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Bangladesh: बांग्लादेश में मंदिर पर चला बुलडोजर, भारत ने जताई नाराजगी; कहा- सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी
Fri, 27 Jun 2025 10:52 AM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 27 Jun 2025 10:52 AM IST
सार
ढाका के खीलखेते इलाके में बने दुर्गा मंदिर को बांग्लादेश रेलवे ने अवैध कब्जे का हवाला देकर गिरा दिया। इससे पहले मंदिर के खिलाफ भीड़ जुटी थी। भारत ने इसे लेकर चिंता जताई और कहा कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों, उनकी संपत्तियों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। मंदिर समिति ने आरोप लगाया कि बिना नोटिस के ही मंदिर गिराया गया।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बने एक अस्थायी दुर्गा मंदिर को ढहाने को लेकर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है। भारत ने साफ कहा है कि बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को मंदिर को सुरक्षा देनी चाहिए थी, लेकिन उसने इसे अवैध कब्जा बताकर गिरा दिया। इस घटना में मूर्ति को भी नुकसान पहुंचा है।
दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि कुछ चरमपंथी ढाका के खुलीखेत में बने दुर्गा मंदिर को गिराने की मांग कर रहे थे। लेकिन अंतरिम सरकार ने मंदिर की सुरक्षा करने के बजाय इसे अवैध कब्जा बता दिया और आज मंदिर ढहा दिया गया।
मूर्ति को भी नुकसान, भारत ने जताई चिंता
जयसवाल ने आगे कहा कि इस कार्रवाई के दौरान मंदिर में स्थापित मूर्ति को भी नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि हम इस बात से बेहद दुखी हैं कि बांग्लादेश में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हिंदू समुदाय, उनकी संपत्ति और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
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रेलवे जमीन पर बना था अस्थायी मंदिर
दरअसल, बांग्लादेश रेलवे प्रशासन ने गुरुवार को ढाका के खुलीखेत इलाके में बने अस्थायी दुर्गा मंदिर को गिरा दिया। प्रशासन का दावा है कि मंदिर रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था। मंदिर गिराने की यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई जब तीन दिन पहले ही भीड़ ने मंदिर हटाने की मांग की थी।
ये भी पढ़ें: ट्रंप की बेटी से लेकर बिल गेट्स तक, बेजोस की शादी में सितारों ने लगाए चार चांद; खर्च पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और संगठनों ने की निंदा
मंदिर कमेटी और अल्पसंख्यक संगठनों ने मंदिर गिराने की निंदा की है। मंदिर कमेटी के सचिव अर्जुन रॉय ने बताया कि उन्होंने पिछले साल दुर्गा पूजा के लिए रेलवे से अस्थायी अनुमति ली थी, लेकिन इस बार बिना कोई नोटिस दिए मंदिर गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि हमें बहुत दुख है कि प्रशासन ने बिना सूचना के कार्रवाई कर दी।
प्रशासन ने बताया गैरकानूनी कब्जा
ढाका रेलवे डिवीजन के संपत्ति अधिकारी मोहम्मद नासिर उद्दीन महमूद ने दावा किया कि रेलवे की जमीन पर अवैध निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि हमें सोमवार को जानकारी मिली कि वहां एक अस्थायी मंदिर बनाया गया है। इसलिए आज सुबह 10 बजे से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
ये भी पढ़ें: पुरी से अहमदाबाद तक आस्था का सैलाब, अमित शाह बोले- आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम
अल्पसंख्यक संगठनों ने जताई नाराजगी
बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद, महानगर सार्वजनिन पूजा समिति और माइनॉरिटी राइट्स मूवमेंट ने अलग-अलग बयान जारी कर मंदिर गिराने और भीड़ की घटना की कड़ी निंदा की है। इन संगठनों का कहना है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिसे लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
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दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि कुछ चरमपंथी ढाका के खुलीखेत में बने दुर्गा मंदिर को गिराने की मांग कर रहे थे। लेकिन अंतरिम सरकार ने मंदिर की सुरक्षा करने के बजाय इसे अवैध कब्जा बता दिया और आज मंदिर ढहा दिया गया।
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मूर्ति को भी नुकसान, भारत ने जताई चिंता
जयसवाल ने आगे कहा कि इस कार्रवाई के दौरान मंदिर में स्थापित मूर्ति को भी नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि हम इस बात से बेहद दुखी हैं कि बांग्लादेश में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हिंदू समुदाय, उनकी संपत्ति और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
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रेलवे जमीन पर बना था अस्थायी मंदिर
दरअसल, बांग्लादेश रेलवे प्रशासन ने गुरुवार को ढाका के खुलीखेत इलाके में बने अस्थायी दुर्गा मंदिर को गिरा दिया। प्रशासन का दावा है कि मंदिर रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था। मंदिर गिराने की यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई जब तीन दिन पहले ही भीड़ ने मंदिर हटाने की मांग की थी।
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स्थानीय लोगों और संगठनों ने की निंदा
मंदिर कमेटी और अल्पसंख्यक संगठनों ने मंदिर गिराने की निंदा की है। मंदिर कमेटी के सचिव अर्जुन रॉय ने बताया कि उन्होंने पिछले साल दुर्गा पूजा के लिए रेलवे से अस्थायी अनुमति ली थी, लेकिन इस बार बिना कोई नोटिस दिए मंदिर गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि हमें बहुत दुख है कि प्रशासन ने बिना सूचना के कार्रवाई कर दी।
प्रशासन ने बताया गैरकानूनी कब्जा
ढाका रेलवे डिवीजन के संपत्ति अधिकारी मोहम्मद नासिर उद्दीन महमूद ने दावा किया कि रेलवे की जमीन पर अवैध निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि हमें सोमवार को जानकारी मिली कि वहां एक अस्थायी मंदिर बनाया गया है। इसलिए आज सुबह 10 बजे से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
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अल्पसंख्यक संगठनों ने जताई नाराजगी
बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद, महानगर सार्वजनिन पूजा समिति और माइनॉरिटी राइट्स मूवमेंट ने अलग-अलग बयान जारी कर मंदिर गिराने और भीड़ की घटना की कड़ी निंदा की है। इन संगठनों का कहना है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिसे लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।