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कराची हमले की जिम्मेदार बीएलए का इतिहास, बलूचिस्तान की आजादी के लिए हुआ था गठन

Mon, 29 Jun 2020 05:38 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 29 Jun 2020 05:38 PM IST
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Balochistan Liberation Army was formed to free Balochistan from Pakistan know its history
सांकेतिक तस्वीर

सोमवार को पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने ली है। पिछले साल अमेरिका द्वारा आतंकी संगठनों की सूची में डाले गए इस संगठन का गठन साल 1970 में अलग बलूचिस्तान प्रांत की मांग के समर्थन में हुआ था। 

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बता दें कि कराची स्थित 'पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज' पर सोमवार सुबह आतंकी हमला हुआ। इसमें 11 लोगों की मौत हुई है। हमले में शामिल आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है। इस हमले को चार आतंकियों ने अंजाम दिया। हमले में एक पुलिस अधिकारी और चार सुरक्षा गार्ड भी मारे गए हैं। वहीं तीन पुलिस कर्मियों समेत सात लोग घायल हुए हैं। 

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जनरल जिया उल हक ने भी की थी बात

करीब 50 साल पुराना यह संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए बना था और अभी भी इसी मांग पर कायम है। बीएलए पर पाकिस्तानी सेना और सरकारी संस्थानों पर हमले के आरोप भी लगते रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इस संगठन का प्रभाव एक समय इतना बढ़ गया था कि पाक में जनरल जिया उल हक ने सत्ता में रहते हुए बलूच लिबरेशन आर्मी से बात भी की थी। 

सेना में हैं करीब छह हजार लड़ाके

माडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि बलूच लिबरेशन आर्मी में करीब छह हजार सैनिक हैं। इनमें से दो हजार सैनिकों को जंग का प्रशिक्षण हासिल है। साल 2006 के बाद बीएलए ने पाक सेना और सरकार ने बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके विभिन्न हमलों में सैकड़ों पाक सैनिकों की जान जा चुकी है। फरवरी में बीएलए के एक हमले में 20 पाक सैनिकों की मौत हुई थी। 

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कांपती है पाकिस्तान सेना

बता दें कि बलूचिस्तान में दो प्रमुख कबीले हैं- मारी और बुगती। बीएलए पर इन्हीं दोनों का प्रभुत्व है। कहा जाता है कि कई इलाकों में इनका भय इतना ज्यादा है कि पाकिस्तानी सेना जमीन पर उतरने का साहस नहीं कर पाती, इसलिए केवल हवाई हमले करती है। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि बीएलए के लड़ाकों को रूस की पूर्व खुफिया एजेंसी केजीबी से प्रशिक्षण मिला है। 

चीन का भी किया विरोध

बीएलए बलूचिस्तान की आजादी के साथ वहां चीन के दखल का भी विरोधी है। साल 2004 में  जब चीन बलूचिस्तान में पैर जमाने शुरू किए थे तो बीएलए ने इसका विरोध किया था। उसने चीन के ग्वादर जैसे प्रोजेक्ट के खिलाफ आवाज उठाई। बीएलए का कहना है कि पाक चीन के साथ मिलकर उनकी संस्कृति खत्म करना चाहता है। 

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