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बंगबंधु के पांच भगोड़े कातिलों की तलाश, सरकार ने कहा- जल्द ही उन्हें भी दी जाएगी फांसी

Mon, 13 Apr 2020 03:37 AM IST
Rajeev Rai वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Rajeev Rai Updated Mon, 13 Apr 2020 03:37 AM IST
सार

  • हत्या के साढ़े चार दशक के बाद एक कातिल अब्दुल मजीद को हुई फांसी
  • अब बांग्लादेश के कानून मंत्री ने किया दावा

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Bangladesh government in search of five absconded killers of bangbandhu Sheikh bangabandhu mujibur rahman
शेख मुजीबुर्रहमान - फोटो : social media

विस्तार

बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान के हत्यारों में शामिल अब्दुल मजीद को शनिवार देर रात फांसी देने के बाद अन्य पांच हत्यारों की तलाश तेज हो गई है। यहां के कानून मंत्री ने रविवार को कहा कि बाकी पांच हत्यारों को जल्द गिरफ्तार कर फांसी दी जाएगी। इन हत्यारों को सुप्रीम कोर्ट 2009 में फांसी की सजा सुना चुकी है। वे भगोड़े घोषित हैं।

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हाल में पकड़े गए इन भगोड़ों में शामिल अब्दुल मजीद को रविवार रात 12 बजकर 01 मिनट पर फांसी पर दी गई। उसका माफीनामा राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने बृहस्पतिवार को खारिज किया था। उसकी पत्नी व अन्य परिजनों ने शुक्रवार को उससे जेल में आखिरी मुलाकात की थी। कानून मंत्री अनीसुल हक ने अपने घर से वीडियो संदेश जारी कर बताया ‘बंगबंधु के पांच हत्यारों को 28 जनवरी 2010 में फांसी दी गई थी, सरकार ने बाकियों को भी फांसी देने का वादा किया था। यह बेहद संतोषजनक बात है कि अब मजीद को केरानीगंज की ढाका सेंट्रल जेल में फांसी दी गई है। बचे हुए पांच हत्यारों को बांग्लादेश लाकर सजा दी जाएगी।’ उन्हाेंने हत्यारों की वापसी को बड़ी चुनौती बताया।

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Bangladesh government in search of five absconded killers of bangbandhu Sheikh bangabandhu mujibur rahman
अब्दुल माजिद - फोटो : social media

हत्यारे को जिस गांव में दफनाया, वहां के निवासी खफा
अब्दुल मजीद का शव शंभुपुर स्थित सोनारगांव में उसके ससुराल वालों के पास लाया गया। यहां उसे पारिवारिक कब्रिस्तान में दफनाया गया। लेकिन इससे क्षेत्रीय लोग व आवामी लीग के कार्यकर्ता खफा हो गए और कब्रिस्तान के बाहर प्रदर्शन किया। स्वतंत्रता सेनानी सैफुल इस्लाम भूइयान ने शव को वहां से हटाने की मांग की। पुलिस ने सरकार के आदेशों के तहत शव दफनाने की बात कही और लीग के नेताओं को सरकार से बात करने को कहा।

कोलकाता में 23 साल रहा मजीद
बांग्लादेश की आतंकी निरोधक व पुलिस की यूनिट ने मजीद को मीरपुर में पकड़ा था। वह 23 साल भारत में कोलकाता में छिपकर रहा और 15 मार्च को बांग्लादेश आया था। इससे पहले सैयद फारुख रहमान, सुल्तान शहरयार राशिद खान, बजलुल हुदा, एकेएम मोहिउद्दीन अहमद और मोहिउद्दीन अहमद को 2010 में फांसी दी गई थी। एक हत्यारा अजीज पाशा जिम्बाब्वे में जून 2001 में मर गया था।

इन आरोपियों की तलाश, अमेरिका, कनाडा, पाक में छिपे
मुख्य आरोपी ले. कर्नल खंदाकर अब्दुर राशिद, एसएचबीएम नूर चौधरी, शरीफुल हक दालिम, राशिद चौधरी और रिसालदार मोस्लेहुद्दीन फिलहाल लापता हैं। आशंका है कि वे अमेरिका, कनाडा, पाक में छिपे हैं। कनाडा अपने यहां छिपे एक हत्यारे के प्रत्यर्पण का बांग्लादेश का निवेदन खारिज कर चुका है।

बंगबंधु और परिवार को मारने टैंक लेकर आए थे
सेना व आवामी लीग के अंसतुष्ट धड़े ने षड़यंत्र के तहत बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर्रहमान व उनके परिजनों की 15 अगस्त 1975 को हत्या की थी। सैन्य अधिकारी टैंक लेकर राष्ट्रपति भवन में घुस गए थे। बंगबंधु की बेटियां शेख हसीना व रेहाना उस समय पश्चिम जर्मनी में होने से बच गए थे। बाद के वर्षों में सैन्य अधिकारियों ने चार अन्य राष्ट्रीय नेताओं की भी हत्या करवाई। हत्यारों में शामिल अब्दुल मजीद को सिविल सेवा में भेजा गया। सैन्य तानाशाह से देश के राष्ट्रपति बने जियाउर रहमान ने इंडेमनिटी (हानि से मुक्ति) कानून बनाया, जिसके तहत बंगबंधु की हत्या में शामिल हत्यारों को कानूनी कार्रवाई से छूट मिली। 1996 में आम चुनाव में आवामी लीग सत्ता में लौटी। इसके पहले ही षड़यंत्र में शामिल कई अधिकारी देश से भाग गए। इंडेमनिटी कानून खत्म किया गया और आरोपियों पर उनकी गैरमौजूदगी में भी केस चला।
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