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Bangladesh: बांग्लादेश में खसरे का कहर, टेस्टिंग किट की कमी से जांच ठप होने का खतरा; अब तक 300 से ज्यादा मौतें
Fri, 08 May 2026 02:44 AM IST
अमन तिवारी
आईएएनएस, ढाका
आईएएनएस, ढाका
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 08 May 2026 02:44 AM IST
सार
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जबकि देश की इकलौती खसरा जांच लैब में टेस्टिंग किट्स की गंभीर कमी हो गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 11 मई के बाद जांच पूरी तरह रुक सकती है। इस बिमारी से अब तक 300 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
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बांग्लादेश में खसरे का कहर
- फोटो : IANS
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विस्तार
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच पूरे देश में खसरे की जांच करने वाली इकलौती लैब मोहखाली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ की लैब में टेस्टिंग किट की भारी कमी है। जरूरी खरीद में देरी के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नई किट्स समय पर नहीं पहुंचीं, तो 11 मई के बाद पूरे देश में खसरे की जांच बंद हो सकती है। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो जाएगा कि असल में कितने लोग संक्रमित हैं।
क्या बोले अधिकारी?
बांग्लादेशी दैनिक 'ढाका ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, यह लैब हर दिन देशभर से आने वाले करीब 300 सैंपल की जांच करती है। अधिकारियों का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से टेस्टिंग चलती रही और नई किट्स नहीं मिलीं, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खसरे का प्रकोप अब काफी चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। उनका मानना है कि अगर इसे आधिकारिक तौर पर महामारी घोषित किया जाए, तो इलाज के लिए एक समान व्यवस्था लागू की जा सकेगी और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर तरीके से लगाया जा सकेगा।
साथ ही, ज्यादा टेस्टिंग होने से संक्रमित लोगों की पहचान जल्दी हो सकेगी, उन्हें अलग रखकर संक्रमण फैलने से रोका जा सकेगा और समय पर इलाज भी मिल पाएगा। इंस्टीट्यूट के सूत्रों का हवाला देते हुए, 'ढाका ट्रिब्यून' ने बताया कि खसरे की टेस्टिंग किट्स विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) देता है। एक किट से लगभग 90 लोगों की जांच हो सकती है। किट्स की कमी के कारण टेस्टिंग बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है और कई सैंपल बिना जांच के पड़े हैं।
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लैब्स में टेस्टिंग किट्स खत्म
सोमवार तक लैब के पास सिर्फ सात टेस्टिंग किट्स बची थीं, लेकिन अगले दो दिनों में वह स्टॉक भी लगभग खत्म हो गया। वायरोलॉजिस्ट महबूबा जमील ने कहा, 'अभी सही संख्या बताना मुश्किल है, लेकिन किट्स बहुत तेजी से खत्म हो रही हैं। हमने डब्ल्यूएचओ को इसकी जानकारी दे दी है। उनका कहना है कि नई किट्स आने में एक से डेढ़ हफ्ता लग सकता है। तब तक हमें बची हुई किट्स से ही काम चलाना होगा।'
इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर मोमिनुर रहमान ने भी किट्स की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'करीब एक महीने पहले डब्ल्यूएचओ को किट्स के लिए अनुरोध भेजा गया था, लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं मिली है। उम्मीद है कि 15 मई तक किट्स मिल जाएंगी। फिलहाल बची हुई किट्स से टेस्टिंग जारी है।'
डॉक्टरों ने दी चेतावनी
इस बीच डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इलाज में देरी होने से बच्चों में सांस लेने में दिक्कत, शरीर में ऑक्सीजन की कमी, दिमाग में सूजन, लंबे समय तक दस्त और दौरे जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे मौत का खतरा भी बढ़ सकता है। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट मुश्ताक हुसैन ने कहा, 'जब यह साफ हो गया था कि खसरे की स्थिति गंभीर है, तब ही पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर देनी चाहिए थी। इससे इलाज की सुविधाएं बेहतर होतीं और लोगों में जागरूकता भी बढ़ती।'
उन्होंने यह भी कहा कि तुरंत बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चलाने, उपजिला स्तर पर इलाज की सुविधाएं बढ़ाने और ऑक्सीजन समेत जरूरी मेडिकल उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था करने की जरूरत है। किट्स से ज्यादा जरूरी वैक्सीनेशन है। किट्स का काम सिर्फ मरीजों की संख्या पता करना है, लेकिन संक्रमण रोकने में वैक्सीन सबसे असरदार होती है। बांग्लादेश में खसरे के इस प्रकोप में अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति 16 से 18 लोगों तक बीमारी फैला सकता है।
बांग्लादेश में खसरे ने ली 12 और बच्चों की जान
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। पिछले 24 घंटों के भीतर यहां इस संक्रामक बीमारी ने 12 और बच्चों की जान ले ली है। इसके साथ ही मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 336 हो गया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के मुताबिक, स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन में देशभर के अस्पतालों में खसरे के लक्षणों वाले 1,238 नए बच्चों को भर्ती कराया गया है। 15 मार्च से इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान जारी है।
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क्या बोले अधिकारी?
बांग्लादेशी दैनिक 'ढाका ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, यह लैब हर दिन देशभर से आने वाले करीब 300 सैंपल की जांच करती है। अधिकारियों का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से टेस्टिंग चलती रही और नई किट्स नहीं मिलीं, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खसरे का प्रकोप अब काफी चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। उनका मानना है कि अगर इसे आधिकारिक तौर पर महामारी घोषित किया जाए, तो इलाज के लिए एक समान व्यवस्था लागू की जा सकेगी और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर तरीके से लगाया जा सकेगा।
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साथ ही, ज्यादा टेस्टिंग होने से संक्रमित लोगों की पहचान जल्दी हो सकेगी, उन्हें अलग रखकर संक्रमण फैलने से रोका जा सकेगा और समय पर इलाज भी मिल पाएगा। इंस्टीट्यूट के सूत्रों का हवाला देते हुए, 'ढाका ट्रिब्यून' ने बताया कि खसरे की टेस्टिंग किट्स विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) देता है। एक किट से लगभग 90 लोगों की जांच हो सकती है। किट्स की कमी के कारण टेस्टिंग बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है और कई सैंपल बिना जांच के पड़े हैं।
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लैब्स में टेस्टिंग किट्स खत्म
सोमवार तक लैब के पास सिर्फ सात टेस्टिंग किट्स बची थीं, लेकिन अगले दो दिनों में वह स्टॉक भी लगभग खत्म हो गया। वायरोलॉजिस्ट महबूबा जमील ने कहा, 'अभी सही संख्या बताना मुश्किल है, लेकिन किट्स बहुत तेजी से खत्म हो रही हैं। हमने डब्ल्यूएचओ को इसकी जानकारी दे दी है। उनका कहना है कि नई किट्स आने में एक से डेढ़ हफ्ता लग सकता है। तब तक हमें बची हुई किट्स से ही काम चलाना होगा।'
इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर मोमिनुर रहमान ने भी किट्स की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'करीब एक महीने पहले डब्ल्यूएचओ को किट्स के लिए अनुरोध भेजा गया था, लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं मिली है। उम्मीद है कि 15 मई तक किट्स मिल जाएंगी। फिलहाल बची हुई किट्स से टेस्टिंग जारी है।'
डॉक्टरों ने दी चेतावनी
इस बीच डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इलाज में देरी होने से बच्चों में सांस लेने में दिक्कत, शरीर में ऑक्सीजन की कमी, दिमाग में सूजन, लंबे समय तक दस्त और दौरे जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे मौत का खतरा भी बढ़ सकता है। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट मुश्ताक हुसैन ने कहा, 'जब यह साफ हो गया था कि खसरे की स्थिति गंभीर है, तब ही पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर देनी चाहिए थी। इससे इलाज की सुविधाएं बेहतर होतीं और लोगों में जागरूकता भी बढ़ती।'
उन्होंने यह भी कहा कि तुरंत बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चलाने, उपजिला स्तर पर इलाज की सुविधाएं बढ़ाने और ऑक्सीजन समेत जरूरी मेडिकल उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था करने की जरूरत है। किट्स से ज्यादा जरूरी वैक्सीनेशन है। किट्स का काम सिर्फ मरीजों की संख्या पता करना है, लेकिन संक्रमण रोकने में वैक्सीन सबसे असरदार होती है। बांग्लादेश में खसरे के इस प्रकोप में अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति 16 से 18 लोगों तक बीमारी फैला सकता है।
बांग्लादेश में खसरे ने ली 12 और बच्चों की जान
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। पिछले 24 घंटों के भीतर यहां इस संक्रामक बीमारी ने 12 और बच्चों की जान ले ली है। इसके साथ ही मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 336 हो गया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के मुताबिक, स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन में देशभर के अस्पतालों में खसरे के लक्षणों वाले 1,238 नए बच्चों को भर्ती कराया गया है। 15 मार्च से इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान जारी है।
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