाव आयोग के पांच साल का कार्यकाल खत्म होने में एक महीना ही बचा है। विपक्ष पहले से ऐसे कानून की मांग कर रहा था। लेकिन तब सरकार ने बातचीत की प्रक्रिया से नए आयुक्तों के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की। अब उसने कानून बनाने का इरादा दिखाया है। लेकिन अब बीएनपी अपनी मांग बदलती दिख रही है। इससे देश में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव कायम रहने का अंदेशा बढ़ गया है।