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जर्मनी में रक्षा खर्च बढ़ाः यूक्रेन युद्ध नहीं, आर्म्स इंडस्ट्री की लॉबिंग है असली कारण?

Sat, 09 Apr 2022 02:12 PM IST
Atul Sinha Atul Sinha
Updated Sat, 09 Apr 2022 02:12 PM IST
सार

रूस ने यूक्रेन पर हमला 24 फरवरी को किया था। 27 फरवरी को जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने एलान किया कि अब जर्मनी अपने जीडीपी का दो फीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च करेगा। इसके अलावा उन्होंने सशस्त्र सेनाओं के लिए 100 बिलियन यूरो का एक विशेष फंड देने की घोषणा की।

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As defence spending of Germany increases know what is the main reason Weapons industry Lobbying news in hindi
जर्मनी ने बढ़ाया रक्षा खर्च। - फोटो : Social Media

विस्तार

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जर्मनी ने अपने रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी का एलान किया। लेकिन अब सामने आई जानकारियों से जाहिर हुआ है कि इस बढ़ोतरी के लिए यूक्रेन युद्ध को सिर्फ बहाना बनाया गया। इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही थी। जर्मन सरकार ऐसी बढ़ोतरी करे, इसके लिए हथियार निर्माता उद्योग जोरदार लॉबिंग कर रहा था। इस दौरान उसने दसियों लाख यूरो खर्च किए। ब्रिटिश वेबसाइट ओपनडेमोक्रेसी.नेट ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में ये खुलासा किया है।
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रूस ने यूक्रेन पर हमला 24 फरवरी को किया था। 27 फरवरी को जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने एलान किया कि अब जर्मनी अपने जीडीपी का दो फीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च करेगा। इसके अलावा उन्होंने सशस्त्र सेनाओं के लिए 100 बिलियन यूरो का एक विशेष फंड देने की घोषणा की। तब सरकारी सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि जर्मनी ने ये कदम यूक्रेन पर हुए हमले के जवाब में उठाया है।
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लेकिन वेबसाइट ओपनडेमोक्रेसी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रक्षा खर्च में बढ़ोतरी की योजना पर कई महीनों से विचार चल रहा था। जर्मनी का रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र सेनाओं के लिए 102 बिलियन डॉलर के विशेष कोष की मांग अक्टूबर 2021 में ही पेश की थी। इसी मांग को फरवरी में स्वीकार कर लिया गया। लेकिन इसे इस तरह पेश किया गया, जिससे यह संदेश गया कि रूसी हमले के कारण यह कदम उठाया गया है।
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जर्मनी की इस घोषणा के बाद हथियार बनाने वाली कंपनियों के शेयरों के भाव में जबर्दस्त उछाल देखने को मिला। जर्मन सरकार के इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा इन्हीं कंपनियों को होगा। ओपनडेमोक्रेसी ने जर्मन संसद के लॉबी रजिस्टर के हवाले से कहा है कि ये कंपनियां सैन्य खर्च में इजाफे के लिए लंबे समय से लॉबिंग कर रही थीं। इन कंपनियों में एयरबस, हेन्सोल्ड्ट, क्रॉस-मेफिइ वेगमैन (केएमजी), लियोनार्डो, लॉकहीड मार्टिन, राइनमेटॉल और थाइसेन्क्रुप शामिल हैँ। ये कंपनियां साल 2020 से 64 लाख यूरो संसदीय लॉबिंग पर खर्च कर चुकी हैँ।

ओपनडेमोक्रेसी के मुताबिक संभव है कि 64 लाख यूरो असल में खर्च की गई रकम की तुलना में बहुत कम हो। रक्षा कंपनियां लॉबिंग के लिए कई तरीकों का सहारा लेती हैँ। राजनेताओं और कंपनी अधिकारियों को एक मंच पर लाने के लिए वे कई तरह के आयोजन करती हैँ। उन आयोजनों पर खुले हाथ से खर्च किया जाता है।


वेबसाइट ने कहा है कि हथियार निर्माता कंपनियों की तरफ से लॉबिंग करने वाले व्यक्तियों की पहुंच जर्मनी में सत्ता के ऊंचे हलकों तक है। यूरोपियन यूनियन में इन कंपनियों की लॉबिंग पर होने वाला खर्च 2017 में 2012 की तुलना में बढ़ कर दो गुना हो गया। ओपनडेमोक्रेसी ने कहा कि इस अवधि में यूरोप में सैनिक खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसी दौरान यूरोपियन यूनियन ने आठ बिलियन डॉलर का एक यूरोपीय रक्षा कोष बनाया है। इसका मकसद हाई टेक सैन्य उपकरण निर्मित करना है। ये सारा ट्रेंड पहले से चल रहा था। यूक्रेन युद्ध से सरकार को आम लोगों की निगाह में इन सबको जायज ठहराने का एक नया मौका भर मिला है।
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