फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh I am alive but not living Survivors of Bangladesh is rape crisis

मैं जिंदा हूं,लेकिन मौत से बदतर जिंदगी जी रही हूं : बांग्लादेश की दुष्कर्म पीड़िता

Mon, 26 Oct 2020 10:10 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 26 Oct 2020 10:10 PM IST
विज्ञापन
Bangladesh I am alive but not living Survivors of Bangladesh is rape crisis
सांकेतिक चित्र - फोटो : social media
तीन महीने पहले मेरा बलात्कार पड़ोसी गांव के एक व्यक्ति ने किया था। बलात्कार के वक्त उसने मेरी गर्दन और पेट को बुरी तहर जकड़ रखा था। तब से लेकर मैं आज तक खाना नहीं निगल पाती हूं। जब भी कुछ खाने की कोशिश करती हूं, तो वह गले में फंस जाता है। धीरे-धीरे तरल पदार्थ लेती हूं। रोटी अथवा कुछ ठोस पदार्थ नहीं निगल पाती हूं। बलात्कार की घटना के बाद मैं जीवित तो हूं, लेकिन मौत से भी बदतर जिंदगी जी रही हूं। मैं हर दिन खुद के लिए मौत की दुआ करती हूं। यह कहना है कि बांग्लादेश की 28 वर्षीय बलात्कार पीड़िता शर्मिन का। 
विज्ञापन


सांस लेने में होती है कठिनाई 
बलात्कार पीड़ित शर्मिन बताती है कि मैं खाना नहीं खा पाती हूं, जिसके चलते मैं दैनिक काम करने में सक्षम नही रही हूं। कमजोरी की वजह से मेरा शरीर कांपता है। इसके चलते मेरे परिवार वाले मुझसे ठीक से बात तक नहीं करते। वो लोग मेरी शक्ल देखना नहीं चाहते। मुझे सांस लेने में कठिनाई होती है। दम घुटता है, तब मैं अल्लाह से अपने लिए मौत की दुआ करती हूं। लेकिन न तो न्याय मिल रहा है और न ही मौत आती है। 
विज्ञापन


डॉक्टर कहती है, मुझ पर जिन्न का साया है
मैं अपना मन इधर-उधर लगाने की कोशिश करती हूं। लेकिन बार-बार हादसा किसी फिल्म की तरह मेरी आंखों के सामने आ जाता है। उस भयानक दृश्यम को मैं भूल नहीं पाती हूं। इस समस्या को लेकर डॉक्टर के पास जाती हूं, तो वह कहती है कि मुझ पर जिन्न का साया है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


अब बलात्कारी के लिए सजा-ए-मौत का प्रावधान 
बांग्लादेश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोगों में जनाक्रोश पैदा हो गया। इसके बाद जनता के दबाव में आकर बांग्लादेश सरकार ने बलात्कार के दोषियों को सजा-ए-मौत की सजा का प्रावधान तय कर दिया है।

साल दर साल बढ़ते मामले 
बांग्लादेशी मानवाधिकार समूह की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2018 में बांग्लादेश में 732 बलात्कार के मामले आए। वर्ष 2019 में ये मामले लगभग दोगुने होकर 1,413 हो गए। वहीं इस साल अब तक 1,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में औसतन प्रति दिन चार से अधिक बलात्कार के मामले आते हैं। 

विशेषज्ञों का माना है कि मानवाधिकार रिपोर्ट में बताई संख्या ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। ज्यादातर बलात्कार पीड़ित महिलाएं रिपोर्ट  दर्ज कराने से डरती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed