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Bangladeh Crisis: तेज रफ्तार से गहरा रहा है बांग्लादेश का आर्थिक संकट, घट रही निर्यात से आमदनी

Thu, 27 Oct 2022 05:56 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 Oct 2022 05:56 PM IST
सार

Bangladeh Crisis: अर्थशास्त्रियों के मुताबिक सबसे अधिक चिंता की बात आयात की लागत का बढ़ना और निर्यात से आमदनी घटना है। इन दोनों वजहों से इस वित्त वर्ष में बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 4.5 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है...

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Bangladesh economic crisis is deepening, earning from exports is decreasing
Bangladeh Crisis: बांग्लादेश बैंक - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

बांग्लादेश मे विदेशी मुद्रा का संकट गंभीर होता जा रहा है। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि अगर ये सिलसिला जारी रहा, तो जल्द ही बांग्लादेश बड़े संकट में फंस सकता है। उनके मुताबिक आयात की बढ़ी लागत, निर्यात से घटी आमदनी, डॉलर के मुकाबले बांग्लादेशी मुद्रा टका की कीमत में गिरावट और कोविड-19 महामारी के दौरान टाले गए भुगतान की अब आई देनदारी का संकट को गहराने में योगदान रहा है।

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ताजा आंकड़ों के मुताबिक 19 अक्तूबर को खत्म हुए हफ्ते में बांग्लादेश का विदेशी मद्रा भंडार 35.98 बिलियन डॉलर रह गया, जबकि साल भर पहले यह 46.19 बिलियन डॉलर था। अगस्त 20121 में बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 48 बिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम थी।

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अर्थशास्त्रियों के मुताबिक सबसे अधिक चिंता की बात आयात की लागत का बढ़ना और निर्यात से आमदनी घटना है। इन दोनों वजहों से इस वित्त वर्ष में बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 4.5 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। यह बांग्लादेश जैसे देश के लिए गहरी चिंता का विषय है कि जिसका विदेशी मुद्रा भंडार कोविड लॉकडाउन के समय भी बढ़ रहा था। उस दौर में निर्यात में गिरावट आई थी, लेकिन आयात भी घटे थे। साथ ही विदेश में रहने वाले बांग्लादेशियों ने अपेक्षाकृत अधिक रकम वापस भेजी थी। इसके अलावा उस दौरान आयात बिल और कर्ज की किस्तों का भुगतान भी रुक गया था। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक इससे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा था, लेकिन देनदारी भी बढ़ गई थी। अब ये पहलू बांग्लादेश के लिए भारी पड़ रहा है।

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महामारी के बाद शुरू हुए यूक्रेन युद्ध ने बांग्लादेश की माली हालत बिगाड़ दी है। हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि खतरे के संकेत यूक्रेन युद्ध के पहले ही मिलने लगे थे। बांग्लादेश बैंक के पूर्व गवर्नर सलाहुद्दीन अहमद ने अखबार ढाका ट्रिब्यून से कहा- युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के कराण आर्थिक संकट अचानक आया, लेकिन प्रबंधकीय गलतियों के कारण संकट पहले से गहरा रहा था। उन्होंने कहा- ‘बांग्लादेश में संकट का कारण सिर्फ युद्ध ही नहीं है। यह जरूर है कि युद्ध के कारण ये संकट खुल कर दिखने लगा। लेकिन संकट पहले से खड़ा हो रहा था। अब सिर्फ कर्ज लेकर उसका समाधान ढूंढना संभव नहीं है।’

बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक- बांग्लादेश बैंक की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी मुद्रा की आमदनी की तुलना में खर्च कई वर्षों से बढ़ रहा था। घाटे को पाटने के लिए छोटी अवधि के कर्ज लिए गए। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को कृत्रिम ढंग से बढ़ा दिखाया गया। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में विदेशी मुद्रा भंडार में 8.81 बिलियन डॉलर थे, जबकि बांग्लादेश पर कुल देनदारी 7.72 बिलियन डॉलर की थी। 2021 में देनदारी 22.76 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जबकि उपलब्ध विदेशी मुद्रा 24.36 बिलियन डॉलर तक पहुंचा। इसका मतलब यह है कि इस अवधि में जहां विदेशी मुद्रा में 177 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, वहीं देनदारी में 195 फीसदी का इजाफा हुआ।

वैसे जानकारों के मुताबिक बांग्लादेश के सामने मौजूदा आर्थिक संकट का यह सिर्फ एक पहलू है। इस समय बड़ी समस्या महंगाई के कारण बाजार में घटी मांग और रोजगार के अवसरों में आ रही गिरावट है। इस संकट को संभालने में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार दिशाहीन नजर आ रही है।

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