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मानवाधिकार हनन का मुद्दा: बांग्लादेश सरकार को अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह नहीं

Mon, 24 Jan 2022 05:00 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 24 Jan 2022 05:00 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिच ने कहा है कि आरएबी के खिलाफ 12 मानवाधिकार संगठनों के पत्र पर संयुक्त राष्ट्र विचार करेगा। इन संगठनों ने अपने पत्र में आरएबी पर मानवाधिकारों के घोर हनन के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे बल को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए...

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Bangladesh government indicated a firm stand on the side of its paramilitary Rapid Action Battalion
आरएबी बांग्लादेश - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

विदेश में बढ़ रहे दबाव के बावजूद बांग्लादेश सरकार ने अपने अर्धसैनिक बल रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के पक्ष मजबूती से खड़ा होने का संकेत दिया है। शेख हसीना वाजेद की अवामी लीग सरकार ने 2020 और 2021 के लिए जिन 230 पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने का फैसला किया है, उनमें बड़ी संख्या में आरएबी के अधिकारी और जवान भी शामिल हैं।

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कुछ समय पहले अमेरिका ने इस बल के कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों पर मानव अधिकार हनन के आरोप में प्रतिबंध लगा दिया था। इसी हफ्ते 12 अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठनों का वह पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपने अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में आरएबी को शामिल न करने की मांग की है।

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अमेरिका ने दी आरएबी को ट्रेनिंग

बांग्लादेश सरकार ने विवाद उठने के समय से ही इस मुद्दे पर अपना रुख आक्रामक रखा है। उसकी ही एक मिसाल विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन का एक ताजा बयान है। मोमिन ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आरएबी को ट्रेनिंग अमेरिका ने ही दी है। उसी ने उन्हें इस बारे में प्रशिक्षित किया है कि लोगों से कैसे पेश आना चाहिए और आरोपियों से कैसे पूछताछ करनी चाहिए। मोमिन ने आरएबी के अधिकारियों और जवानों की ट्रेनिंग में अमेरिका और ब्रिटेन की भूमिका का ब्योरा दिया और इस अर्धसैनिक बल की तारीफ की।

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मोमिन ने कहा कि आरएबी एक बहुत ही कुशल बल है। उन्होंने कहा- ‘आरएबी कर्मी भ्रष्ट नहीं हैं। यही वजह है कि वे देश की जनता का भरोसा पाने में सफल रहे हैं।’ एक सवाल पर उन्होंने यह जरूर कहा कि अगर लोगों से पेश आने के तरीके में कोई कमजोरी या मानवाधिकार के हनन का कोई मामला सामने आया, तो सरकार अवश्य ही आरएबी जवानों को फिर से ट्रेनिंग लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

विदेश मंत्री कहा- लेकिन अचानक आरएबी से जुड़े कुछ व्यक्तियों पर जिस तरह प्रतिबंध लगाया गया, वह उचित नहीं है। जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था, तब भी बांग्लादेश सरकार ने संबंधित अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों को सिरे से ठुकरा दिया था।

संयुक्त राष्ट्र में पहुंचा मामला

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिच ने कहा है कि आरएबी के खिलाफ 12 मानवाधिकार संगठनों के पत्र पर संयुक्त राष्ट्र विचार करेगा। इन संगठनों ने अपने पत्र में आरएबी पर मानवाधिकारों के घोर हनन के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे बल को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इन संगठनों ने आरएबी के खिलाफ पत्र पिछले साल आठ नवंबर को ही सौंपा था। उस पत्र को बीते 20 जनवरी को जारी किया गया है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दुजारिच से इस पत्र के बारे में पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा- स्पष्टतः हम इसे बहुत ही गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस किसी देश से सैन्य बल को संयुक्त राष्ट्र अभियान के लिए आमंत्रित किया जाता है, उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड की बहुत सख्ती से जांच की जाती है।



पर्यवेक्षकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे दबाव के बावजूद बांग्लादेश सरकार यह संदेश देना चाहती है कि देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के मामले में वह कोई समझौता नहीं करेगी।

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