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US-Iran Nuke Talks: अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता जारी रखने का खामेनेई ने किया समर्थन, सतर्कता बरतने की दी सलाह
Tue, 15 Apr 2025 06:12 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 15 Apr 2025 06:12 PM IST
सार
US-Iran Nuke Talks: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता को लेकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा- बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन सतर्क भी रहना चाहिए। बता दें कि, दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता 19 अप्रैल को होने वाला है।
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अयातुल्ला अली खामेनेई, ईरान के सर्वोच्च नेता
- फोटो : ANI
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विस्तार
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता को लेकर कहा है कि बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन ईरान को बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए और हर कदम सोच-समझकर उठाना चाहिए।
पहले दौर की बातचीत हो चुकी है, अगला दौर जल्द
अमेरिका और ईरान के बीच पहला दौर 12 अप्रैल को ओमान की राजधानी मस्कट में हुआ था। यह बातचीत ज्यादातर अप्रत्यक्ष रूप में हुई थी। अब अगला दौर 19 अप्रैल को होने वाला है। पहले यह बातचीत इटली में होने की योजना थी, लेकिन अब फिर से ओमान में ही कराने का फैसला लिया गया है। हालांकि इस बदलाव की कोई खास वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
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खामेनेई का सधा हुआ रुख
15 अप्रैल को ईरान के तीनों प्रमुख शक्ति स्तंभों (कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका) के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में खामेनेई ने पहली बार इन वार्ताओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'बातचीत शुरू करने का जो फैसला लिया गया था, वह सही दिशा में था और अभी तक अच्छी तरह से आगे बढ़ा है। लेकिन आगे बढ़ते हुए हमें सावधानी बरतनी होगी। खामेनेई ने कहा कि इन वार्ताओं से कोई नतीजा निकल सकता है या नहीं भी, दोनों ही संभावनाएं हैं। उन्होंने आगे कहा, 'हम बातचीत को लेकर ना ज्यादा आशावादी हैं और ना ही निराशावादी। हां, हम दूसरी तरफ (अमेरिका) को लेकर बहुत ज्यादा भरोसे में नहीं हैं, लेकिन हमें अपनी क्षमताओं पर पूरा विश्वास है।'
देश के फैसले बातचीत से न जोड़ें- खामेनेई
अयातुल्ला अली खामेनेई ने अधिकारियों से साफ कहा कि देश की आर्थिक या राजनीतिक योजनाओं को इन वार्ताओं के नतीजों से जोड़कर न देखा जाए। उन्होंने कहा कि बातचीत जरूरी है, लेकिन देश को इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
यह भी पढ़ें - Kesari Chapter 2: कौन थे शंकरन नायर, केसरी चैप्टर-2 में दिखेगी जिनकी कहानी, पीएम मोदी ने क्यों लिया उनका नाम?
क्यों है बातचीत जरूरी?
ईरान पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांति और ऊर्जा के लिए है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगियों को डर है कि ईरान परमाणु हथियार बना सकता है। यही वजह है कि बातचीत के जरिए दोनों पक्षों के बीच समझौता करने की कोशिश की जा रही है।
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पहले दौर की बातचीत हो चुकी है, अगला दौर जल्द
अमेरिका और ईरान के बीच पहला दौर 12 अप्रैल को ओमान की राजधानी मस्कट में हुआ था। यह बातचीत ज्यादातर अप्रत्यक्ष रूप में हुई थी। अब अगला दौर 19 अप्रैल को होने वाला है। पहले यह बातचीत इटली में होने की योजना थी, लेकिन अब फिर से ओमान में ही कराने का फैसला लिया गया है। हालांकि इस बदलाव की कोई खास वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
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खामेनेई का सधा हुआ रुख
15 अप्रैल को ईरान के तीनों प्रमुख शक्ति स्तंभों (कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका) के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में खामेनेई ने पहली बार इन वार्ताओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'बातचीत शुरू करने का जो फैसला लिया गया था, वह सही दिशा में था और अभी तक अच्छी तरह से आगे बढ़ा है। लेकिन आगे बढ़ते हुए हमें सावधानी बरतनी होगी। खामेनेई ने कहा कि इन वार्ताओं से कोई नतीजा निकल सकता है या नहीं भी, दोनों ही संभावनाएं हैं। उन्होंने आगे कहा, 'हम बातचीत को लेकर ना ज्यादा आशावादी हैं और ना ही निराशावादी। हां, हम दूसरी तरफ (अमेरिका) को लेकर बहुत ज्यादा भरोसे में नहीं हैं, लेकिन हमें अपनी क्षमताओं पर पूरा विश्वास है।'
देश के फैसले बातचीत से न जोड़ें- खामेनेई
अयातुल्ला अली खामेनेई ने अधिकारियों से साफ कहा कि देश की आर्थिक या राजनीतिक योजनाओं को इन वार्ताओं के नतीजों से जोड़कर न देखा जाए। उन्होंने कहा कि बातचीत जरूरी है, लेकिन देश को इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
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क्यों है बातचीत जरूरी?
ईरान पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांति और ऊर्जा के लिए है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगियों को डर है कि ईरान परमाणु हथियार बना सकता है। यही वजह है कि बातचीत के जरिए दोनों पक्षों के बीच समझौता करने की कोशिश की जा रही है।
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