न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स: बाइडन की इच्छा के मुताबिक चलने को तैयार कई देश, भारत-चीन को क्यों है एतराज
नई कर व्यवस्था की पहल जो बाइडन ने अमेरिका का राष्ट्रपति पद संभालने के बाद की थी। इस साल जुलाई में 130 देशों ने एक बयान जारी कर उनकी मंशा से सहमति जताई थी। बताया जाता है कि अब इस व्यवस्था को कैसे लागू किया जाएगा, इसका ब्योरा तैयार हो गया है...
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दुनिया भर में न्यूनतम 15 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर लगभग 140 देशों में सहमति बन गई है। ऐसी संभावना है कि इस शुक्रवार को इस बारे में एलान कर दिया जाएगा। सहमति बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका धनी देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) ने निभाई है। सहमति की घोषणा भी यही संगठन पेरिस में करेगा।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में छपी खबर के मुताबिक जो देश इस बारे में समझौता करने के लिए सहमत हुए हैं, वे दुनिया की 90 फीसदी से ज्यादा अर्थव्यवस्था की नुमाइंदगी करते हैं। इस नई कर व्यवस्था का मकसद कंपनियों को अपना दफ्तर टैक्स हैवेन्स में रजिस्टर करवा कर टैक्स बचाने के चलन को रोकना है। टैक्स हैवेन उन देशों को कहा जाता है, जहां कर की दरें बेहद कम हैं।
नई कर व्यवस्था की पहल जो बाइडन ने अमेरिका का राष्ट्रपति पद संभालने के बाद की थी। इस साल जुलाई में 130 देशों ने एक बयान जारी कर उनकी मंशा से सहमति जताई थी। बताया जाता है कि अब इस व्यवस्था को कैसे लागू किया जाएगा, इसका ब्योरा तैयार हो गया है। अगले हफ्ते वाशिंगटन में जी-20 के वित्त मंत्रियों का सम्मेलन होना है। उससे ठीक पहले इस ब्योरे को जारी किया जा रहा है।
आयरलैंड उन प्रमुख देशों में है, जिसने जुलाई में जारी बयान पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब खबर है कि शुक्रवार को जो बयान ओईसीडी जारी करेगा, उस पर आयरलैंड के भी दस्तखत होंगे। फ्रांस के आर्थिक मामलों के मंत्री ब्रूनो ला मेयर ने मंगलवार को ब्रसेल्स में कहा कि इस बारे में आयरलैंड अपने रुख को तय कर रहा है। इसके पहले इसी हफ्ते आयरलैंड के वित्त मंत्री पास्चल डोनहे ने कहा था कि लक्जमबर्ग में हुई वित्त मंत्रियों की एक बैठक में इस बारे में ‘कुछ प्रगति’ हुई है।
आयरलैंड उन देशों में है, जहां कॉरपोरेट टैक्स की दर 12.5 फीसदी से कम है। इस कारण दुनिया की कई बड़ी बहुराष्ट्रीय टेक और दवा कंपनियों ने अपने मुख्यालय वहां दर्ज करा रखे हैं। इन कंपनियों का वहां से कारोबार करना आयरलैंड की अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा सहारा है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि अपनी कम टैक्स दर के कारण आयरलैंड कंपनियों को उनके अपने मूल देशों में टैक्स चोरी करने का मौका देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस हफ्ते पैंडोरा पेपर्स के जारी होने से टैक्स चोरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उससे देशों पर इसे रोकने के लिए कदम उठाने का दबाव बढ़ा है। संभावना है कि ओईसीडी शुक्रवार को यह एलान करेगा कि 15 फीसदी न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स की नई व्यवस्था 2023 से लागू हो जाएगी। बताया जाता है कि नए समझौते में ये प्रावधान होगा कि कंपनी जिस देश में मुनाफा कमाएगी, उसे वहां टैक्स चुकाना होगा। अभी वो उस देश में टैक्स चुकाती है, जहां उसका मुख्यालय रजिस्टर्ड होता है।
बताया जाता है कि अभी नई व्यवस्था को लेकर कई बड़े देशों का एतराज कायम है। उनमें भारत, चीन और अर्जेंटीना शामिल हैं। इनका कहना है कि नई व्यवस्था के तहत सीमित सुधार किए जा रहे हैं, जो लंबी अवधि तक कारगर नहीं बने रह पाएंगे।