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Aurat March: पाकिस्तान के 'औरत मार्च' में हिंसा, क्या है यह विरोध और क्यों होता है इसमें बवाल, जानें सबकुछ
Thu, 09 Mar 2023 03:53 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 09 Mar 2023 03:53 PM IST
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औरत मार्च
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित ‘औरत मार्च’ में बवाल हो गया। बुधवार को राजधानी इस्लामाबाद में मार्च के दौरान पुलिस और प्रदशकारियों के बीच झड़प हो गई। यहां प्रेस क्लब के बाहर विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं और ट्रांसजेंडर इकट्ठा हुए थे। आरोप है कि पुलिस ने मौजूद लोगों को डंडों से पीटा और रैली को रोकने की कोशिश की। ऐसी ही हिंसक घटनाएं पाकिस्तान के कई शहरों में देखने को मिलीं ।आखिर ये ‘औरत मार्च’ क्या है? इसे कब से और क्यों आयोजित किया जा रहा है? इसका विरोध क्यों होता है? इस बार क्या हुआ? आइये जानते हैं…
पाकिस्तान 'औरत मार्च'
- फोटो :
ANI
पाकिस्तान का औरत मार्च क्या है?
पाकिस्तान के एक स्वयंसेवी महिला संगठन ‘हम औरतें’ ने औरत मार्च की शुरुआत की थी। यह संगठन हर साल महिला दिवस के मौके पर आठ मार्च को औरत मार्च का आयोजन कर रहा है। मार्च लाहौर, हैदराबाद, सुक्कुर, फैसलाबाद, मुल्तान, क्वेटा, कराची, इस्लामाबाद और पेशावर समेत अन्य शहरों में हर साल निकाला जाता है। पहला औरत मार्च 2018 में कराची में निकाला गया था।
पाकिस्तान के एक स्वयंसेवी महिला संगठन ‘हम औरतें’ ने औरत मार्च की शुरुआत की थी। यह संगठन हर साल महिला दिवस के मौके पर आठ मार्च को औरत मार्च का आयोजन कर रहा है। मार्च लाहौर, हैदराबाद, सुक्कुर, फैसलाबाद, मुल्तान, क्वेटा, कराची, इस्लामाबाद और पेशावर समेत अन्य शहरों में हर साल निकाला जाता है। पहला औरत मार्च 2018 में कराची में निकाला गया था।
क्यों आयोजित किया जाता है औरत मार्च?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए पाकिस्तान में महिलाएं औरत मार्च आयोजित करती हैं। इसमें महिलाओं को हर क्षेत्र में आजादी देने और आगे बढ़ाने की बात कही जाती है। मार्च के केंद्र में महिलाओं के लिए समान मजदूरी, सुरक्षा और शांति जैसे मुद्दे भी रहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए पाकिस्तान में महिलाएं औरत मार्च आयोजित करती हैं। इसमें महिलाओं को हर क्षेत्र में आजादी देने और आगे बढ़ाने की बात कही जाती है। मार्च के केंद्र में महिलाओं के लिए समान मजदूरी, सुरक्षा और शांति जैसे मुद्दे भी रहते हैं।
Aurat March in Pakistan
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
औरत मार्च का विरोध क्यों होता है?
2018 से आयोजित हो रहे औरत मार्च को हर बार पाकिस्तान में विरोध का सामना करना पड़ता है। मार्च को लेकर लगातार पाकिस्तानी समाज दो हिस्सों में बंटा दिखाई दिया है। महिलाओं को आजादी के सवाल पर कई कट्टरपंथी इस्लामी संगठन इसका विरोध करते रहे हैं। उत्तेजक नारों, बैनरों और पितृसत्ता को चुनौती देने वाली तख्तियों और तलाक और यौन उत्पीड़न जैसे महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उजागर करने के कारण भी इसका विरोध होता है।
2018 से आयोजित हो रहे औरत मार्च को हर बार पाकिस्तान में विरोध का सामना करना पड़ता है। मार्च को लेकर लगातार पाकिस्तानी समाज दो हिस्सों में बंटा दिखाई दिया है। महिलाओं को आजादी के सवाल पर कई कट्टरपंथी इस्लामी संगठन इसका विरोध करते रहे हैं। उत्तेजक नारों, बैनरों और पितृसत्ता को चुनौती देने वाली तख्तियों और तलाक और यौन उत्पीड़न जैसे महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उजागर करने के कारण भी इसका विरोध होता है।
औरत मार्च
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
मार्च के दौरान पहले क्या-क्या हो चुका है?
2019 में पहली बार यह आयोजन कट्टरपंथी समूहों के निशाने पर आया। तब इस्लामाबाद में जुलूस में शामिल महिलाओं पर जामिया हफ्सा कॉलेज के पुरुष छात्रों ने हमला कर दिया था। उन्होंने महिला संगठनों के टेंट उखाड़ दिए और उन पर पथराव किया। बाद में सोशल मीडिया पर इस मार्च से जुड़ी खबरें वायरल होती रहीं थीं।
2020 में औरत मार्च पर प्रतिबंध लगाने के लिए लाहौर कोर्ट में याचिका दायर की गई। लेकिन कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पाकिस्तान के संविधान के तहत शांतिपूर्ण ढंग से सभा करने का अधिकार सबको मिला हुआ है।
साल 2021 में भी मार्च विरोध से अछूता नहीं रहा। उस साल पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री की विशेष सलाहकार और सूचना प्रसारण मंत्री डॉ फिरदौस आशिक अवान ने मार्च पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को आजादी और अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर नारे लगाने की जरूरत नहीं है। सड़कों पर उतरने को अवान ने इस्लाम विरोधी और पाकिस्तानी संस्कृति के खिलाफ बताया था।
उसी साल कई कट्टरपंथी संगठनों ने इस मार्च को रोकने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मगर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस मार्च के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में लोगों को अपनी मांग रखने और कानून के दायरे में जुलूस निकालने का अधिकार है।
साल 2022 में ‘औरत मार्च’ को लेकर बड़ा सियासी विवाद उठ खड़ा हुआ था। जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) पार्टी के अध्यक्ष फजलुर रहमान ने इस मार्च को रोकने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि जरूरी हुआ तो उनकी पार्टी ऐसे आयोजनों को रोकने के लिए डंडों का इस्तेमाल करेगी।
तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने भी औरत मार्च को मुद्दा बनाया था। तत्कालीन इमरान खान सरकार में धार्मिक मामलों के मंत्री नुरुल हक कादरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कहा था कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन इस्लाम विरोधी नारों को रोका जाना चाहिए।
2019 में पहली बार यह आयोजन कट्टरपंथी समूहों के निशाने पर आया। तब इस्लामाबाद में जुलूस में शामिल महिलाओं पर जामिया हफ्सा कॉलेज के पुरुष छात्रों ने हमला कर दिया था। उन्होंने महिला संगठनों के टेंट उखाड़ दिए और उन पर पथराव किया। बाद में सोशल मीडिया पर इस मार्च से जुड़ी खबरें वायरल होती रहीं थीं।
2020 में औरत मार्च पर प्रतिबंध लगाने के लिए लाहौर कोर्ट में याचिका दायर की गई। लेकिन कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पाकिस्तान के संविधान के तहत शांतिपूर्ण ढंग से सभा करने का अधिकार सबको मिला हुआ है।
साल 2021 में भी मार्च विरोध से अछूता नहीं रहा। उस साल पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री की विशेष सलाहकार और सूचना प्रसारण मंत्री डॉ फिरदौस आशिक अवान ने मार्च पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को आजादी और अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर नारे लगाने की जरूरत नहीं है। सड़कों पर उतरने को अवान ने इस्लाम विरोधी और पाकिस्तानी संस्कृति के खिलाफ बताया था।
उसी साल कई कट्टरपंथी संगठनों ने इस मार्च को रोकने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मगर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस मार्च के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में लोगों को अपनी मांग रखने और कानून के दायरे में जुलूस निकालने का अधिकार है।
साल 2022 में ‘औरत मार्च’ को लेकर बड़ा सियासी विवाद उठ खड़ा हुआ था। जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) पार्टी के अध्यक्ष फजलुर रहमान ने इस मार्च को रोकने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि जरूरी हुआ तो उनकी पार्टी ऐसे आयोजनों को रोकने के लिए डंडों का इस्तेमाल करेगी।
तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने भी औरत मार्च को मुद्दा बनाया था। तत्कालीन इमरान खान सरकार में धार्मिक मामलों के मंत्री नुरुल हक कादरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कहा था कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन इस्लाम विरोधी नारों को रोका जाना चाहिए।
पाकिस्तान का औरत मार्च
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
औरत मार्च को लेकर इस बार क्या हुआ?
इस बार भी औरत मार्च विरोध और हिंसा का शिकार हुआ। लाहौर समेत अन्य शहरों में निकलने वाली सार्वजनिक रैली औरत मार्च के आयोजकों को अनुमति देने से जिला प्रशासन ने इनकार कर दिया। तय कार्यक्रम के मुताबिक, कराची में 12 तारीख को मार्च निकालने की योजना बनाई गई। बता दें, कराची में इस बार मार्च की तारीख आठ की बजाय 12 तय की गई। आयोजकों ने एक बयान में कहा, '8 मार्च को कार्यदिवस होने के कारण, हमने इसके बजाय 12 मार्च रविवार को कराची में औरत मार्च आयोजित करने का फैसला किया है, ताकि जिन श्रमिक वर्ग समुदायों के लिए हम काम करते हैं, उन्हें एक दिन की मजदूरी न खोनी पड़े।' हालांकि, शहर के अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला देकर मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आयोजकों को लाहौर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा जिस ने मार्च के लिए हरी झंडी दे दी।
वहीं, पंजाब सरकार ने बुधवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के औरत मार्च से पहले लाहौर में धारा 144 लगाकर सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके विरोध में पीटीआई के सैकड़ों कार्यकर्ता और समर्थक लाहौर में इमरान खान के आवास के बाहर जमा हो गए।
पुलिस ने पीटीआई कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की। पुलिस की कार्रवाई में इमरान खान के एक समर्थक की मौत हो गई। साथ ही प्रदर्शन कर रहे पीटीआई के सौ से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
इस बार भी औरत मार्च विरोध और हिंसा का शिकार हुआ। लाहौर समेत अन्य शहरों में निकलने वाली सार्वजनिक रैली औरत मार्च के आयोजकों को अनुमति देने से जिला प्रशासन ने इनकार कर दिया। तय कार्यक्रम के मुताबिक, कराची में 12 तारीख को मार्च निकालने की योजना बनाई गई। बता दें, कराची में इस बार मार्च की तारीख आठ की बजाय 12 तय की गई। आयोजकों ने एक बयान में कहा, '8 मार्च को कार्यदिवस होने के कारण, हमने इसके बजाय 12 मार्च रविवार को कराची में औरत मार्च आयोजित करने का फैसला किया है, ताकि जिन श्रमिक वर्ग समुदायों के लिए हम काम करते हैं, उन्हें एक दिन की मजदूरी न खोनी पड़े।' हालांकि, शहर के अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला देकर मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आयोजकों को लाहौर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा जिस ने मार्च के लिए हरी झंडी दे दी।
वहीं, पंजाब सरकार ने बुधवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के औरत मार्च से पहले लाहौर में धारा 144 लगाकर सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके विरोध में पीटीआई के सैकड़ों कार्यकर्ता और समर्थक लाहौर में इमरान खान के आवास के बाहर जमा हो गए।
पुलिस ने पीटीआई कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की। पुलिस की कार्रवाई में इमरान खान के एक समर्थक की मौत हो गई। साथ ही प्रदर्शन कर रहे पीटीआई के सौ से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
घटना के विरोध में इस्लामाबाद में प्रदर्शन
- फोटो :
पीटीआई
इस्लामाबाद में भी औरत मार्च हिंसक
इस्लामाबाद में भी महिला दिवस पर आयोजित औरत मार्च हिंसक हो गया। इस दौरान पुलिस और प्रदशकारियों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने कहा कि रैली में शामिल होने की कोशिश कर रहे ट्रांसजेडर की वजह से बवाल शुरू हुआ।
मार्च में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रैली को रोकने की बहुत कोशिश की। रैली के दौरान, प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए नारे लगाए। कम समय में ही इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर गंभीर अव्यवस्था फैल गई और मार्च करने वालों ने सरकार और मीडिया के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
इस्लामाबाद में भी महिला दिवस पर आयोजित औरत मार्च हिंसक हो गया। इस दौरान पुलिस और प्रदशकारियों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने कहा कि रैली में शामिल होने की कोशिश कर रहे ट्रांसजेडर की वजह से बवाल शुरू हुआ।
मार्च में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रैली को रोकने की बहुत कोशिश की। रैली के दौरान, प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए नारे लगाए। कम समय में ही इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर गंभीर अव्यवस्था फैल गई और मार्च करने वालों ने सरकार और मीडिया के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
मानवाधिकार आयोग ने की कड़ी निंदा
विवाद के बाद, कई लोगों और संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई और क्रूरता की निंदा की। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने ट्वीट कर इस्लामाबाद पुलिस द्वारा औरत आजादी मार्च में महिलाओं और अन्य पर लाठीचार्ज करने की निंदा की है।
विवाद के बाद, कई लोगों और संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई और क्रूरता की निंदा की। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने ट्वीट कर इस्लामाबाद पुलिस द्वारा औरत आजादी मार्च में महिलाओं और अन्य पर लाठीचार्ज करने की निंदा की है।